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Showing posts from April, 2021
 आँखों में दीपक जलाने होंगे तब कहीं दिखेगा .......... किसी के होठों पे सबेरा ....... . आशिता तिवारी :))
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 लोकडाउन के दौरान बच्चो का बिकास कैसे संभव है   इस कोरोना काल में ..हमारे बच्चे स्कूल नहीं जा रहे | इन छुटियों के दिनों को कैसे उपयोगी  बनाये अपने बच्चों के लिए ............ आईये जानते है मेरे नए ब्लॉग में ........... सबसे पहले तो ..............आप सभी का बहोत -बहोत धनयवाद ......मेरे ब्लॉग को इतना पसंद करने के लिए .............यदि आप लोगो को मेरे ये ब्लॉग पसंद आये तो कमेंट जरूर करे || धनयवाद ||    बच्चो की शिक्षा  को 3 व्यापक श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है: शैक्षणिक, मनोरंजक और सामाजिक।   संतुलित विकास तब होता है जब वहाँ होता है शारीरिक, मानसिक और शैक्षिक के बीच संगतता    हम सभी इन तीनो में सामंजस्य अपने घर में भी बैठा सकते है .........................कुछ समय सारणी बना के .................या ऐसा करे हम की ...........खेल -खेल में बच्चो को पढ़ाना सुरु करे .........ये सायद हमारे लिए और हमारे बच्चो के लिए भी काफी अच्छा अनुभव रहेगा .         हम इसे एक क्रायक्रम की तरह कर सकते है ..........अपने आस -पास के बच्चो को इकठ्...
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  बच्चो का जीवन और माता पिता का उनके जीवन में  योगदान     कभी -कभी हम हम अपने भागते हुए जीवन को देख के खुद ही थक जाते है ..............तो सोचिये ये बच्चे कितने थक जाते होंगे | स्कूल का प्रेसर , होमवर्क , कम्पटीशन , और उसपे हमारा उनके उम्र के बच्चो के साथ कम्पायर करना ||  ये सच है की हर माता पिता अपना बचपन अपने बच्चो में जीते है ...................अपना पूरा जीवन उनके लिए नेवछावर कर देते है ...............उनकी खुसी में अपनी खुसी देखते है ..................लेकिन क्या ये आजकल की बच्चो की और हमारे नई जेनरेशन को डिप्रेशन में जाते हुए देख ..........ये सारी बाते बेमाने नहीं लगती है || लगता नहीं है ....की ....हम कही चूक रहे है .........कोइ भूल हो रही है हमसे .........हम या तो बहोत पीछे जी रहे है अपना जीवन,, या फिर बहोत आगे जी रहे है ..............और हमारे बच्चे कही बिच में छूट गए है | हमने ये दिखाने के लिए की हम बच्चो की फ़िक्र करते है ..........या उनके लिए सब कर रहे है .............हमने खुद ही अपने बच्चो और अपने मध्य एक दीवार बना रखा है | आज करोड़ो की भीड़ में हमारा ब...
  सफलता और असफलता     सफलता और असफलता एक समय है ...........गुजर जाता है |  आप अगर अपने जीवन में बार -बार असफल हो रहे है ............लेकिन प्रयाश जारी है तो यकीं मानिये आप वास्तव में विजेता है ............जिसमे कोइ कमी नहीं है बस वक़्त के हाथो मजबूर है || ये लाइन मैं अपने लिए लिखती थी ...........और दीवाल पे लगा देती थी ...........लेकिन मैं एक और लाइन लिखती थी,, की .......... कहाँ कमी रह गयी ? | कभी -कभी हम जरा सी चूक से .........पीछे रह जाते है और वही गलतियां बार -बार अनजाने में दुहराते है हमें खबर नहीं होती लेकिन सब कुछ पहल जैसा ही होता है और फिर हार का सामना हमें करना पड़ता है ||  मैं १० बार मेडिकल के एग्जाम में फ़ैल हुई हूँ ..........आपको भी आश्चर्य होगा .........किसी में इतनी हरने की हिम्मत कैसे हो जाती है ?   ..........मुझमे भी नहीं थी | लेकिन फिर भी किया ...........कोइ पागलपन नहीं था की डॉक्टर बनाना है ...........लेकिन घर वालो की ईक्षा थी | सो प्रयाश जारी रखा ........फिर बाद में एहसास हुआ गलत कर रही हूँ ..............अपने घर वालो के साथ भी और अपने ...
