मेरे पैर में उन काटों के घाव है जिनके सिरे दिखे नहीं थे लेकिन चुभे बड़े गहरे थे प्रिया मिश्रा ************************************************************************************ एक भूखा आदमी एक दिन खुद को ही खा जाता है प्रिया मिश्रा *********************************************************************************** चीखने - चिल्लाने से बस हवाओ का रुख बदल जाता है बाकि सब हवाओ पे निर्भर है जहाँ की हवा तेज होगी वहाँ आंधी आएगी || प्रिया मिश्रा :) *********************************************************************************** मैंने हजार कोशिस की ना चलू उस राह पर जहाँ से मोड़ मुड़ जाया करते है लेकिन उसके एक भरोसे ने मेरा रास्ता मोड़ दिया अब न मंजिल है न रास्ता न कोइ मोड़ प्रिया मिश्रा ******************************************************************************** उसके मेरे बिच में बस इतना ही फर्क है वो ऐहतियात रखता है और मैं एहसास रखती हूँ वो बड़े प्यार से खुद को छुपा लेता है और मैं बड़े प्यार से उसके आँखों में सब कुछ पढ़ लेती हूँ ||...
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Showing posts from June, 2020
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मैं जलता हुआ दिया हूँ मैं प्रकाश हूँ मैं जल के ख़त्म नहीं हो जाता मैं प्रकृति में प्रकाश बन के घुल जाता हूँ || प्रिया मिश्रा :) ************************************************************************************* कल मैं जिस आदमी से मिली थी वो कही और किसी और दिशा से मुझे टकराया था आज जिस से मिली हूँ उसकी शक्ल वही है आत्मा मर गयी है दिशा बदल गयी है उसकी और वक़्त भी एक दिशा बदल के एक ही शख़्स के चार चेहरे दिखाता है || प्रिया मिश्रा ******************************************************************************* आदमी दुखी रहे तो अच्छा है जब वो जायदा हस्ता है तो उसके दर्द छलकने लगते है प्रिया मिश्रा :) *************************************************************************** अर्थी के पीछे की भीड़ या तो आपकी अमीरी बताती है ये फिर आपके अच्छे कर्म प्रिया मिश्रा :) **************************************************************************** ये सिगरेट की धुएं जितना गहरा प्रेम राख कर देता है प्रेम की नीव को ही प्रिया मिश्रा ______________________________...
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तेरी आँखों में एक खाली सा आसमान है जिसमे , मेरे सपनो का सूरज निकलता भी है डूबता भी है प्रिया मिश्रा :) सम्बन्धो के किले में अब खुले बागानों वाली रौशनी नहीं आती प्रिया मिश्रा जिन दुकानों की पूंजी लूट जाती है वहाँ अक्सर मेला लगता है प्रिया मिश्रा **************************************************************************** मैं तो बस इतना चाहती हूँ कुछ गुलाब खीलें बागों में ये हर वक़्त सफ़ेद रंग नहीं भाता || प्रिया मिश्रा :) ******************************************************************************** तेरे घर का रास्ता कितने पथरीले रास्तो से होकर जाता है लहूलुहान पैर के निशान दिखें तो समझ लेना कोइ सरफिरा आशिक़ है तुम्हारा भी जिसे नंगे पाँव चलने की आदत है अब भी इंकार से उसका दिल नहीं भरा एक दीदार की चाहत है उसे अब भी प्रिया मिश्रा :) ***************************************************************************** मैं कैसे मान लूँ सब कुछ बदल गया है आज भी वो हरे - भरे रास्तो की बिच पगडंडियों से गुजरता तेरे घर का रास्ता वही है , और तेरा घर भी वही है वह...
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मैंने आँखों में समुन्द्र भर के तैरना सिख लिया एक छोटा सा गीत गया जिंदगी ने और हमने गुनगुनाना सिख लिया अब हाले दिल सुनाने की हिम्मत नहीं रही करीबी लोगो ने हमें भुलाना सिख लिया रौशनी बाकि है लेकिन सूरज ने भी कुछ वक़्त के लिए डूब जाना सिख लिया || प्रिया मिश्रा :) मैं आदमी हूँ लेकिन आदमी जैसा सफर नहीं करता हूँ बस जिंदगी की गाड़ी में गुजर - बसर करता हूँ || प्रिया मिश्रा :) ******************************************************************************* जंजीरे अगर पाँव की पिघलानी है तो आग तो जलाना होगा ना बना सके सेतु कोइ गम नहीं धीरे - धीरे किनारा तो बनान होगा प्रिया मिश्रा :)
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"अंकित कर दूँ तेरे नाम को " शब्दों को अंकित कर के मैं अंकित कर दू तेरे नाम को वो भी शिला पे अंकित हो जायेगा लोग आएंगे पढ़ने प्रेम - प्रसंग की अंकित भासा कविता के गुफ़ा की दीवारों पर तू अंकित हो जायेगा मैं कोइ अशोक नहीं न कोइ शिलालेख बना पाऊँगी तेरे नाम को अंकित कर मैं अमर कर जाउंगी || फिर तुम रहो कही भी एक नाम अंकित होगा मेरी कविताओ में इस काल से उस काल तक समय की सिमा से बाहर और परे || प्रिया मिश्रा :)
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जब भी मुझे बारिश पे कुछ लिखने का मन हुआ मैं हमेसा सोच में रही क्या लिखू चाय - पकोड़े की बात या फिर इश्क में डूबे कोइ ख्याल या फिर अंकित कर दूँ अपने शब्दों में उस टूटी झोपडी को और उस भूख को उस शर्दी को जो ठिठुरती है बारिश की पहली फुहार में || प्रिया मिश्रा :) ************************************************************************************ गरीबी क्या है ठंडा चूल्हा और दरवाजे तक जाके लौट आती आश प्रिया मिश्रा *********************************************************************************** उनको हमसे प्रेम तक न थी , जो थी वो बर्बाद करने के लिए काम भी न थी तनहाई से जो यूँ गुजरे थे बर्बाद होने के सिवाय , और कुछ बची भी न थी आशुतोष मिश्रा *******************************************************************************
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मुझे नहीं पता की आग कैसे लगाई जाती है मुझे बस इतना पता है जहाँ आग लगती है वहाँ राख रह जाता है प्रिया मिश्रा :) ********************************************************************************** आपका वक़्त बदलने लगा है कैसे पता चलेगा अगर वक़्त अच्छा है तो सब गले मिलेंगे अगर नहीं तो वो आदमी भी किनारा कर लेगा जो आपको करीबी मित्र नहीं आपको अपनी अभिमान बुलाते थे कुछ वक़्त को जानने के लिए इन घड़ियों की जरुरत नहीं आदमी की पहचान जरुरी है क्युकी आदमी का कोइ ब्रांड नहीं होता औकात होती है जो समय के अनुशार बदल जाती हैं आपकी भी मेरी भी || प्रिया मिश्रा :) ******************************************************************************** प्यास लगी होगी तभी उसने रास्ता पूछा होगा किसी ने अंधे कुए को दिखा के एक मासूम से आँख की जान ले ली एक मासूम प्यास की जान ले ली || प्रिया मिश्रा :) ********************************************************************************** पासा उल्टा नहीं पड़ा है मैंने फेकें ही ...
