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Showing posts from January, 2021
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आँसुओं का निकलना एक उन्मुक्त और स्वाभाविक आचरण है भीड़ का इकठा होना भीड़ के सम्वेदनशीलता पे निर्भर करता है || प्रिया मिश्रा :))     24      
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सप्तर्षि आसमान में जमीं पे ज्ञान कौन देगा  ? सब झाँकेंगे अपने घर की खिड़कियों से अम्बर की खिड़की कौन खोलेगा  ? प्रिया मिश्रा :))     https://www.youtube.com/watch?v=fCF1qu0t_DM  
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चाँद का भी अपना एक घर है जहां वो छुप जाता है दिन के तपिश में || प्रिया मिश्रा :))     24    
जो डाल टूट के अभी -अभी गिरी है वो ना पेड़ की रही ना धरती की ना आसमान की वो डाल अब कहाँ जाएगी   पेड़ भी ठूठ हो जायेगा परन्तु वो कहाँ अपना पायेगा .... अपन ह्रदय से टूटी डाल को शायद वो सुख जाएगी या ले जायेगा कोइ जंगली जानवर उसे और खा जायेगा या फिर .. कोइ उसे धुप में पकायेगा फिर जला देगा कही वो किसी मकान के पाये से लग जाएगी या जिवंत हो जाएगी .. किसी का घर सजाएगी वो टूटी डाल कहाँ जाएगी  ? प्रिया मिश्रा :))     24    
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अम्बर पर   कुछ प्रेम कहानियाँ लिखीं जाती है धरती पर कुछ प्रेम कहानियाँ पढ़ी जाती है तेरा -मेरा प्रेम भी कुछ ऐसा ही है अम्बर पे लिख गया है धरती पर ...... बादल बन के बरसा है और दे गया है मुझे ... एक नया जीवन || प्रिया मिश्रा :))    24     https://www.youtube.com/watch?v=_UoGNbW8LjA
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मज़बूरी की रोटियाँ तोड़ी नहीं जाती दाँतों से दर्द रिश्ता है आँखों से पानी गिरता है || रात सुबक कर रोज ... एक झोपड़ी में सोता है || प्रिया मिश्रा :))     24   
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 एक चिड़ियों का जोड़ा सर्दी की रात में ना बचा पाया अपना घोंसला वो रात कुहासे वाली थी जिसमे लोग अपने घरो में बैठ लिख रहे थे महबूब पे कविता उस चाँद का चेहरा देख जो निष्ठुर सा निस्तेज सा देख रहा था चिड़ियों के जोड़े का घोंसला उजड़ते हुए   प्रिया मिश्रा :))      24    https://www.youtube.com/watch?v=fCF1qu0t_DM    
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मैंने कोइ क़िताब नहीं लिखीं लेकिन मेरी एक कहानी है जिसका अंतिम पन्ना कोरा है और पहला पन्ना खूबसूरत बीच के पन्नो में सिर्फ तुम हो बीच का पन्ने   मेरे दिल के सबसे करीब है || प्रिया मिश्रा :))     24   
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लालटेन की धीमी सी रौशनी में ............... शांत है लेकिन जल रही है एक गरीब की झोपड़ी प्रिया मिश्रा :))     24   
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वो तुम्हारा दिया ग़ुलाब ... मैंने सहेज़ के ऐसे रखा है जैसे कोइ रोजी रखता है,,अपनी छुपा के ...... जीवन चलाने के लिए प्रिया मिश्रा :))     24      https://www.youtube.com/watch?v=bf06UwrDsTQ  
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जी चाहता है अपने लबों से तुम्हारे लबों पे लिख दूँ इश्क़ की कोइ क़िताब प्रिया मिश्रा :))     24     
