मैं मौके नहीं तलाशती
मौका मुझे तलाशता है
आज क्या उपहार दे वो मुझे
फिर वो कहता है
मैंने आज का दिन
और उसके सारे आशीर्वाद तुझे दे दिया
और मैं मुस्कुरा देती हूँ

मैं सूरज की किरणों को देखती हूँ
तो वो मुस्कुरा के कहते है
देखा है खुद को
तुम्हारी चमक से
हमारी आँखे चौंधियाँ गयी है
और मैं मुस्कुरा देती हूँ ||

मैं जब फूलो से गुजरती हूँ
फूलो की खुसबू मुझे छू जाती है
मैं उन्हें नमस्कार करती हूँ
और वो कहते है
ये बाग़ तुम्हारा है
हमें चुरा लो
हम तुम्हारे बालो में सज के
तुम्हारे बालो को सजाना चाहते है
मैं उन्हें धन्यवाद कहती हूँ

मैंने सबको देखा है
सबको महसूस किया है
सब हमारे है
हम सबके है
बस , नजर बदला है मैंने
नजरिया अपने आप बदल गया है
रात चांदनी से भर गयी है
सूरज और चमक गया है ||

प्रिया मिश्रा :)

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