पैरों में पहने घुंघरू से गूंजता आंगन प्रेमी की तस्वीर देख ग़ुलाबी होते रुख़सार हाँथों में पहनी चूड़ियों से बजता कोई मधुर संगीत किसी पुष्प बेल सी प्रतीत होतीं माथे पे लटकती लटें . . . प्रेम में पड़ने के उपरांत अत्यधिक बातूनी और चंचल हो जाती हैं.....लड़कियाँ
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Showing posts from October, 2020
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तुम्हारी सुन्दर सी आँखे और उन आँखों में बसी सिर्फ़ मैं और मुझमें बसे तुम तो डूब गए न तुम अपनी ही आँखों में सुनो ,, ये कविता तो औरों के पढ़ने के लिए है तुम्हारे लिए तो मेरे ह्रदय में बसा प्रेम है जो शब्दों की माला में पिरोकर तुम्हें दे रही हूँ।। प्रिया मिश्रा :) मैं ईश्वर से मांगती हूँ मेरी ख़ुशी तुम्हारी ख़ुशी हमारी ख़ुशी मैं ईश्वर से मांगती हूँ तुम्हें और सिर्फ तुम्हें जो की,,ईश्वर की हथेली से फिसलते हुए तुम मेरे आँचल से आ लिपटे हो तो अब टाँक लेना चाहती हूँ तुम्हे अपनी ओढ़नी में जिसमें तुमने टाँके है ढेरों हरश्रृंगार के पुष्प अपनी प्रेम की बगिया से चुन चुन के।। प्रिया मिश्रा :)
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वृद्धाश्रम मैं वृद्धाश्रम हूँ चार ओर से दीवारे हैं मेरे आगे मेरे बड़ा सुन्दर हरा भरा खुला मैदान है मैं अपने आप को बड़ा खुशनसीब मानता हूँ मैं रोज माँ का आँचल छू के उन्हें प्रणाम करने का सौभाग्य पाता हूँ बाप की ऊँगली पकड़ कर खड़ा हूँ मैं वृद्धाश्रम हूँ मैं निर्जीव हूँ पर संवेदनशील हूँ हजारों माताओं का आशीर्वाद प्राप्त है मुझे हजारों के सपने जुड़े हैं मुझसे मेरे तो कण-कण में माँ-बाप बसते हैं इसलिए मैं जर-जर नहीं हुआ मैं बेटा हूँ हजारों का इसलिए मैं जवान हूँ मेरे कंधे मजबूत हैं मैं वृद्धाश्रम हूँ मैं निर्जीव हूँ पर संवेदनशील हूँ जब कोइ माँ रोती है अपनों के लिए मेरा कलेजा फटता है मैं चीखें मारता हूँ मेरी भी आवाज उनके साथ गूंजती है और मेरी दीवारों में दरारें आ जाती हैं वे मेरी कमजोरी नहीं मेरी मजबूती हैं वे मेरी लहू में दौडता दूध हैं जो मुझे चुकाना है इसलिए मैं मज़बूत हूँ मेरे कंधे श्रवण के कंध...
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तुम आओगी जब मेरी ब्याहता बनकर तब लिखूंगा मैं तुम्हारे लिए एक उपन्यास जिसमें होगा संकोच जो हुआ था हमें तुमसे पहली दफ़ा बात करते हुए सिहरन जो हुई थी मेरे शरीर में तुम्हारा पहली दफ़ा हाँथ थामते हुए कर दूंगा कैद उस उपन्यास के पन्नों में वो तुम्हारे दिए हुए पहले ग़ुलाब की सुगंध और मेरे माथे पे दिए हुए तुम्हारे उस पहले बोसे का सुकूँ अंत में मैं लिख कर अमर कर दूंगा उन पन्नों में हमारे उस प्रेम को जो रहेगा हम दोनों के ही बीच अमर इस जन्म और अगले सात जन्म तक प्रिया मिश्रा :))
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मैं जब भी कुछ लिखती हूँ ,, मैं एक नया जीवन शुरू करती हूँ || प्रिया मिश्रा :)) मेरे लिए तो,, तेरा नाम ही तेरा शहर है प्रिया मिश्रा :)) कोइ मर जाये तो लोग उसपे मालायें चढ़ा के जीवन भर रोना पसंद करते है लेकिन जीते जी कोइ नहीं समझता,, की वो रोज मरता रहा है आज तो बस साँसे टूटी है || प्रिया मिश्रा :) पानी को बांध के समुन्द्र नहीं बनाया जा सकता है उसे बहने दो ,, वो बून्द - बून्द से रास्ते बना लेगा और एक दिन बन जायेगा बिशाल समंदर ,, तो पानी को बहने दो अगर समन्दर की चाह है || प्रिया मिश्रा :))