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दुर्योधन के पक्ष लेने वाले बालक सुन लो एक कहानी एक अभिमानी नहीं कहलाता कभी दानी कर्ण को उसने छला था अपनी महत्वकांछा की भूख में खा गया वो साम्राज्य ९९ भाई की बलि चढ़ाई माँ के आसूँ भी सुख गए कुल वधु की लाज बिकी थी भरे बाजार दुर्योधन, ना नारी का था ना खुद वो नर था वो तो सत्ता का लालची नरभक्षी था || ठुकराया उसने शांति दूत को युद्ध को ललकारा था क्या निति कहती है हजारो की बलि चढ़ा के कोइ सिंघासन बनाने को चढ़ जाना पड़ता है खुद बलि एक राजा बन जाने को || अभिलाषा कोइ पाप नहीं लेकिन जो अभिलाषा खा जाये पूरा समाज वो अभिलाषा पाप है तो मन में मत लावो मेल पापी को हम पापी ही कहेंगे तुम दोस्ती रखो या बैर प्रिया मिश्रा :)
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हर बार युद्ध की मांग ना करो रणचण्डी रक्त मांगती है खुद दे सकते हो रक्त तो आगे आवो किसी और के सपूतो की बली न चढ़ावो सैनिक भी किसी के सपूत है यूँ युद्ध - युद्ध चिलाने से समस्या का समाधान न होगा कुछ शांति का प्रस्ताव ला सकते हो तो आगे आवो वीरांगनाओ के सपूत हमेसा वीर ही हुए है तुम बन्दुक उठावो तो आगे आवो रणचण्डी रक्त मांगती है खुद दे सकते हो तो आगे आवो यूँ युद्ध - युद्ध करके किसी का सिंदूर न चुराओ किसी की राखी उदाश रह जाएगी किसी भाई की बली ना चढ़ावो रणचंडी रक्त मांगती है खुद दे सकते हो तो आगे आवो युद्ध समाधान नहीं तांडव है अगर शिव की जटाएँ संभाल सकते हो तो आगे आवो यूँ युद्ध - युद्ध करके किसी मासूम बेटे की बलि न चढ़ावो तुम्हारा कुछ न जायेगा महीनो तक सोसल मिडिया पर लहू जागेगा फिर सो जायँगे सब बस एक घर जाग रहा होगा उस वीर सपूत का अरे हाय लगेगी तुम्हे उस माता की इंसान हो राक्षस न बन जाओ रणचंडी रक्त मांगती है खुद दे सकते हो तो आगे आवो || प्रिया मिश्रा :)
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मौत का तमाश देखने आये हो तो अभी वक़्त है फुर्शत में आना चादर अभी मैली हुई है सफ़ेद होने में अभी वक़्त है प्रिया मिश्रा :) ******************************************************************************** फ़क्त सफ़ेद सा इंद्रधनुष देखा है कभी मैंने देखा है गुजरे हुए उम्र के साथ || प्रिया मिश्रा :) ********************************************************************************* हम कौन है क्या है कैसे है अच्छे है क्या हम जानते है इन प्रश्नो का उत्तर || प्रिया मिश्रा :) ******************************************************************************* इतना मुस्कुराने की वजह दिन बदलने वाला है या बदल गया है प्रिया मिश्रा :) ******************************************************************************* युद्ध ने सिर्फ विनाश किया है कुछ शांति की बात तो कर लो कृष्ण की बात सुन लो दुर्योधन शांति दूत है वे भगवान् से बैर अच्छा नहीं वक़्त की चाल को समझो इतना अभिमान भी अच्छा नहीं || कौन से वक़्त की बात कर रहे आप पितामह , वो भिकारी पांडव क्या हमारी रथ रोकेंगे न...
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कभी किसी सागर को सूखते हुए देखा है मैंने देखा है सागर को बून्द बन के सूखते हुए रेत में कैसे खा जाती है रेत उसे सागर आता है बड़े जोश में और वही पथरा जाता है लोगो को लगता है रेत ठंडा हो गया समुन्द्र को पता है रेत उसे खा गयी || प्रिया मिश्रा :) ********************************************************************************* तुमने जो कहा था मैंने सुना था बस इतना सा ही मेरा गुनाह था || अब बांध लो गठरी अपने वादों की वादा भी तो खून में सना था वो रेत के टीले पर जो सपने मैंने गाड़े थे उन्हें हवा उड़ा ले गयी ये सब चुपके - चुपके हुए था किसी ने ना कुछ कहाँ था ना किसी ने कुछ सुना था || प्रिया मिश्रा :) ********************************************************************************* मैंने चखा ही नहीं रोटियों का स्वाद कुछ महीनो से इसलिए सायद मुझे भूख जायदा लगती है || प्रिया मिश्रा :) ********************************************************************************* लोग बात कर के बात बदल देते है ये अंदाज है आजकल बात करने का संभल के रहना , ये बातो का स...
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ऐ मेरे दोस्त तू दोस्त ही रहना जमाना खराब है और मौसम बदल रहा है लोग बातें कर रहे है की हर जगह की कीचड़ सन गया है तू सुन मेरे दोस्त उन कीचड़ो में पैर मत रखना कही तेरी - मेरी दोस्ती में कोइ फफूँदी ना आ जाये तू दूर ही रहना ऐ , मेरे दोस्त तू दोस्त ही रहना || प्रिया मिश्रा :) **************************************************************************88 मैंने पहली बार जब तुमको देखा था तब जाने क्यों ये ख्याल सा मन में बस गया जीवन संगनी तुम ही होगी मैं ख्यालो में डूबा लिखता रहा तू पढ़ती रही तूने मेरे ख्याल को कितना सराहा था लेकिन तुझे खबर भी थी ये पंक्तिया मैंने तुझको समर्पित कर के लिखी थी दिल से धक्का तो तब लगा मन को जब तूने किसी और का हाथ थाम लिया और मुझे अकेला छोड़ दिया इतनी वफाई मैंने दिखाई लेकिन तुझे मेरी वफ़ा रास ना आई || प्रिया मिश्रा :) ********************************************************************************* जब भी कोइ मुस्कुराता है कोइ मुखौटा वो जरूर लगता है लेकिन करीबी लोग समझ ही जाते है दोस्त इसी से तो पहचाना जाता है मन ...
