"उस रात को अगर माँ ने मुझे रोका ना होता "(लघु - कथा ) मैं अकेली सुनी सड़क पे चली जा रही थी | आज प्राथना कर रही थी कोइ गाड़ी मुझसे होकर गुजर जाये | मरना चाहती थी | सुनी सड़क पे रोती हुई गुजर रही थी | कॉल पे कॉल आ रहे थे | लेने का जी ना हो रहा था | सुसाइड करना तय था | इरादा पक्का कर लिया था | किसी के प्यार में पागल थी | और वो पागलपन सर पे सवार था | तभी माँ का कॉल आया | सोचा माँ से आखरी बार बात कर लूँ | माँ का कॉल लिए | माँ मेरी बचपन की तस्वीर देख रही थी | वो मेरी शरारते , मेरी सैतानिया , मेरा भोलपन सब बातें कर के इतनी खुस थी , जैसे उसे कोइ खजाना मिल गया हैं | मुझे प्यार करती हुई बोली बेटा जल्दी घर आ जा , अब अकेले नहीं रहा जाता | तेरे पापा भी तुझे याद करते हैं | कुछ दिनों बाद ससुराल चली जाएगी फिर पराई हो जाएगी | जल्दी आ जा बेटा | ये कहते हुए माँ कि सिसकिया सुरु हो गयी | मैंने बहोत प्रयाशो के बाद जल्दी आने वादा दे के उसको चुप कराया | माँ की एक कॉल ने मुझे जीने का नया मकशद दिया | जियो हमेसा उनके लिए जो आपके लिए जीते हैं | उनके लिए नहीं जिनको...
Posts
Showing posts from February, 2020
- Get link
- X
- Other Apps
"देश का हिन्दू सोया है " हिमालय तक गुंजी आवाज फिर भी न कोइ रोया हैं बच्चा - बच्चा जान रहा देश का हिन्दू सोया है || कही बिक रही ईमान कही बिक रहा भगवान् कोइ कीमत लगाए शब्दों की कोइ चादर तान के सोया है बच्चा - बच्चा जान रहा देश का हिन्दू सोया हैं || आज लगी जंग तलवारो में अब कहा हैं खून भुजाओ में कट जाने कहाँ कोइ मस्तक अब त्यार हैं कफ़न अब बिकता हैं बाजारों में सर पे बांधने वाले चले गए तब का भारत अब कहाँ खोया हैं बच्चा - बच्चा जान रहा देश का हिन्दू सोया हैं || माता अब बट गयी हैं आँचल अब मैला हैं लोग अब आना - कानी करते ना मेरा हैं ना तेरा हैं हमारा हैं ये देश समझ लो हुई हैं कोइ नाइंसाफी जब भी कोइ रोया हैं बच्चा - बच्चा जान रहा देश का नागरिक सोया है || प्रिया मिश्रा :)
- Get link
- X
- Other Apps
"विरह " कुछ खली बर्तन धूल में लिपटी कमरों की खालीपन सन्नटा अंधकार रौशनी का अधूरापन बिरह एक खालीपन || ख़ाली आँखों में इन्तजार मुस्कराहट का फीकापन चेहरे का पीलापन शाम की उदाशी रात का बंजारापन बिरह एक खालीपन || रोज दरवाजे तक नजरो का सफर किसी के सन्देश का इन्तजार किसी के लिए मौत तक का सफर जिंदगी से बेगानापन बिरह एक खालीपन || बरसातों में जमी धूल फ़क सा पड़ा मकान गिरते पत्ते सा जीवन और सावन से बैर आँखों का सादापन श्रृंगार से नाराजगी अरमानो का मरता जीवन बिरह एक खालीपन || प्रिया मिश्रा :)
- Get link
- X
- Other Apps
