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Showing posts from April, 2019
पोस्ट कार्ड। ... ये लो रमा बहन तुम्हरा पोस्ट कार्ड आ गया || क्या लिखा हैं तुम ही पढ़ दो डाकिया बाबू || मैं तो ठहरी निपढ़ | अच्छा बहन , लिखा हैं, मैं  ठीक हूँ माँ ।  तुम कैसे हो माँ , तुम्हारी बहोत याद आती हैं  ||  जल्द ही आऊंगा तुमको लेने || माँ सुन के बहोत गदगद हो गयी || कितना भोला हैं मेरा बेटा  , आज भी मेरे बिना नहीं  रह पाता || डाकिया मुस्कुराया , और  खाली  पोस्टकार्ड लेके चला गया, किसी  और माँ का दिल रखने || प्रिया  मिश्रा || 
कमरे में सन्नाटा और  आधी टपकती हुई छत  रात भर ऐसे गुजरा था उसने और सुबह उसके जनाजे को सजा के ले गए | इंसानियत को मार कर सब नाम कमाने में लगे हुए थे , और पुण्य  मुँह बाये खड़ा रहा || प्रिया  मिश्रा।।
मैं  लिखने की आदि हूँ इसलिए , बेगानी हो गयी हूँ , लोगो ने बेगाना कर दिया ये कह के , की तू  मेरे घर की इट  नहीं हैं मेरे हजार के ईंटो  में डॉक्टर और इंजीनियर  के तमगे हैं। ये लेखक का तमगा हमारा नहीं ये कोइ और ठोक  गया हैं कील  कलंक का || प्रिया मिश्रा 😊