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"श्रीमान - श्रीमती "" मैं आज जरा परेशान सा अपने लौन में घूम रहा था | तभी श्रीमती जी की चीखने की आवाज आई | मैं दौड़ा - दौड़ा गया | देखा श्रीमती जी अपने छोटे से दिमाग वाले सर को मोटे से कपड़े से बांध के बैठी है || मैंने कहाँ क्या हुआ ऐसे क्यों चिल्ला रही हैं आप | अभी सिर्फ मैं उठा हूँ सबको उठा के क्यों बताना चाहती है की सुबह का बर्तन मैं धोता हूँ || अरे वो बात नहीं है गट्टू के पापा वो हमारे सर में बहुत जोर का मरोड़ उठ रहा | मैंने कहा सर में मरोड़ ये तुमने आधुनिक बात न कर दी कुछ | हां हां सच में | लेकिन तुम रहने दो | वो मैं मायके से जो नीली , पिली , लाल गोलिया लेके आई हूँ वो ला दो जरा पानी के साथ | मैंने कहाँ एक बात बताओ भाग्यवान ये जब भी तुम्हारे सर में दर्द होता है तुम मायके की गोलियां ही क्यों खाती हो | और भी तो दवाईया है || अरे नहीं - नहीं , ये मेरी माँ ने गावँ के बैध से बनवाई है || कौन वो हरी राम हलवाई का बेटा | हां हां वही || वो तो कई वर्षो तक अपने पिता के साथ जलेबियाँ बनाता था | उसने कब बैध की पढ़ाई पढ़ ली || अरे वो पढता भी था और अपने पिता की मदद भी करता...
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वो आग बड़ी तेजी से फ़ैली थी जो लगी न थी सुलगाई गयी थी प्रिया मिश्रा :) ************************************************************************************ **** मेरे जाने का गम ना करना जो आग सुलगाई गयी है उसे तुम हवा देते रहना की तुम्हारी भी जमीं जलनी चाहिए , जैसे मेरे वज़ूद के आँचल में आग धीरे - धीर लगी थी || प्रिया मिश्रा :) *********************************************************************************** मैंने राह के पत्थरो को गले लगाया उनसे उनका ही एक घर बनाया फिर एक पत्थर पत्थर निकल गया और मकान ढह गया || प्रिया मिश्रा :) ************************************************************************* मैंने तो कविता का मान रखा है मैंने कहाँ अभिमान रखा है मैंने पूछा है शब्दों से कई बार क्या अब तुम सज जाओगे क्या अब तुम एक सुन्दर कविता बन जाओगे शब्द बोले हम तो मोती है बस तुम माला पीरों दो चलो एक और कविता की माला तैयार है सुगंध भी है जिसमे फूल भी है जिसमे || प्रिया मिश्रा *******************************************************************...
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"आम" आम एक शब्द नहीं एक पूरी की पूरी इंजिनयरिंग है भगवान् की देखो कैसे फलता है पहले मंजरियाँ आती है दिखती नहीं जल्दी जैसे हमें अपने जीवन में आने वाले बदलाव नहीं दीखते ईश्वर का आशीर्वाद नहीं दीखता फिर वो धीरे - धीरे बड़ी होती है हमें भी धीरे - धीरे लगने लगता है कोइ शक्ति है जो हमें जीना सीखा रही है फिर फल बड़ा होता है कच्चा सा , खट्टा सा , हम जिंदगी का स्वाद लेना सिख जाते है फिर वो फल पकता है हम मीठे का स्वाद ले मुस्कुराते है फिर वो फल एक दिन बीज बन के एक और पेड़ बनता है हम भी पुरानी जिंदगी से नए जिंदगी की और कदम बढ़ाते है और फिर एक वृक्ष त्यार होता है आम का और एक नए जीवन का एक स्वाद का एक फल का एक आशीर्वाद का एक सुनहरा दिन आम अपने आप में हमारा जीवन है गौर से देखो इसका फलना एक चमत्कार है हमारे जीवन की तरह || प्रिया मिश्रा :)
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"आये मेरे फूफा जी " गर्मियों की छुटियाँ बिताने आये मेरे फूफा जी बड़े - बड़े नखरे इनके तनिक भी ना भाये किसी को मेरे फूफा जी || कभी कहते पानी लावो कभी कहते पंखा झलो कभी लगाते हमारी चुगली कभी कहते किसी को कुछ कभी कहते किसी को कुछ || सुबह - सुबह के गलाले इनके गलगलगालगलगल नींद की उड़ गयी धजिया मां दिन भर तले उनके लिए भजिया हम हुए परेशान उनके खर्राटे हुए महान आह हुफ्फ आह हुफ्फ आह हफ्फ्फ्फ्फ्फ़ हुर्रर्रर्रर्र फुर्रररररर ऐसे गुजारी राते हमने जैसे कोइ अजगर सोया हो पास में अब ना झेले जाये फूफा जी लगाई हमने तरकीब लाया एक कमाल का आईडिया घूमने का कह के हम ले गए फूफा जी को कराई उनकी जेब धुलाई किया पैसो का तड़ातड़ धधड़ाधड़ खर्चे का वार दूसरे दिन आया सोमवार फूफा जी ने टिकिट कराई भागे वो सरपट झटपट हमने कहा फूफा जी ऐसे हमें छोड़ के ना जाओ एक बार के लिए ही सही एक मेला अभी बाकि है फूफा जी अब तो लौट आओ प्रिया मिश्रा
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जो अच्छा हुआ उसे याद रखा जो बुरा हुआ उसे भूल गए सबको माफ़ किया और आगे बढ़ गए इससे आगे जिंदगी बाकि ना रही कुछ याद रहा , कुछ भूल गए || भूल गए की कभी रोये थे भूल गए की कभी हारे थे जिसने रुलाया उसे भूल गए जिसने हसाया उसे याद रखा जिंदगी को कुछ इस तरह सजाया कुछ याद रहा कुछ भूल गए || पुराने दोस्तों को याद रखा नए दोस्त बनाते चले गए जो मिला प्यार से गले लगाया सफर में आगे बढ़ते गए सफर बना नई मंजिल हर मंजिल से सबक लेते चले गए कुछ याद रहा कुछ भूल गए || याद रखा तो सिर्फ इतना मैं कौन हूँ मैं क्या हूँ मेरी ताकत मेरा ज़ज्बा मेरी वजह से किसी के चेहरे की मुस्कराहट और फिर मेरा मुस्कुराना बाकि सब भूल गए || याद रखा तो बस इतना की मैं जो हूँ वही हूँ मेरी वज़ूद को कोइ और नहीं तराश सकता है जितना मैं कर सकती हूँ उतना करुँगी मुझे कोइ और मेरे रास्ता नहीं दिखा सकता मैं सूरज हूँ अपने गगन की मुझे तुम दिए ना दिखावो ये बिष से भरा घड़ा जाओ कही और ले जाओ मैंने सबकी नशीहते याद राखी सबका उलाहना भुला दिया मैंने खुद को पाके जिंदगी को जीना सीखा दिया मैंने कुछ ...
