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Showing posts from March, 2021
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  खोकर हमें नुकसान तुम्हारा भी होगा मैं कोई पतझड़ नहीं जो लौट आउंगी गुजरा हुआ वक़्त हूँ बसंत नहीं बन सकती || प्रिया मिश्रा :))      
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रेलगाड़ी वाला प्यार  ये रेलगाड़ी का सफ़र भी न बहुते बोरिंग होता है ..........हाँ सही कह रहे आप शर्मा जी .............लेकिन हमेसा नहीं होता है ....|| हमारा पर्सनल एक्सपीरियंस है .............बात उस रात की है .........जब गांव में कुत्ते और शियार  दोनों भौकते थे .............शियार भौकता नहीं है ...........मिश्रा जी ..............हुआ ...........हुआआआ करता है || अरे उहे शर्मा जी .......................अब कहाँ दीखता है,,  सब  ||   अरे छोड़िये आप  ,, कहानी बताईये ................कहानी ? अरे जो फेंक रहे थे  ................ट्रैन वाली लव स्टोरी | का बात कर रहे हैं आप शर्मा जी ...............फेंक न रहे है .............सच कह रहे है | अरे वो दिन हम पटना जा रहे थे ................इंटरसिटी से ...........वो भी आई ...........गुलाबी सूट में थी एकदम सेंट -वेंट लगा के ..........बगल में बैठी तो लगा की ...........हम गुलाब के बागान में बैठ गए है || उसका दुपट्टा हमारे छोटी ऊँगली से टच कर रहा था ...............झुरझुरी और गुदगुदी दोनों साथ में हो रही थी ................ फिर .........
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लिखा कुछ किया कुछ सुना कुछ और ,, पढ़ा कुछ ये कविता नहीं ये लेखक भी नहीं ये दोमुहे  समाज के दोमुहे  रूप है ये कविता नहीं है प्रिया मिश्रा :))    24       
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वक़्त मुझे आजमाता है मैं वक़्त को आजमाती हूँ दोनों वक़्त के साथ जीतते और हारते रहते है || प्रिया मिश्रा :))   24       
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  चुटकी ब्याह का घर है ,, संभाल के सामान रखा करो बुआ जी आँखे दिखाती  हुई चुटकी की माँ से बोली | चुटकी की माँ "ग्रेजुएट " है हिंदी से ,, पहले इनके लेख छपते थे  ........समाचार पत्रों में | अब कुछ नहीं करती | चुटकी के पिताजी भी हिंदी से "ग्रदुएट" है |  लिखते है और मुशायरा करते है | मुशायरे में ही चुटकी के नाना ने पसंद किया था इनको .........सोचा था दोनों लिखते है ,, एक दूसरे को सराहेंगे और आगे बढ़ेंगे | अफ़सोस ऐसा हुआ नहीं || चुटकी की माँ सिर्फ गृहणी बन के रह गयी .............लिखना क्या बोलती भी नहीं है || चुटकी की बड़ी बहन की शादी है | दूल्हे वालों के लिए सारा सामान लाया गया है ...........पलंग उसमे लगाने को चार लकड़ी के डंडे ......बर्तन , फर्नीचर के सामान सबकुछ || लड़का ज़्यदा पढ़ा लिखा है | सब खुस है ................बस चुटकी उन चार डंडो को देख रही थी ..............आखिर कर माँ से पूछ ही बैठी ..................क्या ये देना जरुरी है ...........इससे जीजा "जीजी" को मारेंगे  जैसे तुम्हे पापा मारते है घर सन्नाटो से भर गया ..............चुटकी के पापा पाँव पटकते हुए बाहर चल...
