ये सलाम - दुआ सब चलते - चलते होने लगा है
रुक के गले लगाने वाले अब बिरले ही मिलते है

प्रिया मिश्रा :)
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मेरी आखरी ख्वाइश बस इतनी है
परिणाम नजर आये
मुझपे जो बीती है
उसका अंजाम नजर आये
दिल से जो आग निकली है
वो कही तो कुछ सुलगाएगी
मेरी कफ़न की मिट्टी
मुझे न्याय जरूर दे जाएगी
निकलेगा कोइ बीज
कोइ फल तो जरूर फलेगा
मेरे जीवन में हो
या न हो
इस परीक्षा का कोइ परिणाम तो जरूर निकलेगा
मैं रहूँ या ना रहूँ
मुक्ति तो मिलनी है
मुझे भी
मेरी रूह को भी ||

प्रिया मिश्रा :)
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अकारण की पीड़ा असहनीय होती है
और अकारण की मौत अकाल

प्रिया मिश्रा :)
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मेरा डाकियाँ मेरा सन्देश लाये बाहर खड़ा है
दरवाजे की जंजीर खुलती नहीं
डाकियाँ इन्तजार में है
वक़्त है
बदल जायेगा
जंजीर ही तो है खुल जायेगा ||

प्रिया मिश्रा :)
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घर के कोने - कोने में रौशनी बस्ती थी
हमने जब भी देखा काला चश्मा लगा के देखा

प्रिया मिश्रा :)
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 मैं जितना करीब इंसान से मिलती गयी
इंसान ,
 इंसान ना रहा वो करीबी
और करीबी दोस्त बनकर
दानव में बदलता गया ||

प्रिया मिश्रा :)

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