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Showing posts from April, 2020
"आज कुछ नया करते है " चलो आज कुछ नया करते है खुद को जीते है जी भर के दुसरो में भी जरा प्यार भरते है चलो आज कुछ नया करते है || खुद को बना के खुद की दुनिया चलो आज खुद को खुद से साझा करते है चलो आज कुछ नया करते है || एहसान नहीं एहसास करते है जीने का दुसरो से मिलने का एक वादा करते है जिंदगी को उनसे  भी थोड़ा सा साझा करते है चलो आज कुछ नया करते है || जितना मिला है उतना बाँट लेते है खुशियों की थैली को आज प्यार से भरते है चलो आज कुछ नया करते है || प्रिया मिश्रा :)
बिश्व  से कोरोना १९ जड़ से ख़तम हो सकता है अगर दिलो में नजदीकियां बढ़ाई जाये || मिलने - मिलाने का सिलसिला जरा काम किया जाये || पृथ्वी को भी साँस लेने दो और खुद को जीना सीखो ये माना घरो में रहने का समय है | लेकिन आप आजाद हो खुद को जीने के लिए | अपनी पुरानी दबी इक्छाओ को पूरा करने के लिए | तो खुद भी नया कुछ सीखे दुसरो को भी सिखाये | सोशल डिस्टेंस रखे | खुद से प्रेम करना सीखे | अपने - अपनों से प्रेम बढ़ाये | ईश्वर को शुक्रिया कहे की आप सुरक्षित है और दुसरो के लिए प्राथना करे | अपने आस - पास साफ़ - सफाई रखे | हमेसा शिकायते न करते रहे आभार भी प्रकट करे | कोइ प्रॉब्लम में हो तो उसकी मदद करे || मुसीबते हमें कमजोर नहीं, मजबूत बनाती  है || अच्छाई हमेसा बुराई पे भारी  पड़ती है || तो अच्छाइयों का पलड़ा पढ़ाये कोरोना जैसे बुराई अपने आप ख़तम हो जाएगी || धन्यवाद :) प्रिया मिश्रा :)
"डॉक्टर " आज जहाँ सब अपने घरो में बैठे एक डॉक्टर है जो अड़े है खुद की बाजी लगा के दुसरो को बचाने  को ये डॉक्टर मसीहा बन के आये है धरती बचाने को || करो अभिनन्दन इनका ये डॉक्टर नहीं फरिस्ता है इस साल माँ दुर्गा ने नया रूप धरा है जो डॉक्टर में उभरा है हर दिन इनका भी भी तुम पूजन करो भारी क्षति से बचाने को डॉक्टर आये है कोरोना को हराने को || प्रिया मिश्रा :)  
" मैं खुद ही लिखती हूँ " जिंदगी के सारे सुर मैं खुद ही बून लेती हूँ मैं अपने जीवन की कहानी खुद ही लिखती हूँ || कोइ सपना कच्चा नहीं कोइ सपना पक्का नहीं जो साथ चला वो अपना है जो छूट गया वो अपना नहीं हर रंग के अक्षरों से मैं अपनी जिंदगानी भर्ती हूँ मैं अपने जीवन की कहानी खुद ही लिखती हूँ || मैं थक भी जाऊँ तो उमीदे पाँव  पसार लेती है ये मुझे जिन्दा करती है मुझे नया हौसला दे मुझे सवाँर  लेती है ये हौसलों की उड़ान मैं खुद ही लिखती हूँ || मैं कितनो की प्रेरणा हूँ मैं कितनो के शब्द हूँ मैं कितनो की अभिलासा हूँ मैं हर अभिलासा में रंग भर लेती हूँ मैं अपने जीवन की कहानी खुद ही लिखती हूँ || प्रिया मिश्रा :)
"वो बुलाती है मगर" पड़ोसन आई नई - नई दिल ने मेरे कहा बेटा , तेरा तो इतवार सोमवार सब बन गया मैंने कहा ,  श्रीमती जी से अजी  सुनती हो नए पडोसी आये हैं  चलो जरा हाल पूछ आये वो बोली फुदक क्यूँ  रहे तुम इतना क्यों हम बिना बुलाये जाएँ हमें लगा लो अब सपना तो टूट गया मेरा किस्मत फुट गया तभी आया एक बिचार बीवी को मनाने को पडोसी को लुभाने को हमने रखा दोस्तों का मिलन वार बीवी को दिलाया पूरा बाजार बीवी सज - धज दिखाने को उतावली हो गयी पड़ोसन  बुलाने को || पड़ोसन भी आई मुस्कुराती -मुस्कुराती हाय , दिल मेरा वही बैठ गया जहाँ उसके कदम हमारे अँगने  में आये थे || ये आँगन पे इतना गौर न कीजिएगा  ये तो यूँ  ही कह दिया पर सच कहुँ  दिल मेरा वही रह गया जहाँ  - जहाँ वह चली थी हाय , पड़ोसन मेरी कितनी भली थी || तभी आई खाने की बारी सबने अपनी - अपनी प्लेट संभाली मैं लगा डोसा - इडली डालने पड़ोसन लगी और मांगने हम डालते गए वो मांगती गयी ख्याल तब आया दीवाने को , जब बीवी ने दो कोनी लगाए खाना सब ख़तम हो गया बेइज्जती की कोइ चर्चा ही ना पूछो ,...