"हर दिल जो प्यार करेगा " खुसिया लुटा देगा आसूँ बहा देगा अरमानो की गलियों में ख्वाब सज़ा देगा हर दिल जो प्यार करेगा || कोरे कागज पे शब्दों को बिखेर के सपनो को तेरे खुद के पलकों में संजो के अपनी नींदे करवटो में गुजार देगा हर दिल जो प्यार करेगा || तुझसे मिलके तुझमे खोके तेरा होके तेरी यादों में सिमट के तुझे बिना किसी शर्तो के प्यार देगा हर दिल जो प्यार करेगा || उसकी यादों में तुम उसकी बातो में तुम उसकी खुसियो में तुम उसके आसूँ में तुम उसके इरादों में तुम उसके मंजिल में तुम उसकी रास्तो में तुम उसके हमसफ़र तुम उसके हमकदम तुम उसकी मैं में तुम उसकी तुम में तुम उसकी शाम में तुम उसकी सुबह में तुम उसकी आँखों में तुम उसकी ख्वाबो में तुम वो खुद तुममे खो देगा हर दिल जो प्यार करेगा || प्रिया मिश्रा :)
- Get link
- X
- Other Apps
"एक छोटी सी ग़लत फ़हमी " रीमा कैसे हो ?? अच्छी हूँ दी || राहुल की कोइ खबर आई ? नहीं दी , अभी तक कुछ नहीं आया | अच्छा , तुमने कुछ खाया ? नहीं , अभी तो नहीं खा लुंगी एक बार राहुल आ जाये तो | ठीक हैं || तभी घंटी बजती हैं | दरवाजे पे कोइ हैं देखो तो रीमा ? हां दी , सायद राहुल आ गया | दरवाजा खुला | टेलीग्राम , आपका नाम रीमा हैं ? हां , यहाँ साइन कर दीजिये | बढ़िया || किसकी हैं रीमा ? राहुल की | राहुल की ? पढ़ तो जरा क्या लिखा हैं ? हाँ , रीमा , मुझे पता हैं तुम आज मेरा इन्तजार कर रही होगी | लेकिन मैं नहीं आ रहा हूँ | हमारे बिच अब कुछ भी नहीं रह गया | तुमने मुझसे झूट बोला | तुम्हारा पहले किसी और से रिस्ता था | तुम्हारी दोस्त ने बताया | मैं अब तुम्हारी शक्ल भी नहीं देखना चाहता | मुझे तुमसे नफरत हैं | और हमेसा ही रहेगा | अब कभी मेरा इन्तजार मत करना || रीमा ,रीमा क्या हुआ रीमा। .. रीमा , दी , राहुल मुझे छोड़ के चला गया | उसने मुझसे बात तक करना जरुरी नहीं समझा | आपको पता हैं ना , मैं और अभी सिर्फ दोस्त हैं | कनिका ने उसे मेरे बारे में गलत इनफार्मेशन देद...
- Get link
- X
- Other Apps
"नन्हे से रास्ते क्या बोलते है" नन्हे से रास्ते क्या बोलते है सुन के देखो वो तुमसे बातें करते है चलते हैं तेरे कदमो से वो तेरी मंजिल भी नापा करते है तू थक जाता हैं पथिक वो निरंतर कितनो की कदमो से चला करते हैं ये नन्हे से रास्ते सोते नहीं , रोते नहीं किसी की लाठी किसी की आस हुआ करते हैं || नन्हे से रास्ते क्या बोलते हैं सुन के देखो वो तुमसे बाते करते है || महसूस करते हैं तुमको तुम्हारी माँ की तरह बाप बन के राह दिखते हैं ये नंन्हे से रस्ते बेजुबान होक भी बोलना सिखाते हैं मुस्कुराना सिखाते हैं जीना सिखाते है || प्रिया मिश्रा :)
- Get link
- X
- Other Apps
"चाँद तारे तोड़ लाऊँ " मैंने उस से भरोसे की बात कही थी वो बात - बात में कहता चाँद - तारे तोड़ लाऊँ कैसे समझाती कहा फलक में चाँद प्यार में डूबा रहता है लाखो होंगे दीवाने उसके पर वो तो तनहा होता है कहाँ तारो की टोली बारात जैसी लगती है ख़ाली आसमान में कहाँ चांदनी की पिया की डोली सजती हैं तू रहने दे ना ला चाँद , ना ला तारे एक भरोसा का गुलदस्ता ला मैं वारे जाऊँ तेरे और वो कहता फिर से , ला दू तुझे वो चाँद वो तारे || मैं खामोश सी उसकी आँखों में