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 छोटी -छोटी खुशियों से छोटा -छोटा घिरौंदा महकेगा जब फूल खलेंगे बागो के ... हर माली चहकेगा तो चलो कुछ हाथ बढ़ाओ कुछ पेड़ लगाओ कुछ शिक्षा की नींव रखो   ज्ञान के प्रकाश को चहुँओर फैलाओ चलो .... अब बहोत हो गया अब ज्ञान और बाग़ान की एक क्रान्ति लाओ प्रिया मिश्रा :))    24     
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आज के समय को कल के समय से मत मापीये.. कल का समय बदल जायेगा जो कल बिता  है समय ... वो कुछ ना कुछ सबक दे जायेगा जो कल आएगा समय वो आपके बीते समय की कहानी गायेगा ...... कुछ दे जायेगा कुछ ले जायेगा ये समय है हसियें मत इसपे ये जाते -जाते आ जायेगा और आते -आते चला जायेगा .. ये बदल देगा अपनी चाल खुद धीमा हो जायेगा ... और आपको नचायेगा ये समय है कुछ आपका है कुछ दुसरो का है अच्छा है बुरा है सब मिलजुल के बांटोगे बुरा से बुरा समय टल जायेगा जो हॅसोगे समय पे ये समय ..... तुमपे जग को हस्वायेगा कभी मान दिलाएगा कभी अपमान दिलाएगा सबके साथ रहिये मिलजुल के ..... बाटियें अपना अच्छा समय लोगो के साथ भी कल को आपको भी बुरे समय का नेवता आएगा तो संभल जाइये और संभाल लीजिये ये समय ... आपको उपहार भी दे जायेगा || प्रिया मिश्रा :))     24     
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सुनो बचा लो पृथ्वी ... मना लो उत्सव जाने कब तक प्रकृति का श्रृंगार रहेगा ..... जैसा मानव-युग आया है ..... कुछ छण थामेंगी ... खुद को माँ फिर काली का अवतार होगा और चहुँओर सिर्फ तांडव रहेगा ..... ये वक़्त बड़ा मनोरम है अभी धुप -छाँव दीखते है .. लेकिन ,, जैसा मानव -युग आया है ... अब मानव प्रकृति का कोइ मेल नहीं ... अब तो बस अन्धकार होगा सुनो मानव .. अब तक तुम खेल लिए माँ के आँचल से ... मैले किये बहोत तुमने उनके आँचल को अब प्रकृति के द्वारा ...तुम्हारा तिरस्कार होगा प्रिया मिश्रा :))     24     
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साथ ऐसे देना है एक दूजे का हमें .... जैसे दो हाथों ने आसमान थामा हो प्रिया मिश्रा :))     24    
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ज़रूरी है मिलना दो दरख्तों का भी ... प्रकृति का खिलना भी ज़रूरी है .... ज़रूरी है सवरना आसमान का भी बादलो का बरसना   भी जरुरी है प्रिया मिश्रा :))     24        
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धीमे से एक चिड़िया बोली ... सुन जंगल की नन्ही चिड़िया गा जरा जोर से कुछ आवाज लगा पूछ ... इनसे जंगल काटने वालो से जंगल ना रहा तो हम कहाँ जायेंगे हम मर जायेंगे || प्रिया मिश्रा :))          
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कोई  और  ख़्वाहिश नहीं है .. मेरी   एक तेरे साथ के सिवाय....!!  प्रिया मिश्रा :))   24       
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  साथ देने की  आदत ज़्यादा  डाले .............. सलाह देने की कम ....  प्रिया मिश्रा :))              
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मेरा बचपन लौट आता है मुझमे शाम ढूंढकर || प्रिया मिश्रा :)) 
मैं उसी दयार का हूँ जहां मेरा कोइ शक़्ल नहीं मैं वो बाग़ान हूँ जिसके एक -एक फूल से खुसबू आती है .... लेकिन मेरा कोइ इख़्तियार नहीं मेरा कोइ दयार नहीं मेरा कोइ दयार नहीं प्रिया मिश्रा :))     24 