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मैं मौके नहीं तलाशती मौका मुझे तलाशता है आज क्या उपहार दे वो मुझे फिर वो कहता है मैंने आज का दिन और उसके सारे आशीर्वाद तुझे दे दिया और मैं मुस्कुरा देती हूँ मैं सूरज की किरणों को देखती हूँ तो वो मुस्कुरा के कहते है देखा है खुद को तुम्हारी चमक से हमारी आँखे चौंधियाँ गयी है और मैं मुस्कुरा देती हूँ || मैं जब फूलो से गुजरती हूँ फूलो की खुसबू मुझे छू जाती है मैं उन्हें नमस्कार करती हूँ और वो कहते है ये बाग़ तुम्हारा है हमें चुरा लो हम तुम्हारे बालो में सज के तुम्हारे बालो को सजाना चाहते है मैं उन्हें धन्यवाद कहती हूँ मैंने सबको देखा है सबको महसूस किया है सब हमारे है हम सबके है बस , नजर बदला है मैंने नजरिया अपने आप बदल गया है रात चांदनी से भर गयी है सूरज और चमक गया है || प्रिया मिश्रा :)
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जीवन बदला जा सकता है | अच्छी सोच और अच्छे कर्म के साथ || ************************************************************************************ मेरे जीवन में मैंने बहोत सारे बदलाव किये जिसने मेरी लाइफ को पूरी तरह से सकरात्मक बनाने में मेरी मदद की || १) मैंने अपनी समस्याओ को लिखना सुरु किया | उनका कारन ढूंढा | और एक - एक कर समाधान करने की कोसिस की | अधिकतर में सफलताएं मिली | लेकिन खुसी की बात ये है की | जीवन में बदलाव आये और सकरात्मक आये || २) मैंने रोज सुबह उठ के प्राथना करना सुरु किया || ३) मैंने यूनिवर्स को मेरे पास जो भी कुछ है उसके लिए धन्यवाद देना शुरू किया || ४) मैंने अपने पुराने दोस्तों से बात करनी शुरू की || ५)मैंने अपनी हर समस्याओ को एक अवसर की तरह देखना सुरु किया || हर परिस्थिति कुछ न कुछ सिखाती सीखिए और आगे बढिये || ६) मैंने रोज खुद की अच्छी आदतों को लिखना और उन्हें सराहना सुरु किया | होता क्या है आपमें सौ गुण हो और आपकी सौ लोग प्रसंसा करते हो लेकिन कोइ एक भी आपको अप्रिय कुछ बोल दे आप वो सौ बाते भूल कर उस एक नकारात्मक बात को दिल से लगा लेते हो | ...
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अवसाद क्या है अवसाद या डिप्रेशन एक मनोविज्ञानिक रोग है | इसमें इंसान खुद को बेकार और लाचार महसूस करता है | इसके कई कारण हो सकते है १) घर के माहौल का बचपन से खराब होना | माँ - पिता की लापरवाही || २) लगातार किसी चीज में हार का सामना करना || ३) प्रताड़ना , अकारण छींटाकशी ४) अचानक किसी चीज का लॉस ५) अचानक किसी व्यक्ति का बुरा व्यवहार || ६) और भी कई अनुवांशिक कारण हो सकते है || बचा कैसे जाये हमें प्रश्नो के साथ ही उत्तर पे खोजना शुरू कर देना चाहिए | १) अपने आस - पास के लोगो का ध्यान रखे | जैसे की अपने दोस्त , माँ - पापा , आपके बच्चे , आपके भाई - बहन और आपके कोइ और करीबी || २) कोइ हार जाता है या लगातार हारता है किसी चीज को लेके तो उसे हर समय प्रताड़ित ना करे || ३) अगर किसी व्यक्ति में कुछ अजीब सा बदलाव दिखे , जैसे की कोइ बोलता व्यक्ति अचानक से चुप रहना सुरु कर दे या कोइ रोते रहे हर वक़्त या अधिक गुसा का आना तो ऐसे व्यक्ति के प्रति अपनी संवेदना बढ़ा दे || ऐसा व्यक्ति अवसाद अर्थात डिप्रेशन का शिकार हो सकता है || कभी - कभी रोज हसने वाला व्यक्ति भी अचानक से लॉस...
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मुँह के बल गिरे हुए आदमी को ये एहसास हो जाता है उसने धैर्य को नहीं छोड़ा धैर्य ने उसे छोड़ दिया है || प्रिया मिश्रा :) ***************************************************************************** इंसान घमंड नहीं करता इंसान तो वक़्त की चक्की में पिस्ता हुआ वो अनाज है जो कभी पिस्ता है कभी उभरता है प्रिया मिश्रा :) ********************************************************************************** मेरे उत्तर की प्रतीक्षा मत करना मैं फिर जन्म लुंगी , एक प्रश्न बनके प्रिया मिश्रा :) ***************************************************************************** आज जब मृत्यु ने मेरे द्वार को खटखटाया मेरे अंदर का आदमी बाहर आया वो देखने लगा आकाश उसे नहीं हो रहा था बिश्वाश || अभी कहाँ मेरे मन का दीपक जला है अभी तक तो मैंने सबको छला है रहने दो और कुछ दिन देदो मुझे और अवकास मैं गिड़गिड़ाने लगा मृत्यु हसने लगी कहने लगी तेरी आज की ही तारीख तय थी तूने सोचा, तूने विजय पा लिया मुझपे तू होगा महलो का राजा मैं तो सबपे भारी हु मैं ना किसी का आभारी हूँ तब जब समय था तो तू...