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मेरा रणचंडी बनना अभी कुछ दिनों तक कुछ लोगो के लिए बड़ा ............... भयावह रहेगा मैं अब ......... कुचले हुए पुष्प से बीज में परिवर्तित हुई अब , वृक्ष बन आसमान को ललकार रही आसमान काँप रहा है और मैं ,, अश्वमेध  यज्ञ को त्यार हूँ || प्रिया मिश्रा :))  
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कितना अच्छा लगता है ना ,, सुनना ..........हैप्पी विमेंस डे ......हैप्पी मदर डे .........हैप्पी फादर डे ........हैप्पी दौटर डे ..............एक दिन चुनना किसी जाती बिरादरी की प्रशंसा के लिए या फिर किसी रिश्ते को अपना कहने के लिए .......क्या सही है || हमने अपने आप को इतना सिमित कर लिया है की ..............हमारे पास अब प्यार जताने को कुछ रहा नहीं ...........रूल -रेगुलेशन और बहोत सारी ऐसी चीजे जो ...........नहीं होनी चाहिए ,, और जो की है || मैंने कभी अपने पिता को नहीं देखा ...............मेरी माँ से ये कहते हुए .............तुम न होती तो मैं न होता | कभी ये कहते हुए ..............की तुम इस गृह की लक्ष्मी हो ........या फिर तुम आज बहोत सुंदर लग रही हो || मैंने कभी अपनी दादी को भी मेरी माँ की तारीफ करते हुए नहीं देखा ............................. || भाईयों में कुछ सूधार है ..............लेकिन अब वक़्त बदल गया है ................अब ये कहना मुश्किल है की ............ भाईयों में सूधार उनकी मर्जी है या मज़बूरी  || वक़्त जरूर बदल गया है ...............सोच भी बदल गयी है ............लेकिन सोच बदल क...
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जब मैंने तुम्हे पहली बार देखा था ...........तब तुम्हारी डीपी से लगाव हुआ था ...........बहोत सुंदर थी कपल वाली ............ फिर तुम्हारी कवितायेँ पढ़ी .............और पढ़ाई भी अपने सारे दोस्तों को | तुम्हारी तारीफ़ कोइ करता तो लगता जैसे मेरी ही तारीफ़ हो रही हो....................एक लगाव सा था तुमसे ,, तब सच मानो प्यार -वार हमने कभी नहीं सोचा था || सोचती भी कैसे ............तुम्हारा तो फॉलो बैक ही मिलना मुश्किल था ............वैसे मैंने तुम्हे फॉलो बैक के लिए फॉलो किया भी नहीं था ............ मैं तो भूल गयी थी की ,, मैंने तुम्हे फॉलो किया है || सिर्फ तुम्हारी लिखी कवितायेँ पढ़ती रहती ................... अच्छा लगता था तुम्हे पढ़ना | तुम्हारे बारे में बारीकी से हर उस बात को जानना .............जिसे लोग सिर्फ महज शब्द समझ के वाह कर दिया करते होंगे | तुमपे काफी रिसर्च किया है ...........मैंने || काफी अच्छे लगे थे तुम मुझे ..............थोड़े अलग भी ............... और तुम्हारी कवितायेँ और भी अच्छी .....................|| जब हमने पहली बार बात की थी ......................तब तुम्हारी आवाज ............औ...