मेरा कोइ शहर नहीं है मैं हर शहर का बाशिंदा हूँ ..... मैं आवारा सा बादल मैं .............उड़ता सा पंछी मैं हर नदी को छूटा किनारा ... मेरा कोइ शहर नहीं है मैं हर शहर का बाशिंदा हूँ मैं नहीं रहा कभी भेड़ो के चाल में मैं एक आवारा परिंदा हूँ किस भेद को लेके जायेंगे किस भेद को लेके रहना है ........ जो मिट गया वो भी अपना था या पराया .... खबर नहीं ..... जो है वो भी जाने किसका है .... मुझे कुछ खबर नहीं   मैं मरा हुआ हूँ की ज़िंदा हूँ मेरा कोइ शहर नहीं है मैं हर शहर का बाशिंदा हूँ ..... प्रिया मिश्रा :))     24 
भीड़ में कम रहने वाले लोग भीड़ के बात -चित्त का केंद - बिंदु होते है यही उनकी उपलब्धि है वे शामिल नहीं .... फिर भी वे मौजूद है .... हर शहर के हर जुलुश में || प्रिया मिश्रा :))     
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 मेरे मन का बच्चा मुझसे ...... खेला करता है उस खेल में वो प्रतियोगिता करता है और जीत जाने पर खिलखिला के हस्ता है ये सब खामोसी में होता है वो हस्ता है मैं खामोश रहती हूँ || प्रिया मिश्रा :))  mere man ka bachha
हमारे आस -पास हो रहे बदलाव के साथ हमारा बदलना क्यों जरुरी है ?      हमारे आस -पास हो रहे बदलाव के साथ हमारा बदलना हर बार संभव नहीं हो पाता | लेकिन ये आवश्यक है की हम नई चीजों के बारे में जाने समझे  ये एक जरुरी और  आवश्यक प्रक्रिया है | समय के साथ  ताल -मेल रखना अपने आप को जीवित रखने जैसा है | इसलिए जरुरी है की हम हो रहे बदलाव के साथ अपने आप को बदले |    इसे हम इस तरह से समझे की अगर कोइ ३० वर्ष पहले अपनी पठान -पाठन को छोड़ चूका है तो वो आज कल के बिषयों को नहीं समझ पायेगा | जिसके कारन वो आजकल के बच्चो के साथ और युवावों के साथ ताल -मेल नहीं बिठा पायेगा | ये सब  हो रहा है,, और जिसके दुष्परिणाम स्वरुप हमें ऐज- गैप की समस्या देखने को मिल रही है |
समस्याओ के समाधान के लिए कई और समस्याएं उत्पन्न करना मानव जाती का ...... जन्मसिद्ध अधिकार है और पृथ्वी के लिए ये एक श्राप है || प्रिया मिश्रा :))     24 
हम जिस पृथ्वी को अपना देश पड़ोसी का देश अपना राज्य पड़ोसी राज्य अपना शहर पड़ोसी का शहर अपना घर दूसरे का घर .... ऐसी .. एक अंधी सोच रखते हुए बरबाद कर रहे है   और सोच रहे है की कोइ स्वर्ग हमें प्राप्त होगा इस पृथ्वी से कही दूर आसमान में भर्म है  ..... दरहसल ... ये पृथ्वी ये प्रकृति ही स्वर्ग है प्रिया मिश्रा :)) 
 हमारे बच्चे हमारे मित्र होने चाहिए ना की जिम्मेदारी    हमे अपने बच्चो की परवरिश नहीं करनी चाहिए ...........बल्कि उनकी उम्र के साथ ताल -मेल बैठानी चाहिए || ये परवरिश का बहाना कर हम अपने बच्चो को दूर करते जा रहे है ..........खुद से भी और समाज से भी ......हमारे बच्चे अकेले होते जा रहे है ....... हमे अपने बच्चो को ........उम्र के हर पहलु के बारे में बताना चहिये .......... अभी जरुरत है अपने बच्चो को बताने की ....क्या सही है क्या गलत है ....... और कृपया इसे अपनी जिम्मेदारों का नाम ना दे ........... क्योकि जब हम अपने बच्चो को जिम्मेदारियों की तरह देखते है ..... तो वो बस एक हमारी जमा -पूंजी वाली सोच हो जाती है ........... और धीरे -धीरे हम खुद को और अपने बच्चो को अपाहिज बना रहे है || हमे अपने बच्चो को बताना होगा ... उम्र बढ़ने के होने वाले बदलाव के बारे में लड़की और लड़के के बिच होने वाले अट्रैक्शन के बारे किसी भी व्यक्ति के स्पर्श के बारे में अपनी सुरक्षा को लेके जागरूकता के बारे में हमे अपने बच्चो को ........ आधुनकता का सही मतलब समझाना होगा समझाना होगा उन्हें की ......... इस पुरे ...