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मूर्खो के सभा में आया एक संत महा गंभीर बोला , संत वाणी मूर्खो को याद आ गयी उनकी नानी बोले कौन हो तुम अभिमानी हम इतने दिनों से जी रहे अंधेरो में तुमने क्यों सूरज उगाने की ठानी क्या तुम अंधे हो वो संत अभिमानी संत बोला , देखो तो जला के दीपक कैसे प्रकाश भर जायेगा एक मुर्ख उठ के बोला रहे दे बाबा मेरा झोपड़ा जल जायेगा संत बोले कही दिए से आग लग जाता है मुर्ख बोले , नहीं दिए की बाती से, पिघलने लगता है आसमान और फिर बरसने लगते है बादल और डूब जाता है तुम्हारा ज्ञान || संत अब सदमे में है उन्हें अब इलाज की जरुरत है || सभी मुर्ख उनका इलाज कर रहे संत के मन में चोट लगी है मुर्ख उन्हें झंडू बाम लगा रहे है || प्रिया मिश्रा :)
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बेटियाँ , बेटियाँ ही क्यों रह जाती है ?? बहुएँ क्यों नहीं बन पाती ?? सास - ससुर माँ - बाप क्यों नहीं बन पाते ?? बेटा कौन सा चोट खाके घुटता रहता है ?? ऐसा कौन सा लालच है जो सिर्फ अधिकार मांगता है धर्म नहीं सीखा पाता ? ऐसा कौन सा प्यार है जो बुढ़ापे तक नहीं जाता ? मकान घर की ओर रुख क्यों नहीं लेते ? ईंट - पत्थर अब सिर्फ इमारते क्यों बनाते है ? क्यों माँ - बाप विर्धाश्रम जाते है ? जिनका पूरा परिवार हो वो अकेले क्यों रह जाते है ? ये मैं नहीं पूछ रही , कई सालो से खड़ा वो विर्धाश्रम पूछ रहा है | जो हमें हमारे ही मुँह पे चिढ़ाता है और कहता है तुम भी यही के लिए बने हो थोड़ा हड्डियों को कमजोर होने दो | अभी तुम्हारे हाथ में लाठी नहीं है , इसलिए कोइ ना कोइ साथी है || बिर्धाश्रम एक ऐसा सच है एक शूल की तरह चुभता है क्युकी सबको अपना भविस्य वही दीखता है | फिर भी हम गलतियाँ कर जाते है | इंसानियत नहीं सिख पाते | कारण बहोत है १) माँ - पिता का अपने कार्यो में व्यस्तता हमारे माता - पिता को कभी फुर्सत नहीं मिलती हमें सही - गलत बताने की | वो समझते है , उम्र के साथ सीख जायँगे और हम सोचत...
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हर व्यक्ति को खुद पे और दुसरो पे भरोसा होना चाहिए लेकिन , जरुरत से जायदा नहीं || क्युकी, अति की बारिश भी कीचड़ दे जाती है || प्रिया मिश्रा :) ************************************************************************************** आज का ज्ञान घर में भाई - बहनो और भाई - भाई में लड़ाई होना आम बात है लेकिन ध्यान रहे ये लड़ाई इतनी ना बढ़ जाये | आपके भाई बहनो के सर पे समोसे निकल आये और मम्मी आपकी चटनी बना दे || प्रिया मिश्रा ************************************************************************************* आदमी जब जोर से हँसता हूँ तब वो अंदर से मरा हुआ रहता हूँ || जब वो रोता है , उसकी साँसे चल रही होती है लेकिन जब वो चुप हो जाये ,समझ लो आदमी जीने की कोसिस कर रहा है यमराज से कह रहा है एक कोशिस और करने दो सायद अब मैं सिख पाऊँ जीना और कह पाऊँ आईने से अभी मैं जिन्दा हूँ || प्रिया मिश्रा :) *********************************************************************************** मैं मिलके तुमसे तुम्हारा हाल पूछना चाहता था लेकिन मिल ना पाया कोइ बेड़ियाँ नह...
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इन घासों को देख के प्रकृति के बर्बरता पे क्रोध सा आ जाता है कोइ किसी को कोमल क्यों बनता है की रख दे बूट सा एक कोमल हृदय पर कोइ इतनी पशुता कहाँ से लाता है || प्रिया मिश्रा :) ********************************************************************************* अब मैं उत्तर की प्रतीक्षा नहीं करती अब उत्तर मेरी प्रतीक्षा में है की, मैं प्रश्न बन जाऊँ || प्रिया मिश्रा :) *************************************************************************************** लोग जब भी आये बड़े प्यार से आये और फिर , गुलिस्ताँ बन के गुल को मारते चले गए प्रिया मिश्रा :) ************************************************************************************ आज की जवान नश्लों में इरादों का बुढ़ापा आ गया है प्रिया मिश्रा :) ******************************************************************************** जब अकेला था मैं काँटो भरे जीवन में तब लोग राह बदल लेते थे आज आँखे बंद है तो मालाएँ लिए पूरा गुलिस्तां खड़ा है || प्रिया मिश्रा :) ***********************************************...
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सोना को सोने की तरह चमक पाने के लिए कितने आग में जलना होता है ये नियति है या निर्ममता है ये आत्मदाह है या हत्या है प्रिया मिश्रा :) ********************************************************************************** एक आदमी रोते - रोते एक दिन इतना थक जाता है वो उन्ही आँसुओं की सीढ़ी बना के एक दिन सबको छोड़ कर चला जाता है प्रिया मिश्रा :) ********************************************************************************* मैंने असत्य का बिरोध किया था अब मंजिल नई थी लेकिन रास्ता खुद बनाना था और कुल्हाड़ी भी खुद ही लानी थी कोइ मार्ग नहीं देता जब आप सुमार्ग पर होते है प्रिया मिश्रा :) ********************************************************************************** मेरी कवितायेँ मेरा मूल रूप है अभी तक इनमे कोइ , मिलावट नहीं दुनियादारी की || प्रिया मिश्रा :) ********************************************************************************** एक कवि का हृदय जितनी बार धड़कता उतनी बार नई कविताएँ जन्म लेती है || प्रिया मिश्रा :) *************...