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 सुनो ,, जिंदगी कई नगमे गाएगी तुम शायद चुन भी ना पाओ लेकिन तुम धुन वही बनाना जो तुम्हे पसंद हो ||   प्रिया मिश्रा :))    24     
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 हम आपके नाम कभी कोइ खत नहीं लिखना चाहेंगे हम आपके पास बैठ आँखों में आँखे डाल के बात करेंगे आपको सतायेंगे जब आप शरारते करोगे ......... तो शर्मायेंगे हम आपके नाम कोइ खत  नहीं  लिखना चाहेंगे ||   प्रिया मिश्रा :))  24    
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उसने जब मुझे प्रोपोज़ किया था तब उसने मेरा हाथ अपने हाथ में लिया था और ............ मनोज वाजपेयी की तरह ..... बोल गया देखो ,, प्रिया अंग्रेजी में आई लव यु नहीं कहेंगे .. प्रेम करते है तुमसे ...... हसना होगा तुम्हारे साथ हसेंगे रोना होगा रोयेंगे लेकिन ... हर बात में "लोल" नहीं कहेंगे और ....... हमारे मन में एकदम से आ गया बकलोल कहिका || प्रिया मिश्रा :))  24  
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पता ही नहीं चला जाने,, कब तुम मेरी बातों के साथ -साथ मेरी प्राथना में शामिल हो गए || प्रिया मिश्रा :))   24     24    आपसी बिवाद में लाखों लाशें गिरी थी मुद्दा सिर्फ ,, वस्तुओं का था कन्धा देते वक़्त कह रहे थे राम नाम सत्य है  || प्रिया मिश्रा :))   24
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मेरी कलम की स्याही से गहरी ..................... तेरी आँखे काली है कैसे इनपे .......... कुछ लिखने की हिमाक़त करूँ मैं || प्रिया मिश्रा :))     कुछ रह गए है बचे हुए से .. पत्थर ........ जिन्हे सिर्फ बेवजह चोट देना आता है || प्रिया मिश्रा :))    
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 लिखने में जितना सरल है उतना सरल नहीं है किसी से प्रेम करना और ......भूल जाना || प्रिया मिश्रा :))   मेरी कलम की स्याही से गहरी ..................... तेरी आँखे काली है कैसे इनपे .......... कुछ लिखने की हिमाक़त करूँ मैं || प्रिया मिश्रा :))      
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 लाखो की संख्या में टूटे दिल ,, मिलेंगे जो बस ..... आँखे खोले देते है ये जातने को की .....मैं  जीवित हूँ हालांकि ............वो मर चुके होते है || प्रिया मिश्रा :))   24   
यूँ तो हर बात पे हाँ,, कह देते है.. हम लेकिन ,, तुम्हे भी समझना चाहिए हर बात में हाँ  ,, नहीं होती || प्रिया मिश्रा :)) 
किसी भी रिश्ते को जताने से पहले निभाने की सोचिये ||   प्रिया मिश्रा :))     24
संवाद ये तेरी ओढ़नी में लगा घुंगरू मुझे बहोत पसंद है .....................दूर से तेरे आने की खबर देता है कहो तो तुम्हारी कलाई में बांध दूँ ...............................मैं सिर्फ तुम्हारी हूँ ...............सारी उम्र तुम्हे एहसास करता रहेगा ..............ये मेरे ओढ़नी का घुंगरू || नहीं ,, रहने दो ...................... तुम्हारी ओढ़नी में सजने दो .................... जब ,, तुझे अपनी दुल्हन बनाऊंगा ..........तब नई ओढ़नी लाऊंगा ............लाल रंग की .........जिसमे सुनहरे ............घुंघरू जड़े होंगे .............................उसे बांध देना मेरी कलाई में | सच ,, आओगे ना कही ,, और जा ही नहीं सकता मैं ..............ये तेरे घुंगरू बहोत शोर करेंगे तेरे बिना तनहाई में || प्रिया मिश्रा :))संवाद ये तेरी ओढ़नी में लगा घुंगरू मुझे बहोत पसंद है .....................दूर से तेरे आने की खबर देता है कहो तो तुम्हारी कलाई में बांध दूँ ...............................मैं सिर्फ तुम्हारी हूँ ...............सारी उम्र तुम्हे एहसास करता रहेगा ..............ये मेरे ओढ़नी का घुंगरू || नहीं ,, रहने दो ..................
