शुरुआत शुन्य है
अंत शुन्य है
तो फिर किस बात का अहम् लिए बैठो
ना कुछ लेके आये
ना कुछ देके जाओगे
अभिमान का घड़ा भरेगा
तुम उसमे खुद ही डूब जाओगे
ये डूबने का सिलसिला तब तक जारी रहेगा
जब तक खुद को ना पहचान पावोगे
आदमी को आदमी समझो
क्युकी ,
वो भी शुन्य है
तुम भी शुन्य हो
उसका भी शुरुआत शुन्य है
तुम्हारा भी शुरुआत शुन्य है
ना तुम महान हो
ना कोइ और महान है
प्रिया मिश्रा :)
**********************************************************
मनुष्य जीवन के सार्थकता को तब समझता है , जब वो जीवन के आखरी पड़ाव पे होता है ||
तब उसे एहसास होता है
वो शुन्य था
शुन्य है ||
प्रिया मिश्रा :)
**************************************************************************
मैं वहाँ से झाँकती हूँ जीवन को
जहाँ कोइ खिड़की दरवाजा नहीं है
बस एक सुराख है
और वो सुराख ही मेरा जीवन है ||
प्रिया मिश्रा :)
*************************************************************************
रौशनी को महसूस करने के लिए , एक खिड़की का होना जरुरी है
खिड़की का बाहर के तरफ खुलना जरुरी है , बाहर से सूर्य का प्रकाश आना जरुरी है
प्रकाश से खिड़की का नहाना जरुरी है
ताकि आप महसूस कर सके रौशनी को ,
लेकिन इतना ही काफी नहीं , आपके हिर्दय के प्रकाश में जीवन भी बसना जरुरी है ||
प्रिया मिश्रा :)
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मनुष्य अपने अच्छे आचरण से मनुष्य कहलाता है
वरना ,
पशु - पक्षी हमसे ज्यादा अच्छा जीवन जीते है ||
प्रिया मिश्रा :)
अंत शुन्य है
तो फिर किस बात का अहम् लिए बैठो
ना कुछ लेके आये
ना कुछ देके जाओगे
अभिमान का घड़ा भरेगा
तुम उसमे खुद ही डूब जाओगे
ये डूबने का सिलसिला तब तक जारी रहेगा
जब तक खुद को ना पहचान पावोगे
आदमी को आदमी समझो
क्युकी ,
वो भी शुन्य है
तुम भी शुन्य हो
उसका भी शुरुआत शुन्य है
तुम्हारा भी शुरुआत शुन्य है
ना तुम महान हो
ना कोइ और महान है
प्रिया मिश्रा :)
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मनुष्य जीवन के सार्थकता को तब समझता है , जब वो जीवन के आखरी पड़ाव पे होता है ||
तब उसे एहसास होता है
वो शुन्य था
शुन्य है ||
प्रिया मिश्रा :)
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मैं वहाँ से झाँकती हूँ जीवन को
जहाँ कोइ खिड़की दरवाजा नहीं है
बस एक सुराख है
और वो सुराख ही मेरा जीवन है ||
प्रिया मिश्रा :)
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रौशनी को महसूस करने के लिए , एक खिड़की का होना जरुरी है
खिड़की का बाहर के तरफ खुलना जरुरी है , बाहर से सूर्य का प्रकाश आना जरुरी है
प्रकाश से खिड़की का नहाना जरुरी है
ताकि आप महसूस कर सके रौशनी को ,
लेकिन इतना ही काफी नहीं , आपके हिर्दय के प्रकाश में जीवन भी बसना जरुरी है ||
प्रिया मिश्रा :)
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मनुष्य अपने अच्छे आचरण से मनुष्य कहलाता है
वरना ,
पशु - पक्षी हमसे ज्यादा अच्छा जीवन जीते है ||
प्रिया मिश्रा :)
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