आओ  मिल के देश बनाये खुद भी आगे बढे और देश को भी आगे बढ़ाये || आओ  मिल के देश बनाये किताबो की दुनिया से जरा  बाहर आये जरा मिले प्रकृति से आओ  इसे और भी सुन्दर बनाये || प्रिया मिश्रा :)
"चाँद अपने सफ़र  पे था और हम " चाँद अपने सफर में था और हम भी संग - संग  चल पड़े उसकी रौशनी के रास्तो में हमने देखा एक नायाब  तोफा जो जिंदगी थी हमने गले लगाया और मुस्कुरा के चाँद के साथ ढलता गया मैं धीरे - धीरे ,  सूरज में बदलता गया || प्रिया मिश्रा :)
"कोरोना वायरस " कोरोना वायरस कोइ बीमारी नहीं खतरे की घंटी है बहोत  देर पहले बजी थी , पर अब एहसास हुआ है की कैसे चली थी हवा कैसे कर के ब्रह्माण्ड बीमार हुआ है || साफ़ - सफाई  की सुचना तो पहले भी थी पर आज जंगे एलान हुआ है अब साफ़ - साफ़ दिखेगा सब - कुछ जरा दिन ठहरो घरो में जरा दिन प्रभु के ध्यान में दिन बिताओ मत मिलो अपनों से जरा गैरो पे भी ध्यान लगावो कोइ भूका हो उसे दो रोटी देदो कभी तो पुण्य कमाओ || ये वक़्त है हाथ मिलाने का नहीं साथ निभाने का है दूर से दिलो के एहसास को जगाने का जब जाग जाओगे  तुम स्वस्थ रहोगे कोरोना बीमार हो जायेगा भारत फिर से सोने की चिड़िया कहलायेगा सहयोग करो जरा दूर रहो ख्यालो को जोड़ो दिलो में प्यार जगावो जरा बंदहोके उन पँछियों के लिए सोचो जो कई वर्षो से कैद है तेरे सोने के पिंजरे में अब बहोत हुआ कैद रहना खुद भी साँस लो और औरो  को भी आजादी दिलाओ || ये कोरोना एक सबक है इसे  याद रखना साफ़ - सफाई करते रहना पिंजरे सारे तोड़ देना कोइ पँछी  अब ना कैद में रखना घर वालो से मिलते रहना जरा दिलो में प्यार ...
" ये दिन भी कट जायेंगे " नहीं कहो कभी की ये दिन भी कट जायेंगे हर दिन एक सबक होता  है हर राह तुम्हारे मंजिल की पहली कदम तो दिन को काटो नहीं जीना सीखो और जाते - जाते दिन को धन्यवाद कहो इसने वो सिखाया जो तुम कई सदियों से सीखना चाहते थे और ढलती शाम में फिर से घुल जाओ || तुम बादशाह हो बादसाही सीखो दिन को काटो नहीं जीना सीखो रात के खुले आसमान में चाँद से जरा गप्पे लगा लो चांदनी से  जरा आँखे चार कर लो मेहबूबा न सही रात के सफर के हमसफ़र है ये इनसे भी बातें दो चार कर लो || दिन को काटो नहीं जीना सीखो ये किसी किताबो में न मिलेगी ये किसी की आँखों में मिलेगी किसी को गले लगा के उसका हाल पूछ लो जरा अपनी सुना दो जरा उसका भी ख्याल पूछो बस महक उठेगी जिंदगी जिंदगी को जरा जीना सीखो दिन को काटो नहीं उसे जीना सीखो || प्रिया मिश्रा :)
"रुक सी गयी है जिंदगी " रुक सी गयी है ये जिंदगी तो इसे चलाओ पुरानी चाल छोड़ो कोइ नहीं कहानी बनाओ रुक सी गयी है जिंदगी तो इसे चलाओ || शाम के दीपक से सुबह का सूरज जगाओ अगर ना निकले सूरज तो , दीपों से ही दीपों का उत्सव मनाओ  रुक सी गयी है जिंदगी तो इसे चलाओ || ना रूठो खुद से ना कोइ शाम यही रहने दो डूबते  सूरज को भी नमस्कार करो उसे भी जरा एहसास दिलाओ शाम भी महत्वपूर्ण है सुबह को भी गले लगावो रुक सी गयी है जिंदगी तो ऐसे गले लगावो || रुक गए हो तो जरा ठहर के संभल के , जरा सोच - विचार के फिर से कदम बढ़ाओ रुक सी गयी है जिंदगी तो इसे चलाओ प्रिया मिश्रा :)
"कहानी " कहानी  कुछ नहीं बस कभी - कभी कहा - सूनी में बन जाने वाली एक घटना है जैसे कल हमारे पडोसी मिश्रा जी के साथ हो गयी एक कहानी | हुई तो घटना थी लोगो ने बता - बता के इसे कहानी कर दिया | तो भईया कहानी कुछ ऐसी है की , मिश्रा जी निकले थे पान खाने रास्ते में मिल गयी उनकी पड़ोसन , अरे वही जिसको आँखों के कोने से छिप - छिप के देखते थे | आज तो हद ही कर दी सामने से देख लिया , फिर क्या था बाहर उनके पडोसी ने धोया घर में बीवी ने | पुरे आठ टेक पड़े है मुँह में और नौ पड़े है टाँगो में बाकि सब ठीक है | वो उनकी पड़ोसन अभी ठीक है बस मिश्रा जी का नक्शा बिगड़ा है और एक कहानी त्यार है | अब ये कई पुस्तो तक चलेगी और शीर्षक होगा इसका  " कुटाई इन फ्रंट ऑफ़ जमाना फॉर जनाना " प्रिया मिश्रा :)