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प्रेम सच्चे प्रेम को जानता है जो आकर्षण पे आकर्षित होता है वो आकर्षण ही होता है प्रेम नहीं प्रेम कभी अकेला नहीं होता वो जुड़ा रहता है आत्मा के परमात्मा से || प्रिया मिश्रा :) ********************************************************************************** मैं बहोत दूर तक चलती रही तुम्हारे साथ मेरे पाँव में काटें चुभ आये थे मेरे आँखों का पानी सुख गया था तुम इंकार करते रहे मैं बस तुम्हारी आँखों की बातें पढ़ना चाहती थी बहोत दूर तक तुम्हारे साथ चल के तुम्हे महसूस करना चाहती थी लेकिन जब तुमने मुड़ के नहीं देखा और आखरी बार मेरा हाथ झटक दिया तब मुझे एहसास हुआ तुम्हारा प्रेम प्रेम था ही नहीं एक आकर्षण था जो , ख़त्म हो गया वक़्त के साथ अब किस रिश्ते से तुम्हे रोकूँ और किस रिश्ते से तुम्हारा रास्ता रोकूँ कोइ राह भी तुमने नहीं छोड़ी और कोइ प्रीत भी नहीं || प्रिया मिश्रा :) *********************************************************************************** हाँ, का था में यकीन कर लेना जीना मुश्किल है उतना दुखदाई भी || प्रिया मिश्रा :) **************...
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प्राथना एक आखरी पत्र मेरी इतनी सी प्राथना है मैं जीवन को अनुभव कर पाऊँ मेरी इतनी सी प्राथना है मेरे पावँ रहे जमीं पर और आकाश को हाथो से समेट लूँ मैं चिड़ियाँ बन के उड़ जाऊँ बादलों से अपना श्रृंगार करूँ मैं प्रकृति के रंग में रंग जाऊँ अब ना मैं पिंजरे का जीवन स्वीकार करूँ || एक पैर में पायल लो एक पैर में फूलो का श्रृंगार हो माथे पे मेरे सूरज चमके चांदनी को दुपट्टे में टाँक मैं चाँद की दुल्हन बन जाऊँ || मैं गिरधर की मुरली बन जाऊँ मैं राधा की सहेली बन जाऊँ मैं नृत्य करूँ बाँध बूंदो को पग में मैं मोरनी के पंख चुरा लाऊँ मैं बनु किसी की सहेली मैं भी प्रियतम संग करू अठखेली मैं आंख मिचौली खेलूँ मैं बच्चे का प्राण बन जाऊँ || मैं हसूँ खिलखिला के मेरे हसीं से झरना फुट पड़े मैं पहाड़ो में भी जीवन भर लाऊँ मेरी ख़ामोशी को ग्रहण लगे मेरी आवाज को कोइ शुर मिले मैं अँधेरे को चिर के बाहर आऊँ एक सूरज मेरा भी इन्तजार करे अब कोइ ना मेरा तिरस्कार करे किसी में इतना ना साहस हो वो मुझे मौसम के साथ बदल जाये जो प्रेम नहीं निभा सकता व...
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सुनो शिव सुनो शिव अब तांडव करो तुम्हारी भक्त तुम्हे पुकारती है खोल लो अपनी जटाओं को की अब भक्त पे चिंता भारी है अब बहोत पुकारा उसने तुमको की अब तुम्हारी बारी है || कब तक वो चुप रहेगी कब तक वो सहती रहेगी कभी तो तुम्हे पिघलना होगा कभी तो भक्त की पुकार पे भगवान् को भी उतरना होगा || डम -डम -डम डमरू बाज रहे तांडव अब तो होना होगा सुनो शिव, पुकार रही भक्त तुम्हारी अब तो तुम्हे उतरना होगा कोइ वरदान तो देना होगा कब तक वो अंधेरो में रहे कब तक वो प्यासी रहे अब चाँद को भेजो रौशनी लाये जटाओं को खोलो गंगा लावो अब तो तुम्हे पिघलना होगा सुनो शिव पुकार रही भक्त तुम्हारी अब तो तुम्हे उतरना होगा || तुम कैलाश आवोगे या मैं पत्थर की बन जाऊँ तुम प्रीत की रीत निभाओगे या मैं वैरागी बन जाऊँ मैं शिवा नहीं हूँ न मैं शिव हूँ मैं भक्त हूँ मैं कैसे तपस्या में साध्वी बन जाऊँ क्या तुम्हे स्वीकार होगा मेरा अपमान क्या तुम्हे नहीं छू जायेगा मेरे प्रेम का तिरस्कार तो उठो शिव अब त्रिशूल का प्रहार करो अब ना मुझे निराश करो अब भेजो अपने ...
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जब थक के सारी दुनिया से तेरे आँचल में सो जाऊंगा तब मैं पूरा का पूरा तेरा हो जाऊंगा अभी मैं एक पेड़ हूँ जब फिर से जन्म लूंगा जब बीज बन के टूट जाऊंगा तब नव पल्लव फूटेगा तब मैं पूरा का पूरा तेरा हो जाऊंगा || प्रिया मिश्रा :) ************************************************************************* मैं डूब के तुझमे रेत सा खो जाऊंगा तु बून्द - बून्द बहती जा मैं किनारा होता जाऊंगा || प्रिया मिश्रा :) *********************************************************************************
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मैं तेरी गंगा की धरा तुम काशी से मुझमे बस्ते हो मैं धीरे - धीरे बहती हूँ तुम महादेव के त्रिशूल पे रहते हो || मैं प्रीत हूँ तुम प्रेम हो फिर भी ना मुझसे कुछ कहते हो || मैं धीरे - धीरे बहती हूँ तुम महादेव के त्रिशूल पे रहते हो || मैं जानू तेरी हर बातें तुम घाट - घाट के सताए हो || मैं धीरे - धीरे बहती हूँ तुम महादेव के त्रिशूल पे रहते हो || तुम दर्द लिए पृथ्वी की अलग से जग में रहते हो तुम पत्थर दीखते जग को लेकिन तुम पानी से भी बहते हो तुम प्राण हो तुम प्रिय हो तुम प्रिया - प्रिया भी कहते हो || मैं धीरे - धीरे बहती हूँ तुम महादेव के त्रिशूल पे रहते हो || तुम बाँट लो खुद को दुनिया में हिर्दय को बाटने से डरते हो तुम प्रकाश हो तुम दीपक हो पर जाने क्यों अँधेरे में तुम रहते हो || मैं धीरे - धीरे बहती हूँ तुम महादेव की त्रिशूल पे रहते हो || तुम जाओ - जाओ कहते हो लेकिन जाने से मेरे डरते हो तुम नकार लो खुद को मुझसे तुम मेरे प्रिय प्रिया - प्रिया तुम भी कहते हो || मैं धीरे - धीरे बहती हूँ तुम महादेव की त्रि...