किसी भी व्यक्ति को कुछ समझाने से पहले हमें किन -किन बातों का ध्यान रखना जरुरी है ?     1)    हमे किसी भी व्यक्ति को कुछ समझाने से पहले उसकी मानशिक स्थिति को समझना आवश्यक होता है उसकी  परिस्थितियों से अवगत होना जरुरी होता है || बिना किसी को पूरी तरह से जाने हम किसी को कुछ समझा नहीं सकते | जैसे मैथ्स के एक प्रॉब्लम का फार्मूला उसके दूसरे प्रॉब्लम पे काम नहीं करता .........वैसे ही .......हमारी अपनी सोच दुसरो पे काम नहीं करती .......इसलिए समझाते वक़्त इस बात का ख़ास ध्यान रखे की क्या समझाना है और क्यों समझाना है ||    2)    अगर बात दो लोगो के बिच की हो ..........और आपको उन्हें कुछ समझाना हो ......या फिर न्याय की बात हो ......तो वहाँ भी दोनों पक्षों के विचारो को भली -भातिं अवलोकन  कर के ही  ..अपने विचारो  को रखना चाहिए || एक तरफ़ा न्याय हानिकारक होता है ||    3)  हमे अपनी विचारो पे भी पुनः विचार करना चाहिए की जो हमने किसी को समझाने हेतु कोइ बात कही है || क्या वो सटीक समाधान है .... आपके बताये गए समाधान से किसी का ह्...
किसी भी जीवित रिश्तें  में अगर प्रेम जताने का दिन .... निर्धारित हो तो वो उस रिश्ते का अपमान है सारे रिश्ते प्रेम के हकदार है हर रोज हर घडी .. दिन या तारीखों को कफ़न तक रखा जाये तो अच्छा है || प्रिया मिश्रा :))     24 
  अपने पुरे दिन को बेहतर कैसे बनाया जा सकता है ?    अपने पुरे दिन को बेहतर बनाने के लिए हम प्रमुख कार्य कर सकते है | 1) हमारे अगले दिन की शुरुआत ..हमारी बीती रात पे भी निर्भर करता है इसलिए हमें सोते वक़्त अपने आस -पास कोइ भी नेगेटिव विचार और चीजे नहीं रखनी चाहिए .... पूरा प्रयाश करे की ..........जल्दी और मुस्कुराते हुए सोये | हमें रात को सोते वक़्त उन सारी बातो को एक बार सोचना चाहिए जो अच्छी हुई है ..........आपके पुरे दिन में | सोने से ठीक पहले अपने हक़ीक़त के सपने को उड़ान देके सोना भी ...........एक बेहतर दिन की शुरुआत करेगा ||   2)   हमारे दिन की शुरुआत योग से होनी चाहिए ........... योग अपने आप में एक अच्छी प्रक्रिया है ....जो हमें पुरे दिन स्वस्थ और ऊर्जावान रखती है | मानशिक तनाव को दूर करने के लिए ..... योग अथवा प्राणायाम बेहद कारगर है | सुबह -सुबह अखबार पढ़ना बहोत अच्छा नहीं माना जाता है ..... कारन ये नहीं की हमारे समाचारपत्र में कोइ दोष है | कारन बस इतना है ........आजकल के सारे समाचारपत्रों में अधिकतर नकारात्म खबरों की भरमार रहती हैं | ऐसे में सुबह को गुड ब...
