मैंने आँखों में समुन्द्र भर के
तैरना सिख लिया
एक छोटा सा गीत गया जिंदगी ने
और हमने गुनगुनाना सिख लिया
अब हाले दिल सुनाने की
हिम्मत नहीं रही
करीबी लोगो ने
हमें भुलाना सिख लिया
रौशनी बाकि है
लेकिन सूरज ने भी कुछ वक़्त
के लिए डूब जाना सिख लिया ||

प्रिया मिश्रा :)

मैं  आदमी हूँ
लेकिन आदमी जैसा
सफर नहीं करता हूँ

बस जिंदगी की गाड़ी में
गुजर - बसर करता हूँ ||

प्रिया मिश्रा :)

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जंजीरे अगर पाँव की पिघलानी है तो
आग तो जलाना  होगा
ना बना सके सेतु कोइ गम नहीं
धीरे - धीरे किनारा तो बनान होगा

प्रिया मिश्रा :)

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