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जब मैं आखरी साँस ले रही होंगी तब भी हाथ में कलम होगा और कागज में , मैं जीवन लिख जाउंगी || प्रिया मिश्रा :) ****************************** मैं बच्चे जैसा दीखता हूँ मैं बच्चा नहीं हूँ भूख ने मुझे मुझे बड़ा बना दिया गली - गली घूम के कमाना सीखा दिया मैं फूल हाथ में लिए खड़ा हूँ मैं फूल था लेकिन अब बिक रहा हूँ मैं धुप में सीक रहा हूँ मैं बच्चे जैसा दीखता हूँ मैं बच्चा नहीं हूँ प्रिया मिश्रा :) ********************************* क्यों ना ब्रह्मांड में स्थिरता लाया जाय स्त्री - पुरुष को रहने दे क्यों ना मानवता को उभारा जाये स्त्री - पुरुष सब साथ आ जायेंगे जब मानवता ख़िल के आएगी ना स्त्री बड़ी है न स्त्री त्यागी है न पुरुष बड़ा है ना पुरुष त्यागी है याद कर लो मानवता को मानवता सबपे भारी है || प्रिया मिश्रा :) *************************************************************** हर किसी के बात पे दिल नहीं आ जाता वो कभी - कभी फिसलता है दिल के फिसलने के लिए दिल का चलना जरुरी है और दिल के चलने के लिए , दिल का ज़िंदा होना जरुरी है और दिल के ज़िंदा होने के लिए दिल...
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रिमझिम :- मैम , आप इतनी सफल लेखिका है आपके लिए कितना अच्छा होता होगा ना , अपनी बात आसानी से रख पाना | रिया :- इतना आसान भी नहीं था ये सब , कई ठोकरे खाई है , तब जाके कलम सही पकड़ना आया है | रिमझिम :- मैम मैं आपके बारे में जानना चाहती हूँ , आज आप दोस्त समझ के अपने पुराने जीवन के पन्ने पलट दीजिये मेरे लिए || रिया :- पुराना जीवन गुजर चूका है , रिमझिम | गुजरे हुए कल में जाया जा सकता है | लेकिन वहाँ जाके लौटा नहीं जा सकता | ये सब आसान ना होगा | आज जो मैं हूँ वो बिता हुआ इतिहास है उसे पलटना अब मुझसे ना हो पायेगा || रिमझिम :- मैम ट्राय तो करिये सायद आपकी कहानी किसी की प्रेरणा बन जाये | रिया :- रिमझिम हर गुजरा हुआ कल किसी न किसी के लिए एक सन्देश ही होता है || रिमझिम : - लेकिन मैम मैं आपके जीवन की उस किरण को प्रकाश बनान चाहती हूँ जो , अँधेरे में ग़ुम हैं , जिसे बस एक झरोखा चाहिए खिलने के लिए || रिया :- अच्छा तो बताओ क्या जानना चाहती हो ? रिमझिम :- मैम आपको लिखने की प्रेरणा कहाँ से मिली ? रिया :- लिखने की प्रेरणा...
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शुरुआत शुन्य है अंत शुन्य है तो फिर किस बात का अहम् लिए बैठो ना कुछ लेके आये ना कुछ देके जाओगे अभिमान का घड़ा भरेगा तुम उसमे खुद ही डूब जाओगे ये डूबने का सिलसिला तब तक जारी रहेगा जब तक खुद को ना पहचान पावोगे आदमी को आदमी समझो क्युकी , वो भी शुन्य है तुम भी शुन्य हो उसका भी शुरुआत शुन्य है तुम्हारा भी शुरुआत शुन्य है ना तुम महान हो ना कोइ और महान है प्रिया मिश्रा :) ********************************************************** मनुष्य जीवन के सार्थकता को तब समझता है , जब वो जीवन के आखरी पड़ाव पे होता है || तब उसे एहसास होता है वो शुन्य था शुन्य है || प्रिया मिश्रा :) ************************************************************************** मैं वहाँ से झाँकती हूँ जीवन को जहाँ कोइ खिड़की दरवाजा नहीं है बस एक सुराख है और वो सुराख ही मेरा जीवन है || प्रिया मिश्रा :) ************************************************************************* रौशनी को महसूस करने के लिए , एक खिड़की का होना जरुरी है खिड़की का बाहर के तरफ...
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ये सलाम - दुआ सब चलते - चलते होने लगा है रुक के गले लगाने वाले अब बिरले ही मिलते है प्रिया मिश्रा :) ************************************************* मेरी आखरी ख्वाइश बस इतनी है परिणाम नजर आये मुझपे जो बीती है उसका अंजाम नजर आये दिल से जो आग निकली है वो कही तो कुछ सुलगाएगी मेरी कफ़न की मिट्टी मुझे न्याय जरूर दे जाएगी निकलेगा कोइ बीज कोइ फल तो जरूर फलेगा मेरे जीवन में हो या न हो इस परीक्षा का कोइ परिणाम तो जरूर निकलेगा मैं रहूँ या ना रहूँ मुक्ति तो मिलनी है मुझे भी मेरी रूह को भी || प्रिया मिश्रा :) *********************************************** अकारण की पीड़ा असहनीय होती है और अकारण की मौत अकाल प्रिया मिश्रा :) *************************************** मेरा डाकियाँ मेरा सन्देश लाये बाहर खड़ा है दरवाजे की जंजीर खुलती नहीं डाकियाँ इन्तजार में है वक़्त है बदल जायेगा जंजीर ही तो है खुल जायेगा || प्रिया मिश्रा :) ************************************** घर के कोने - कोने में रौशनी बस्ती थी हमने जब भी देखा काला चश्मा लगा के देखा प्रिया मिश्रा :) ******...
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ये शिकायतों का सिलसिला चलता रहेगा अगर निकल ना पावोगे अपने पूर्वजन्म से नया जन्म लो और भविष्य देखो इसकी गर्भ में बहोत कुछ है जानने को तुम्हारा अपना भी और पराया भी || प्रिया मिश्रा :) ************************************ जंगल में खोना सबको आता है जंगल से निकल आवो तो बताना राह कठिन थी या नई राह मिल गयी निकल आये ,या फिर से भटक गए नए पेड़ो की तरह झूमना सीखा या ठूठ हो गए वही कटे पेड़ो की तरह जंगल से निकल आना तो बताना प्रिया मिश्रा :) ************************** हम रिवाजो में इतने ग़ुम गए है की नया कुछ करना ही नहीं आता पलटते रहते है वही भूली - बिसरि यादें आज में जीना ही नहीं आता जब खुद को नहीं सीखा पाए नए रिवाजो को बनाना तो कैसे कह दे की नए रिवाज तुम बना लो बुरा को बुरा कहने दो तुम खुद को अच्छा बना लो कम से कम आईना एक चेहरा तो देखे सचाई का , तो रहने तो बुराई खुद को अच्छाई बना लो प्रिया मिश्रा :) ********************************************* अभिमानी मनुस्य खुद को वैसे ही जलाता है जैसे चूल्हे में पड़ा कोयला जलते - जलते राख हो जाता है ||| प्रिया ...