  ताउम्र जिसे हम ढूंढ़ते रहे वो मेरी किस्मत में पहले से तय था किस्मत को बस सही वक़्त चाहिए था || प्रिया मिश्रा :))    24
किस्मत से कोइ परिंदा उड़ता है मैंने देखा है पंखो को पिंजरे में शिसकते हुए || प्रिया मिश्रा :))     24
सुनो ,, ठहर जाओ तुम ही कोइ आएगा भी तो किसी और का स्थान रिक्त कर के आएगा ............. क्यों किसी रंग पे किसी का रंग चढ़ाना सुनो ,, तुम ही अपनी धानी ओढ़नी से अपनी दुल्हन बना लो || प्रिया मिश्रा :))     24
पेड़ की डाली से टूटी हुई पूरानी पत्ती नया घर ढूंढती है पेड़ की डाली पे नई पत्ती का आगमन हो गया है || प्रिया मिश्रा :))     24    सुनो जब प्रेम करने लगो किसी से हर पल ईश्वर से उसे मांगना उसपे कोइ विरह वाली कविता लिखने वाली कल्पना से भी दूर रहना || प्रिया मिश्रा :))
 वो आटे में गुंदकर प्रेम बनाती है रोटियाँ और डब्बे को लिफ़ाफ़ा बना के रोटियों को प्रेम -पत्र के रूप में मेरे पास भेज देती है प्रिया मिश्रा :))    24
आसमान बादलों के कागज पर बूंदो की स्याही से इंद्रधनुष के लिफ़ाफ़े में धरती को ख़त भेजता है और ,, धरती .... प्रेम के धानी रंग में रंग जाती है || प्रिया मिश्रा :))    24  
जमीन पर पहला बीज जिसने भी लगाया होगा उसने ..... प्रेम से उस पौधे को सींचा होगा वो पौधा जब बड़ा हुआ तब ................ उसने फूलो के रूप में अपने माली के नाम ,, अनगिनत .......... पत्र लिखे और आभार प्रकट किया || प्रिया मिश्रा :))     24
 उसके गुलाबी से ओढ़नी के ... कोने में .. कुछ बुँदे स्याही की लगी है ............. लिखते -लिखते पत्र ............ किसी अपने की याद में ........... आसूं पोछा होगा और लगा बैठी होगी स्याही ओढ़नी में तभी ओढ़नी के कोने में ........ अमावस का बीज   उग आया है  || प्रिया मिश्रा :))    24
उसके किताबों में आज भी सूखे पुष्पों से खुसबू आती है ये ,, शब्दों का पुष्पों में सिमट जाना भी .... कितना ,, अद्द्भुत और मासूम प्रेम रहा होगा || प्रिया मिश्रा :))     24
इतने सलीक़े से लिखती है वो पत्र प्रेम का शब्दों के स्थान पे वो एक पीला गुलाब लेती है और उसमे एक काला टिका लगा देती है   बस मैं जनता हूँ बसंत के पीले फूल पे एक काला टिका पतझड़ का लगाती है || प्रिया मिश्रा :))     24
 सुनो ,, अपनी मुस्कुराहटों का एक लिफ़ाफ़ा बनाओ और अपने काजल से लिख के .............. एक ख़त भेज दो बेरंग सी पड़ी है जिंदगी ........ सुनो ,, अपनी ओढ़नी का गुलाबी रंग भेज दो || प्रिया मिश्रा :))
 उसे जब भी मेरी याद आती है वो ........सूखे गुलाबो की पंखुड़ियों को लिफ़ाफ़े में डाल कर मुझे ..... भेजा करती है हमारे खतो में शब्द डेरा नहीं डालते गुलाब बिखर कर एक- दूसरे को सुगन्धित कर जाया करते है || प्रिया मिश्रा :))    24