वो चाँद ढूंढा करती थी जो वो रोज लाया करता था और वो कहता , बोल ना , आसमा की चुन्नी बना के भर दूँ तेरे मांग में वो चाँद वो तारे और मैं बहकी उसकी बातों में वादे और भरोसे की बात ही भूल जाती और उसके सुर में ताल मिलती कहती ना रहने दे , आसमान की चुन्नी , तू तोड़ ला वो चाँद वो तारे फिर खाली आसमान के तले अँधेरी रातो में दो दीवानो की पागलपन वाली हसीं गूंजा करती थी जो आज सयाने पन में ग़ुम गयी है || प्रिया मिश्रा :)
- Get link
- X
- Other Apps
"अगर बेवफाओ की अलग दुनिया होती " बड़ा गंभीर सा शीर्षक हैं , सोचो क्या होता अगर बेवफाओ की अलग दुनिया होती | आधी आबादी तो वही रहा करती | पृथ्बी बट जाती दो भागो में और वहाँ भी एक बॉर्डर होता बेवफा इधर नहीं वफादार उधर नहीं फिर जंग छिड़ता जो वफादार थे वो लालच में बेवफा हो जाते जो बेवफा थे उनमे वफ़ा आ जाती संख्या इधर की उधर की उन्नीस बिस चलते रहती || आधार कार्ड होता वफ़ा की दुनिया का अलग बेवफाओ की दुनिया का अलग नंबर में कभी जीरो आगे आता कभी +११ , सब कुछ अलग होता लेकिन प्यार फिर भी रहता बॉर्डर के इस पार भी बॉर्डर के उस पार भी तभी तो समझ आती वफ़ा क्या होती हैं बेवफाई क्या होती हैं || प्रिया मिश्रा :)
- Get link
- X
- Other Apps
"लिखा नहीं जा सकता " अपनी भावनावो को लिखा नहीं जा सकता समझाया नहीं जा सकता हैं किसी को पढ़ा नहीं जा सकता है बस एक भरोसा है एक वादा है उसे निभाया जा सकता|| किसी को छल के कुछ पाया नहीं जा सकता है किसी की तकलीफों पे मुस्कुरा के इंसानियत दिखाया नहीं जा सकता किसी के कंधे को थपथपा के प्यार जताया जा सकता हैं किसी के हाथो को अपने हाथो में ले यकीं दिलाया जा सकता हैं एक भरोसा निभाया जा सकता है अपनी भावनावो को लिखा नहीं जा सकता हैं दुसरो की भावनाओ की कदर करते हुए एक वादा निभाया जा सकता है || ना देना उसे कोइ तकलीफ जो खुद को तुमपे सौप दे वो आत्मा से जुड़ा होगा उस, रूह को समेटा नहीं जा सकता है एक वादा है , जो उसके साथ निभाया जा सकता है प्रेम ना भी हो इंसानियत ही सही निभाया जा सकता है वादा शब्दों में लिखा नहीं जा सकता लेकिन जीवन भर निभाया जा सकता है || प्रिया मिश्रा :)
- Get link
- X
- Other Apps
"उसी के दम पे जिन्दा थी मुहब्बत " मैंने लाख जतन किये वो समझ ना पाया उसे प्यारी थी उसकी दुनिया वो कदर ही ना कर पाया की ख्वाइशे टूट गयी और मर गई वो मुहब्बत जो, उसी के दम पे जिन्दा थी मुहब्बत || वो दुनिया के भीड़ में खो गया मैं उसकी आँखों में सिमट गयी कैद को रिहाई न मिली मैं जिन्दा ही डूब के रह गयी वो दुनियादारी देखता रह गया मैं पूरी दुनिया उसमे देखते रह गयी वो भूल गया की , उसी के दम पे जिन्दा थी मुहब्बत || वो पहले आशकी किया करता था वो हर पल मुझे अपने दुनिया में तौला करता था मैं तो खुद की ना रही वो झूट बोला करता था गिर गयी वो सारी ख्वाबो की दीवारे जो कभी फूलो से सजा करती थी हम एक होते - होते दूर हो गए और वो भूलता चला गया की , उसी के दम पे थी मुहब्बत || प्रिया मिश्रा :)