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मैं रात भर तारे गिनते रही मन्नते मांगती रही रात बदल के सुबह हो गयी मेरी सारी मन्नते किरणे बन के मुझसे लिपट गयी || प्रिया मिश्रा :) ************************************* मैंने घर छोड़ दिया शहर आ गए शहर ने मुझे गुलाम बना लिया और मैं राजा नजर आता हूँ औरो की नजर में लेकिन मेरे पैरो में बेड़ियाँ है शहर की प्रिया मिश्रा :) *************************************** मैं बेरोजगार बैठा था तुमने अपनी याद दिला के रोजगार दे दिया हाँ रोजगार , तुम्हे सोचने का रोजगार इसमें भी कमाई है मैंने , बड़ी अमूल्य चीज वो तुम हो बड़ी अमूल्य मेरे आँखों में पालते सपने की तरह || प्रिया मिश्रा
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अब मैं सोचता हूँ तेरी आँखों को अपना घर बना लूँ कहाँ अब मैं कोइ सफर तय कर पाता हूँ चलता हूँ कही और , राह भूल तेरी आँखों में खो जाता हूँ || प्रिया मिश्रा :) *********************************************** हम इतनी नादानियों के बाद भी फल - फूल रहे है हमारे कर्मो का लेखा - जोखा नरमी से लिया जा रहा है बस यही दिखता है की , माँ का हिर्दय कितना बड़ा है प्रिया मिश्रा ******************************************** ये ख्यालो में खोने का सिलसिला पुराना हो गया है चलो कुछ नए दोस्त बनाते है चलो फिर से मुस्कुराते है कौन जाने हमारी मुस्कराहट किसी की जान हो जाये किसी अजनबी की मुस्कराहट हमारी वजह से खिल जाये चलो किसी की मुस्कराहट बन जाये ये रोना - धोना बहोत हुआ चलो कुछ नए दोस्त बनाये || प्रिया मिश्रा :) ******************************************* बहोत सारी बातें तुमसे करनी है चलो आज आँखों से कुछ बाते हो जाये शब्दों का सिलसिला कभी और होगा प्रिया मिश्रा :) **************************************** मैं खुली आँखों से सपने देखती हूँ कुछ जाय...
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मैं तुझे भूल के भी नहीं भूल पाता हूँ ऐसा क्या हैं तुझमे कोइ नशा या कोइ नई दिशा प्रिया मिश्रा :) मेरी कविताओ में सारा संसार बस्ता है बस मैं नहीं बस्ती प्रिया मिश्रा :) नए लिबाश से पुराने खयालात नहीं बदलते किस्से आज भी वही है जो कल हुआ करते थे बस शक़्ल बदल गयी है कहानी आज भी वही है || प्रिया मिश्रा एक आदमी एक वक़्त में बहोत ख़ास और एक वक़्त में बहोत बकवाश नहीं होता है वक़्त बदल जाता है आदमी अब भी वही है वक़्त बदल गया है , और वक़्त के साथ नजर बदला है नजरिया भी आदमी अब भी वही है || प्रिया मिश्रा :) बड़ा कठिन प्रश्न है कुसूर क्या था ?? जवाब सन्नटा खा गयी अब वो भी पूछती है क्या पूछा था ?? और गूँजता रहता है सवाल अब भी कुसूर क्या था ?? प्रिया मिश्रा :) दायरे में रहने वाले लोग सीमाओ का जायजा लेते रह जाते है जो सिमा से बहार की सोचते है वो नई परिभासा लिखते है एक नई सिमा बनाते है जिसे कोइ लाँघ नहीं पता वर्षो तक कई वर्षो तक || प्रिया मिश्रा ये भावनावो का खेल निराला है कभी वहाँ मत जाना जहाँ भावनाये बस्ती हो ये समुन्द्र की लहरे है नि...
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लोग समझते है कहानी लिखना आसान है , लेखक को पता है कहानी लिखने को जीना पड़ता है उस शख्स को जो कहानी का सूत्रधार है || चाहे वो पागल हो , खुशनुमा हो या दुखी हो , मरना पड़ता है कई बार चाहे लेखक जिन्दा ही क्यों ना हो || प्रिया मिश्रा :) ********************************************************************************* मन के आँगन में प्रेम का एक पौधा , फलेगा - फूलेगा फिर भर देगा तेरे आँगन को अनगिनत फूलो से | अनगिनत फलो से | तो सींचो इसे प्रेम से | इसपे कोइ जोर ना डालो इसे फलने दो | जरा वक़्त दो | इसकी पत्तियों को भी रंग से सराबोर होने दो | यूँ घेर के ना रखो थोड़ा इसे सूरज की रौशनी से नहाने दो | थोड़ा चाँद को भी प्यार दिखाने दो || तब आयेग एक रंग प्यार का | सबकी रौशनी लेके खिलेगा आपका पौधा सतरंगी इंद्रधनुष सा आपके मन के आँगन का प्रेम का पौधा || प्रिया मिश्रा :) ************************************************************************************ हम जिनके लिए रोते हैं उनके लिए हसना सिख ले तो कैसा हो | सारे पल उसने हमें रुलाया ना होगा | कभी तो हसाया होगा | उन पालो को याद कर ले तो कैसा...
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एक फूल मुरझाया हुआ सा किसी कोने में पड़ा था हमने उसके बाग़ लगा दिया अब अनेक फूल है मुस्कुराते हुए से || प्रिया मिश्रा :) ************************** ****************************** मेरी मुस्कराहट मासूम है इसे खिलने दो आज पर्यावरण दिवस है || प्रिया मिश्रा :) ************************* ****************************** ये इश्क की बात में कुल्हाड़ी सी धार है कुछ न कुछ घाव आ ही जाता है स्वीकार करो तो भी ना करो तो भी || प्रिया मिश्रा :) *************************** ये संघर्ष की बात करते - करते हमने रास्ते को खाई बना दिया अब सोचते है संघर्ष पहले था, या अब है प्रिया मिश्रा :) ******************************** रात भर तारो को निहारते हुए सोचती रही मैं , इन तारो का क्या काम , फिर ख्याल आया , प्रकृति के आँचल में जुगनू ना हो तो रात काली सी हो जाएगी चाँद अकेला क्या करेगा जब प्रकीर्ति की साड़ी स्याही हो जाएगी || प्रिया मिश्रा :) ************************* ******************************* ऐसा क्या है तुममे जो खुदा बने फिरते हो एक मुस्कराहट भी नह...