बंद ख़त में क्या लिखा होगा जिसने लिखा होगा .......... उसने खुद को छिपा के शब्दों का आईना रखा होगा || प्रिया मिश्रा :))     24     उसने मुस्कुरा के बंद ख़त में अपना नाम पढ़ लिया लिफ़ाफ़े का रंग उसकी ओढ़नी के रंग जैसा था || प्रिया मिश्रा :))    24    अच्छा नहीं लगता मुझे कभी -कभी ये बदलता हुआ वक़्त भी ....... जाते -जाते वो प्रियतमा के मधुर स्पर्श वाला   पत्रों का दिन भी ले गया || प्रिया मिश्रा :))  24    वो अपनी ओढ़नी अपने हथेलियों से संभाले रखती थी मुझे लगता था उसके ........ प्रेम पत्र का वो ओढ़नी ही लिफ़ाफ़ा था || प्रिया मिश्रा :))     कमल से कोमल उँगलियों के पोरो से उसने इस ख़त को लिखा है ......... मैं चाहता हूँ इस ख़त को तितलियाँ पढ़े || प्रिया मिश्रा :))
संवाद  सुनो ,, ये नदियों में कंकड़ मारना ............फिर बनती चूड़ियों को देखना ............कितना शुकुन देता है,, है  ना नहीं मुझे नहीं लगता ...................... किसी को चोट पहुँचा के ............उसके ह्रदय की धुन को एक घेरे में बाँध देना ...............क्या शुकुन देगा .................नदी कुछ कहती नहीं है .....................इसलिए हम उससे खेलते रहते है ..............कहो तुम्हे कोइ बाँध दे .............तुम खुस रहोगी ...................? बाँध तो दिया है ..................बस घेरा ना बना पाया .............. अच्छा ,, कौन है वो वही जो नदियों की गहराई नापता  रहता है ..................किसी के ह्रदय से अनजान होकर || हहहहहहह ................. अच्छा मजाक था :))  प्रिया मिश्रा :))     24
सुनो जब चाँद बादलों में छुप जायेगा .....................तब तुम आना ,,मैं नहीं चाहती चाँद तुम्हारा रंग चुरा के बादामी हो जाये || प्रिया मिश्रा :))    उसका दर्द छलक जाता है आँखों में जब वो मुस्कुराता है || प्रिया मिश्रा :))
कफ़न भी नहीं जाता मणिकर्णिका घाट पर दौलत का ग़ुरूर लेके कहाँ जाओगे तुम भी फ़क़ीर हो अंतिम पड़ाव के हम भी फ़क़ीर है अंतिम पड़ाव के आओ मिल के अपनी फ़कीरी बाँट ले क्या पता कल मिले तो कल ग़ुरूर याद आ जाये कल का और हम ,, मिला ना पाए नजरे खुद से ........... प्रिया मिश्रा :))
ना साधु की संगत अच्छी ना चोर की संगत अच्छी जैसा खुद का व्यवहार हो वैसी संगत अच्छी  || प्रिया मिश्रा :))     रिश्तो का  वास्ता देके कर्तब्यो के नाम पर लोगो को ठगा जा रहा है ये अन्याय,, सदियों से चला आ रहा है इसे अगर रोकना है तो ,, खुद को बदलो आजाद रहो आजाद रहने दो || प्रिया मिश्रा :))
तुम भी अकेले हम भी अकेले शाम भी तन्हा -तन्हा सी है आओ महफ़िल सजाते है शाम को ही ............ सितारों की रंगीन रात बनाते है || प्रिया मिश्रा :))       इतना ख़ाली -ख़ाली सा कैसे जिया जाये ..... क्यों ना किसी एक और खाली को भरा जाए ............ किसी अकेले को साथ लेके चला जाये || प्रिया मिश्रा :))