- Get link
- X
- Other Apps
इश्क सफर हैं काटो का जज्बातो में उलझ के रह जाओगे न जीतोगे न हारोगे खो दोगे खुद को इश्क कहाँ हैं बंजारों का इश्क सफर है काँटों का || बड़े इम्तहान लिए जायँगे कुछ तुझे बदनाम किये जायँगे ये कहाँ शरीफो में फला ये राह हैं तनहा रातो का इश्क सफर है काटो का || नींद से वास्ता जो खोना होगा खुद का खुद ही रोना होगा ना समझ पाया हैं कोइ जज्बात इश्क के बीमारों का इश्क सफर है काटो का || प्रिया मिश्रा :)
- Get link
- X
- Other Apps
रात का राही अँधेरे में जाने कौन सा रास्ता तलाशता है , वो भटका है , सुनी सड़क पे अपनी पहचान तलाशता है . अभी तो इतनी भीर थी .. सब कहा चले गए .. वो राह भुला राही भीड़ में .. अपनों का चेहरा तलाशता है ... पर कोइ नहीं है , बस एक सनाटा है , कुछ धीमी सरसराती हवाएं है , पसरी हुई सी ये बेजान सी सड़क है .. और वो राही ... अँधेरे में उसकी परछाई भी नहीं है ... वो अकेला है ... हाँ अकेला सा है बिल्कुल अडोल सा.. कल जब सूरज खिलेगा फिर भीड़ होगी .. अंधेरो में कोइ नहीं होता ... प्रिया मिश्रा
- Get link
- X
- Other Apps
क़िताब खुली बेपरवाह किताबों के पन्ने पलटते हैं शब्द खामोश होते है || बंद किताबो के पन्ने कैद होते है और शब्द खोये हुए से खुली शांत किताबों के पन्नो में ठहराव होता है शब्द मुस्कुराते है सब कुछ दिखता है समझ आता है वैसे ही जैसे तेरी आँखों का सूनापन और सवाल समझ आते है पढ़ने को जी चाहता है जैसे कोइ डिग्री लेनी हो प्रिया मिश्रा :)
- Get link
- X
- Other Apps
जाते हुए लम्हे ये जाते हुए लम्हे गुजर जायँगे लेकिन हम तुझे कही न मिलेंगे एक बार जो खो जायेंगे || तू ढूंढ लेना मुझे अपनी उन बातो में अपनी काली रातो में जाते हुए लम्हो के साथ, हम भी गुजर जायेंगे || तुम जाओ ढूंढ लो कोइ और कोइ बेहतर कोइ खास पर हमें न ढूंढ पावोगे अच्छा हो गा वो बहोत अच्छा होगा लेकिन हमसा ना होगा हम एक ओश की बून्द की तरह सुख जायेंगे एक दिन हम गुजर जायेंगे और तेरे लम्हे ठहर जायेंगे || प्रिया मिश्रा :)
- Get link
- X
- Other Apps
देश गीत हरियाली सी ये धरती झरनो से गिरता पानी उगते सूरज की लालिमा किसी नारी का सम्मान किसी देश की भासा का सम्मान किसी व्यक्ति के हिरदय में बस्ता वो प्रेम वो प्रेम अपने देश के लिए प्रेम अपने अपनों के लिए प्रेम अपने मित्रो के लिए प्रेम एक प्रेमी का प्रेमिका के लिए प्रेम एक किसान का उसके खेत के लिए प्रेम फलो की डालियो का झुक के राहगीरों की सेवा करना ये सब होता हैं एक गीत देश गीत || प्रिया मिश्रा :)
- Get link
- X
- Other Apps
मुझे बुरा लगता हैं जब। .... मुझे बुरा लगता हैं जब ख्वाब आसमान पे हो और जमीं में आँख खुल जाये || मुझे बुरा लगता हैं जब कोइ इश्क जता के मुँह मोड़ ले || मुझे बुरा लगता हैं जब कोइ बिश्वाश दिखा के धोका दे दे || मुझे बुरा लगता हैं जब कोइ तारीफ कर के गैरो से मेरी कमिया बताये || मुझे बुरा लगता हैं जब कोइ ओरो का दिल तोड़ जाये || मुझे बुरा लगता हैं जब मैं किसी के आशू का कारन बनु || मुझे बुरा लगता हैं जब जब मैं खुद को धोका देती हूँ || प्रिया मिश्रा :)