खुद के अभिमान से मुक्त होने का ............ बेहतरीन तरीका ये है .........की आप मान लो आप सबकुछ हो या .................. आप कुछ ही नहीं हो || जो भी आपके आस -पास है वो आपके साथ ही जन्मा है और आपके साथ ही .... एक दिन वो भी समाधी ले लेगा || प्रिया मिश्रा :))     24 
तुझे चाहने वाले बहोत मिलेंगे ..... लेकिन प्रेम से तेरे सर पे ... हाथ फेर के तुझे स्नेह देने वाला  सिर्फ मैं ही था .... होंठ चूमने वाले होंगे बहोत .... तेरी दुनिया में तुझे जिसकी .. निशानी ... तेरी पेशानी पे याद आएगी वो सिर्फ मैं ही था || प्रिया मिश्रा :))      24 
तुम मेरे लिए .... मेरे जीवन में ... सब्जी में नमक जितना ... जरुरी हो .... तुम्हारे बिना सबकुछ ... मेरे जीवन में बेस्वाद सा है || प्रिया मिश्रा :))     24
हमारे वो..  कहते है  कभी -कभी  हमारी .... नादानियों में  लाड़ दिखाते हुए ...  पगली हो तुम पगली .....  बड़ी वाली .....     हम भी दबा लेते है  दाँतो के कोने में ...  अपनी आँचल का कोना ....  और लाजा के कहते है ......    जे तो तुम सही कह रहे हो जी ......  पगली ही हैं   हम तुम्हारी ....  पक्की वाली ||     प्रिया मिश्रा :))   24
ज़माने भर में हुई हमारी शिकायतें जब हमने की ज़माने से शिकायतें जमाना  मुँह फेर गया .... ये ज़माने की फ़रेबी ..... ले डूबेगी .... सबको ... शिकायतों का सिलसिला चलता रहेगा ..... प्रिया मिश्रा :))     24 
बड़ी मुद्दतो बाद .... हमने दिल लगाया ............ जब बाल तजुर्बे के रंग में सफ़ेद हो चुके थे ........ बड़े दिनों बाद हाथो में ..... मेहंदी रंग लाई है ..... बड़े दिनों बाद मेरा चाँद भी ..... मेरी महबूब की चेहरे में उतर आया है ... बड़े दिनों बाद ... कुछ ऐसा हुआ है ..... बड़े दिनों बाद मेरा शरमाना हुआ है || प्रिया मिश्रा :)) 
जाने दो प्रीत की बाते ये बातों से ख़त्म होने वाला मसला नहीं || प्रिया मिश्रा :))      जिंदगी को आशिक़ी की आदत सी हो गयी है मुझसे ............ अफ़सोस .. जिंदगी को प्रेम ना हुआ मुझसे .... प्रिया मिश्रा :))     
मैंने अपने सपनो को समंदर में डाल दिया वो डूबे नहीं गोते लगा रहे है ये मेरे सपने भी ना मेरे होके ही रहेंगे प्रिया मिश्रा :))     24 
रिश्तो में आ रहे बदलाव को कैसे रोके      रिश्तों में हो रहे बदलाव को रोकने से पहले ये जानना जरुरी है की .......... ये रिश्तों में आ रहे बदलाव क्यों आ रहे है ? क्या कारन है .... जो हमसे हमारे रिश्तें दूर होते जा रहे है || ऐसे बहोत से सवाल होंगे जो आपके भी मन में आते होंगे || कभी सोचा है हमारे अहम् रिश्ते कौन से है ?  हमें उनके साथ कैसे रहना चाहिए   ? हमें उनके साथ ऐसे ही क्यों रहना चाहिए ? शायद हाँ और शायद ना ........... हमने कभी नहीं सोचा | मुझे लगता है ..........हमारे अहम् रिश्तें मुख्यतः चार या पांच ही होते है .............. हम उन पांच लोगो को खुस करने के लिए पांच सौ करोड़ रिश्तों को खुस करने का प्रयाश करते है | और हम अपने अपनों से दूर हो जाते है | हम खुद से दूर हो जाते है || समझने की आवश्कता है ................... आखिर क्या करे की हमारे अपने हमारे करीब रहे  ? जब हम पैदा हुए... बड़े हुए.... और हमें जो जैसे कहता गया हम करते गए | हमने कभी नहीं सोचा ऐसा क्यों ? वो क्यों ? हम बस आँख बंद बैल की तरह मुड़ते गए .............. बाद में बड़े हुए तो रिश्तो के र...