लोग कुरेदते रह गए उसके ज़ख्मो को वो भरता रह गया अँधा कुआँ || प्रिया मिश्रा :))         तुझे मुझसे कोइ शिकायत है तो ........................... आखें मिला के मेरी कमियां बता यूँ मेरे नाम का ढोल हर शहर में पिटेगा एक दिन तेरे अपने बहरे हो जायेंगे || प्रिया मिश्रा :))तुझे मुझसे कोइ शिकायत है तो ........................... आखें मिला के मेरी कमियां बता यूँ मेरे नाम का ढोल हर शहर में पिटेगा एक दिन तेरे अपने बहरे हो जायेंगे || प्रिया मिश्रा :))   24
सुनी -सुनाई बातो पे कभी यकीन ना किया करो किसके दिल में क्या छुपा है अपने दिल की खिड़की खोल कभी उसके जज्बातों को महसूस भी किया करो क्या पता ,, एक अफवाह किसी की जान ले जाये क्या पता ,, तुम्हारा जमीर जागे बाद में और ,, हाथ मलता रह जाये || प्रिया मिश्रा :)) 
पूछने वाले पूछते रह गए क्या बताता वो ,, किसी का सबकुछ लूट गया था तोजीरियाँ भरी पड़ी थी दिल ख़ाली हो गया था || प्रिया मिश्रा :))
 कुछ लोग आज भी ,, उन अपनों का पता सिरहाने लेके सोते है जिनका चेहरा तक भुला चुके है ,, वो लोग ..........जो कभी अपने हुआ करते थे || प्रिया मिश्रा :))       वक़्त को घडी की सुईयां ,, समझ के ना गुजारो....... वो जीवन गुजर रहा है,, तुम्हारा || प्रिया मिश्रा :))  
 लोग कहते है कोइ सच्चा नहीं मिलता मुखवटो के बिना भईया ,, अब तो कोइ बच्चा भी नहीं मिलता हम कहते है जनाब ,, आप ही परदे से बाहर आ जाईये ,, वो कहते है पहले हमें अपना मुखड़ा तो दिखाइए और बात पहले आप पहले आप पे रुकी है  || प्रिया मिश्रा :))
आँखों में काजल तो जरा भर लूँ शाम हो गयी .................... उनके कदमो की आहट आने लगी है भर के मेरा चेहरा ,, वो अपनी हाथो में अपनी सूरत ................मेरी आँखों में देखेंगे ......................................|| प्रिया मिश्रा :)) 
 संवाद        मीरा  -:  भईया ,, वो आप पे कैसे बिश्वाश कर ले  की  आप सही लड़के हो .......... और आपके लिए अपना पूरा घर छोड़ दे ............उसे जरा टाइम तो दीजिये ,, अपने घर वालो को समझाने का || मीरा का भाई :-   पुरे दो साल हो गए है हमारे रिश्ते को ,, सगाई हो गयी है | शादी की डेट फिक्स नहीं कर रहे .............मैं कह रहा हूँ की ,, रहने दो ये सब आवो कोर्ट मैराज कर लेते है .......लेकिन उसको अपने घर वालो की सुननी है |  मीरा :-       जानती हूँ भाई आपके साथ गलत हुआ है .........बहोत गलत उनको ऐसा नहीं करना चाहिए .....            वो बहोत गलत लोग है ...........मैं आपके साथ हूँ ...........क्योकि आप सही है             लेकिन मैं ये भी सोच रही हूँ ............वो लड़की कैसे आप पर बिश्वाश कर लेगी || मीरा का भाई :-   सब ऐसे ही होते है .......उसको दो साल में मुझपे बिश्वाश नहीं हुआ ............. घर ...