- Get link
- X
- Other Apps
कई इंद्रधनुष बहके हुए से नाच रहे हैं तुम्हारे चेहरे पर सुबह की धूप की एक किरण खिड़की को बुद्धू बना आ गयी है बिस्तर तक ताक रहा हैं कौआ काला गौरैया भी झांक रही आलस की चादर हटा मुख पे जरा धुप तो आने दे देख न कैसे आ गयी हैं सूर्य की किरणे तेरे बिस्तर तक घड़ी का घंटा बोल रहा समय न आना हैं लौटकर फिर क्यों न तू आखे खोल रहा कल रात कुछ सपने आये तो होंगे उन्हें खुली आखों में जगा चल उठ लल्ला अब जाग भी जा देख न चंदा रूठ के भागा कल रात तो तेरे कमरे में आके पाँव फैलाये बैठा था अब तो खुली हुई धुप हैं , हवा भी अब दे रही ताना सुरु हो गया हैं अब चिडियो का आना - जाना अब तो रख दे नींद को ताख पे चल सपने अब तू भाग भी जा चल लल्ला अब तू जाग भी जा ||
- Get link
- X
- Other Apps
कई इंद्रधनुष बहके हुए से नाच रहे हैं तुम्हारे चेहरे पर सुबह की धूप की एक किरण खिड़की को बुद्धू बना आ गयी है बिस्तर तक मैं वही बैठी निहार रही थी तुम्हे तुम्हारी आँखो में जो चमक कल रात था वो चमक अब सूरज ले जाग चूका हैं और तेरे ही प्रकाश से तुझे जगा रहा हैं और तेरे बातो में जो धुन थी वो चिड़ियों ने चुराया हैं हवाएं भी तुझसे जरा मीठापन ले गयी हैं और झल रही हैं पंखा तुझसे तेरा उधार का मीठापन लेके तेरे कपोलो से गुजरती हुई धुप जाने कितने रंगो में बट जाती हैं फिर इंद्रधनुष का रंग बना मेरी चुंदरी से लग जाती हैं प्रिया मिश्रा :)
- Get link
- X
- Other Apps
लिफाफा छोटा सा शब्द हैं || पर हम सबको परेशां करने में बड़ा काम करता हैं || लिफाफे में बंद चिठ्ठी शब्द को चुराए रहती हैं || कभी खुसी कभी गम लगाए रहती हैं || ये शादियों का लिफाफा बड़े काम का हैं || कुछ हो न हो सुन्दर लिफाफे की तरफ नजर पहले जाती हैं ,फिर उसे खोलते हैं | कुछ शगुन होता हैं | उसे निकलते हैं और मुस्कुराते हैं | फर्क नहीं पड़ता वो कितने का हैं |अपनों का आशिस लेके आता हैं ये बंद लिफाफा | कुछ सपने बंद होते हैं इसमें | कुछ ख़ामोशी बंद होती हैं | कई हसरतो का पिटारा होता है ं ये लिफाफा | कितनो के बेटे की निशानी उनकी बातें और उनका प्यार होता हैं ये लिफाफा | बेटियों की मुस्कराहट होता हैं ये लिफाफा | बहुतो का रोजी - रोटी होता हैं ये लिफाफा || मायके में बेटियों का बाबुल बन पहुँचता हैं ये लिफाफा || बड़ी दूर से पी की खबर भी तो लाता हैं ये लिफाफा || तेवहारो में एक दूसरे को एक दूसरे का एहसास भी कराता हैं ये लिफाफा || बंद लिफाफे में बहोत बात होती हैं || कभी छोटी कभी बड़ी पर रिस्तो की एक मजबूत गाँठ होती हैं || प्रिया मिश्रा :)
- Get link
- X
- Other Apps