  निराशा एक दीमक है    इस निराशा से बाहर कैसे निकले | क्या सबको जरुरत है किसी कंसल्टैंट की ? आईये जानते है मेरे नए ब्लॉग में |   सबसे पहले तो बहोत बहोत सुक्रिया आप सभी का मेरे ब्लॉग को इतना पसंद करने के लिए |  ऐसे तो बहोत कुछ लिखा जा सकता है | और आपने बहोत कुछ पढ़ा भी होगा इसके लिए | १) सकरात्मक रहे २) खुस रहने का प्रयाश करे ३) योग करे ४)अपने आप को बिजी रखे ५) भरपूर नींद ले ऐसी और भी बातें है | सब सही भी है | मानने योग्य है और हमें  माननी भी चहिये || लेकिन समस्या ये है की जब हम निराश होते है | हम सोच नहीं पाते कुछ भी ........हमें कुछ भी अच्छा नहीं लगता | दिमाग में हजार ख्याल आते है ............कुछ अच्छे और बहोत सारे बुरे ख्याल .........जिन्होंने हमारी रातो को नींद उड़ा रखी होती है | ऐसे में कैसे कोइ अच्छी नींद ले ........कैसे कोइ बिजी रहे .........ऐसा क्या करे की वो ..........अपने इस निराश पल को भी ऊर्जा से भर दे |  है ना कठिन सा प्रश्न || मैं यहां पे कोइ ज्ञान नहीं दूंगी | बस वो कहना चाहूंगी जो मैंने किया .......मेरे लिए भी बड़ा मुश्किल सफर रहा ये | लेक...
 मैं किसी कविता को पूर्ण करूँ इससे पहले ,, मैं एक कहानी बन जाती हूँ || प्रिया मिश्रा :)) जिससे तिरस्कार  मिला हो उससे ,, पुरष्कार की उम्मीद क्या लगाना || प्रिया मिश्रा :))   24
 वक़्त मुझे आजमाता है मैं वक़्त को आजमाती हूँ दोनों वक़्त के साथ जीतते और हारते रहते है || प्रिया मिश्रा :)) अक्सर आसूं पीती आखें ठहाको में बदल जाती है || प्रिया मिश्रा :)) जब किसी की बुनियाद पे सवाल उठता है लोग उसे ,, बेबुनियाद ठहरा देते है || प्रिया मिश्रा :))    
  किसी भी व्यक्ति को इतना पढ़ा -लिखा होना चाहिए की वो ..............बुरे वक़्त में अपने दोस्तों की खामोशियों को पढ़ सके | अगर आप अज़नबियों की खामोशियो को भी पढ़ सकते है ,, तो आपके जितना ज्ञानी कोइ नहीं ||     प्रिया मिश्रा :))    लिखा कुछ किया कुछ सुना कुछ और ,, पढ़ा कुछ ये कविता नहीं ये लेखक भी नहीं ये दोमुहे  समाज के दोमुहे  रूप है ये कविता नहीं है प्रिया मिश्रा :))
 खोकर हमें नुकसान तुम्हारा भी होगा मैं कोई पतझड़ नहीं जो लौट आउंगी गुजरा हुआ वक़्त हूँ बसंत नहीं बन सकती || प्रिया मिश्रा :)) हमारे यहाँ प्रेम को सिर्फ लिखने का रीवाज़ है अगर आप लिखने से ज़्यादा प्रेम को निभाने में बिश्वाश रखते है ,, तो सामाजिक बहिस्कार के लिए त्यार रहे क्योकि,, हमारे समाज के कुछ सभ्य लोगो की सभ्यता पे आंच आती है   जो सिर्फ प्रेम पे लिखना जानते है निभाना नहीं || प्रिया मिश्रा   24
 कभी -कभी अपार स्नेह का लेप भी पुराने घाव को नहीं भर पाता   || प्रिया मिश्रा :)) शरीर का चोट वक़्त के साथ भर जाता है मानशिक चोट वक़्त के साथ और चोट देता है प्रिया मिश्रा :))   24
 बहुत विचार विमर्श के बाद मैंने ये निर्णय लिया की खामोश रहो ........... जब तक तुम्हारी खामोशियाँ शोर ना करने लगें।। प्रिया मिश्रा :)) जिस दिन सब अपने -अपने तरीके से सत्य और सही होने का प्रमाड दे रहे होंगे मैं तब भी मौन ही चुनुंगी क्योकि मौन सत्य का पर्यायवाची हो चूका है || प्रिया मिश्रा :)) 24
 चमकते से शहर में अँधेरा बहोत है कही कुछ दीखता नहीं ............ जाने कौन सी बस्ती के कौन से घर के कौन से कमरे में क्या चल रहा है इस शोर भरे शहर में सन्नाटा बहोत है || प्रिया मिश्रा :))
फ़टी चप्पल पे लिखने वाले बहोत है कोइ नई दिला दे तो कुछ नया हो || प्रिया मिश्रा :)) उम्र निकल गयी देखते हुए अँधेरी गलियों में,, आये हुए मोड़ो  को जहां से मुड़ना था वहाँ न मुड़ कर कही और मुड़ गए अब आखरी पड़ाव पे सोचते है ,, क्यों ? प्रिया मिश्रा :))    24
 भूखे घर में घर की नीव भी भूखी है ........ नीव एक -एक इट खाते जा रही है मकान की ... मकान ढहता जा रहा है   || प्रिया मिश्रा :))
 मिले जो किसी रोज़ फ़ुर्सत .. तो टटोलना अपनी आत्मा को और पूछना उससे ... की मिले थे उसे कितने ही मौके ज़िन्दगी जीने के ... लेकिन तुमने ठुकरा दिया था उन मौकों को ये सोचकर की ... ये दुनिया क्या कहेगी ..!! प्रिया मिश्रा :))