सुन वो ,, गुलाबी आँखों वाली लड़की इतना नशा है,, तेरी आँखों में   तुम पानी को देखो नजर भर के तो ,, वो शराब हो जाये .......... प्रिया मिश्रा :))    24
 वो कहता है मुझसे ........... तुम शराब छू लो शराब भी नशे में आ जाये मैं कहती हूँ तुम ....छू लो मुझे मैं गंगा होना चाहती हूँ || प्रिया मिश्रा :))
सादगी से किसी की तारीफ करनी हो बस उसे गले से लगा लेना ......... किसी से उसका दर्द बांटना हो बस उसे गले से लगा लेना .... प्रेम बयाँ करता है और दर्द बाँट लेता है किसी को गले से लगा लेना || प्रिया मिश्रा :)) 
तुम्हारा आना मेरे जीवन में मरुस्थल में इंद्रधनुष जैसा रहा || प्रिया मिश्रा :))     प्रेम भरे गीतों में मेरे सबसे प्रिय गीत हो तुम प्रिया मिश्रा :))    
वो ,,रोज लिखता है ख़त और,, रोज फाड़ देता है   उसे याद है अपनी मंजिल का पता बस उसे याद नहीं ख़ुद का पता और पोस्टमॉस्टर ...... लिफ़ाफ़े में दोनों पता मांगता है || प्रिया मिश्रा :)) 
सुनो ,, मैं तुमसे ,, पहले तुम्हारी माँ का शुक्रिया करुँगी जिन्होंने ,, तुम्हे इतना प्यारा बनाया || प्रिया मिश्रा :))     24
 मैं जब भी हावी होने लगूँ तुमपे .......... तुम जड़ देना एक थपड और जता देना की .... मैं अपनी कृतयग्यता भूल रही हूँ प्रेम के प्रति || प्रिया मिश्रा :))    24
 मैं आभार प्रकट करती हूँ ........ उस हर क्षण का जिसने मुझे सोचना और बदलना सिखाया ....... और उस क्षण में मिले ........... मेरे कुछ सबक और कुछ सवाल का जिनसे सीखा मैंने   और ............ जिनके उतर की खोज में ........ मैं जीवन के सार को समझने में ......... तत्पर हो पाई प्रिया मिश्रा :))    24
 मैं सोचती  हूँ एक पत्थर उठाऊं और .....तोड़ दूँ उस सीसे की दिवार को जो बिच खड़ी है मेरे और मेरी खुशियों के डर बस इतना है .................... किसी  मासूम के पैरों में ना चुभ जाये  || प्रिया मिश्रा :))    24
जिन्दा रहने के लिए पालतू होना जरुरी नहीं जिन्दा रहने के लिए जीवन की खोज जरुरी है जब खोज लो जीवन को यकीन मानो .......... ना तुम पालतू रहोगे ना कोइ तुम्हारा पालतू होगा हर क्षण शांति होगा हर जगह शुकुन होगा   प्रिया मिश्रा :))     24
                      हम चले थे एक कारवाँ लेके मंजिल ..................... हमने तय की ......... काफिला छूटता गया  || प्रिया मिश्रा :))   24 
मैं उस शहर के तमाम गलियों को  जानती हूँ जहाँ से मैं गुजरी हूँ रह गया जिन्हे जानना वो शहर के बासिंदों थे वो तब भी अजनबी थे जब ये शहर अजनबी था शहर ने दोस्ती कर ली लोग आज भी अजनबी है || प्रिया मिश्रा :))   24
 प्रभु ,, मुझे मेरा बचपन लौटा दो लौटा दो .......... वो मेरी मुस्कान ... जो सिर्फ मिट्टी की खिलौने से आ जाती थी || प्रभु,, मुझे मेरी शांति लौटा दो जो बस मेरी ....... आँखे बंद कर देने से आ जाती थी || प्रभु ,, मुझे मेरे वो पुराने दोस्त लौटा दो जो मुझसे सिर्फ ............मेरी तरह प्रेम करते थे उन्हें मेरे उच्च -नीच से कोइ फर्क ना पड़ता था || प्रभु ,, मुझे वो .............मेरा वाला प्रेम लौटा दो .................. जो मैं खुद से कर के खुस रहा करती थी || प्रिया मिश्रा:)   24 
झूठ के पाँव नहीं होतें फिर भी वो दौड़ता है सच के पाँव होते है फिर भी उसे लंगड़ा कर के रखा जाता है || प्रिया मिश्रा :))    24  
 लोग जीते जी मार जायँगे लेकिन आपको जीने नहीं देंगे निर्जीव शरीर पे जीवित पुष्प चढ़ाएंगे लेकिन पुष्पों को खिलने नहीं देंगे प्रिया मिश्रा :))