गुनगुनी ख़ुशबू के जाले बुने हैं वादी ने तुम आने वाले हो, हम जान गए अब दबी सी चाह तेरा राह देखने लगी हैं वो सुनने लगी हैं तेरे कदमो की आहट अब हवाएं मेरे आँगन की तुझे महसूस करने लगी हैं तुम आने वाले हो हम जान गए हैं || हवाएं भी छेड़ने लगी हैं मुझे की जरा सी शरारत वो दरवाजे भी करने लगे हैं जो खरखड़ाते हैं और मेरी पायल भी अब शोर करने लगी हैं घुँगुरुओ में जान आ गयी हो जैसे आँखे भी अब नम रहने लगी हैं सूखे आकाश में अब बादल नजर आने लगे हैं तुम आने वाले हो हम जान गए हैं || हम जान गए हैं की जिंदगी एक वजह ढूंढ रही हैं अब जीने की तुम आने वाले हो हम जान गए हैं || प्रिया मिश्रा :)
- Get link
- X
- Other Apps
|| तुमसे मोहब्बत है || एक बात कहूँ यारा तुमसे मोहब्बत है वो फिल्मो वाला नहीं असली वाला जिसमे सच का दिल धड़कता है जिसमे खोने का डर होता है मिलने की खुसी होती है और बातो में दिन गुजर जाता है || एक बात कहु यारा तुमसे मोहब्बत है वो दिखावे वाला नहीं असली वाला जिसमे दिखे न तुमको वो प्यार कभी हो जाये हम्मे तकरार लेकिन धड़केगा ये दिल सिर्फ तुम्हारे लिए सिर्फ और सिर्फ तुम्हारे लिए || एक बात कहुँ यारा तुमसे मुहब्बत है ऐसा वैसा नहीं वो आशकी वाला तुमसे बाते कर के न दिन बन जाता है रात ठहर जाती है सपने फिर से करवट लेने लगते है और नींद उड़ने लगती है हकीकत से कोशो दूर तुम्हारे ख्यालो में मेरी दुनिया ठहर जाती है एक कमरे में , मैं अकेली और तुम्हारी यादें हैं ना अलग सी तुम्हारी - मेरी कहानी , और तुम्हारी मेरी आशिक़ी || एक बात कहुँ यारा तुमसे मोहब्बत है एक वादे वाला तुमसे कोइ वादा मांगने को जी चाहता है तुम्हारे हाथों में हाथ डाल सारी उम्र गुजारने को जी चाहता है तुम्हारी आँखों में झाँक के देखना चाहती हूँ उस शिद्दत को , जो बस्ता हैं तुझमे , मुझमे हममे || इ...
- Get link
- X
- Other Apps
चलो आज कुछ मीठा हो जाये मिटा दे सारी कड़वाहट चलो आज कुछ मीठा हो जाये || चलो कुछ वादे करे कुछ मीठे सपने सजाये चलो न कैडबरी के आसमानो का सहर बनाये || किटकैट की दिवार हो उसे अपनी वफ़ा से सजाये कैंडी की चादर हो और थोड़े से मीठे हम और थोड़े से मीठे तुम चलो आज सब कुछ मीठा बनाये चलो आज कुछ मीठा हो जाये || थोड़ी सी चीनी भी लाते हैं और उस से तकिया बनाते हैं || चलो आज कुछ मीठा बनाते हैं उसमे सक्कर की जगह तुम्हारी बातें मिलाते हैं चलो तुम्हारे साथ आज कुछ मीठा हो जाये || हम भुला दे सारी खट्टी यादें मिला दे उसमे तेरी वादों की मिठास कल और आज कल सब मीठा बना दे चलो न वादों का कोइ मिठाई बनाये चलो न आज कुछ मीठा हो जाये || प्रिया मिश्रा
- Get link
- X
- Other Apps
वो मुझसे नफरत करते - करते मैं बनते जा रहा हैं ....... ये नफरत भी अपना निशान ही मिटा देता हैं || देखता वो मुझे आज भी हैं .... कल प्यार से देखता था आज नफरत से देखता हैं ....... बस नजरे बदली हैं ......... फितरत आज भी वही हैं ...... छुप - छुप के देखने की ......... पहले वो बीज दबा था अब एक पौधा पनप के आ रहा हैं ||
