मैं रात भर तारे गिनते रही
मन्नते मांगती रही
रात बदल के सुबह हो गयी
मेरी सारी मन्नते किरणे बन के मुझसे लिपट गयी ||

प्रिया मिश्रा :)
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 मैंने घर छोड़ दिया
शहर आ गए
शहर ने मुझे गुलाम बना लिया
और मैं राजा नजर आता हूँ औरो की नजर में
लेकिन मेरे  पैरो में बेड़ियाँ है शहर की

प्रिया मिश्रा :)
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मैं बेरोजगार बैठा था
तुमने अपनी याद दिला के
रोजगार दे दिया
हाँ रोजगार , तुम्हे सोचने का रोजगार
इसमें भी कमाई है
मैंने , बड़ी अमूल्य चीज
वो तुम हो
बड़ी अमूल्य
मेरे आँखों में पालते सपने की तरह || 
प्रिया मिश्रा

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