आहिस्ता -आहिस्ता   डूबता सा मेरा मन    तेरी बाँहों का सूरज तलाशता है  जब गिरती है   बारिश की बुँदे   और छू जाती है  जब वो मेरे लबो को    तब तुम्हारे होठो की  वो छुअन सिहरा जाती है  रोम- रोम को   और  तलाशती है फिर से ..........  वही ..... स्पर्श ||    प्रिया मिश्रा :))     24  
जीने लगो जब ख़ुशी से मत शामिल करो अन्यत्र पसरे सन्नाटे को .... ये सन्नटा चीर देता है   खुशियों के एक -एक पल को || प्रिया मिश्रा :))     24
किताबें बोलती है || सच तो है ........... अगर किताबें न होती तो हम कितने अधूरे होते | न कुछ समझ पाते ना कुछ समझा पाते | किताबों का हमारे जीवन में होना एक वरदान है | इस वरदान का हमें सही तरीके से प्रयोग करना चाहिए | हमारे यहां किताबों को माँ सरस्वती के रूप में देखा जाता है .....उन्हें पूजा जाता है | कभी -कभी कई ऐसे प्रश्न होते है हमारे मन में ...जिन्हे हम सिर्फ किताबों की मदद से ही उनके हल ढूंढ पाते है | किताबें जीवन का सार है | हम सभी का जीवन किताबों पर ही निर्भर है ............लेकिन मुख्यतः  हमारे शिक्षक ,हमारे बच्चे , क्षात्र ........इत्यादि इनके जीवन में पुस्तक एक वरदान है किताबें हमारे चरित्र निर्माड में अहम् भूमिका निभाती है | बचपन से लेकर युवा अवस्था और युआ अवस्था से लेकर ...वृद्धा अवस्था तक ...........किताबें ही एकमात्र हमारी सच्ची दोस्त और सही मार्गदर्शक होती है ................ एकांत जीवन को बिभिन्न रंगो में बाटने वाली ये किताबें ही तो है ........... हमें अधिक और अधिक शिक्षित करने वाली ये किताबे ..............न सिर्फ हमारे लिए .........बल्कि उन सभी लोगो के लिए भी जरुरी है ....
कुछ किताबें बोलती है ........... सुन के देखिए पन्ने पलटिये .... और समेट लीजिये खुद को ............. किताबों के शब्दों में || प्रिया मिश्रा :)) 
कितने फूल बिखर गए है | कितने फूल बिखरेंगे || हमने छोड़ दिया है | माली बनना || नन्हे पौधे सूखते जा रहे है | बीज अब पनपता नहीं है || कही खो गया है | वो बागान हमारा || अब सारे फूल कैद है गमलों में और गमला लोगो की सोच जितना रोज - रोज छोटा होता जा रहा है || प्रिया मिश्रा :))