- Get link
- X
- Other Apps
मैंने कुछ इस तरह इश्क छुपा के रखा हैं ...... वो तेरी साथ की डायरी के पन्ने अब रंगीन हो गए ............ कुछ सुनहरा रंग हुआ हैं उनका ......... और तेरे तारीफ़ के शब्द और भी गाढ़े रंग के दीखते हैं ........... और मैं .. अपनी क्या सुनाऊँ ....... बस इतना समझ लो अपने हाथो की मेहँदी को बालो में लगा के रखा हैं | मैंने कुछ तरह तेरा इश्क छुपा के रखा हैं ||
- Get link
- X
- Other Apps
"पिछली सर्दी " पिछली सर्दी में एक मोड़ से गुजरे थे हम दोनों रास्ते अलग हो गए शरीर रास्तो में मुड़ गया आत्मा हमदोनो की वही रह गयी जहाँ कुहरा घाना था छिप के बैठे बातें की एक दूसरे से मिलने का वादा किया और गुम गए वही वादियों में शरीर अब भी कही और है आत्मा आज भी इस कुहासे वाली सड़क पे मिला करती हैं बेखौफ, बिना डरे इस सुनसान डगर में इस प्यार के नगर में || प्रिया मिश्रा :)
- Get link
- X
- Other Apps
"मन की पीड़ा " मेरे मन की पीड़ा मैं ही जानू तू जाने तेरा प्रीत रे || कैसे भवर में लाके छोड़ा मैं हारी मनमीत रे || वादा कैसे निभा पाऊँगी मैं ना जानू तेरी रीत रे || कैसे भवर में लाके छोड़ा मैं हारी मनमीत रे || कृष्ण को समर्पित राधा का बिरह मैं ना जानू ऐसी कोइ रीत रे || कैसे भवर में लाके छोड़ा मैं हारी मनमीत रे || प्रिया मिश्रा :)
- Get link
- X
- Other Apps
आज के समाज में एक घर टूटता हैं हजार लोग लुटते हैं || आनंद का वक़्त होता हैं उनके लिए | वो उस वक़्त का उपभोग करने से पीछे नहीं हटते | कोइ परिवार के एक सदस्य को भड़काता हैं कोइ दूसरे सदस्य के आखे पोछता हैं पर फिर भी पीठ पीछे हस्ते सब हैं | पर मैं एक बात बता दूँ द्रोपती ने पहले ही इन हसने वालो को शार्प दिया हैं अब मुझे दोहराने की जरुरत नहीं हैं | काल अपनी गति से चल रहा हैं | आज पांडव चौदह वर्ष वन भटक रहे तो क्या हुआ | कौरव सभा तो मौन होनी ही हैं | आज दिशा बदल कर इधर वक़्त भटका हैं | कल की होनी तेरी ही हैं | आज हस , ले भाग ले पासों का वक़्त हैं कुछ तो मोल चुकाएंगे ही युधिस्ठिर अपने चालो का | पर अंत तो दुर्योधन और सकुनी का भी निश्चित ही हैं || गांधारी का विलाप भी उतना ही सत्य हैं जितना सत्य आज की तेरी क्रीड़ा हैं || तो हस ले वो कौरव समाज क्युकी कल की पीड़ा तो तेरी ही है || प्रिया मिश्रा
- Get link
- X
- Other Apps
मुझसे कोइ भूल नहीं हुई जो पछतावा करू प्रेम किया हैं प्रेम न पाप है ना भूल है || मैं कोइ राह नहीं भटकी जो लौट आऊँ प्रेम किया है प्रेम ना गलत राह है ना कोइ गलत मंजिल है || मैं कोइ मंजिल नहीं ढूंढ रही जो , ना मिले तो टूट जाऊँ प्रेम किया है प्रेम ना मंजिल है ना रास्ता है || मैंने कोइ नदियों की गहराई नहीं मापी प्रेम किया हैं प्रेम सागर की मोती हैं कोइ नदियों का सीपी नहीं जो , टूट जाये खाली सा होके || मुझसे कोइ भूल नहीं हुई जो पछतावा करू प्रेम किया है प्रेम ना पाप है ना भूल है || प्रिया मिश्रा :)