हर व्यक्ति को खुद पे और दुसरो पे भरोसा होना चाहिए
लेकिन , जरुरत से जायदा नहीं ||
क्युकी, अति की बारिश भी कीचड़ दे जाती है ||

प्रिया मिश्रा :)
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आज का ज्ञान
घर में भाई - बहनो
और भाई - भाई में लड़ाई होना आम बात है
लेकिन  ध्यान रहे ये लड़ाई इतनी ना बढ़ जाये | आपके भाई बहनो के सर पे समोसे निकल आये और मम्मी आपकी  चटनी बना दे ||

प्रिया मिश्रा
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आदमी  जब जोर से हँसता हूँ
तब वो  अंदर से मरा हुआ रहता हूँ ||
जब वो रोता है , उसकी साँसे चल रही होती है
लेकिन जब वो चुप हो जाये ,समझ लो
आदमी जीने की कोसिस कर रहा है
यमराज से कह रहा है
एक कोशिस और करने दो
सायद अब मैं सिख पाऊँ जीना
और कह पाऊँ आईने से
अभी मैं जिन्दा हूँ ||
प्रिया मिश्रा :)
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मैं मिलके तुमसे तुम्हारा हाल पूछना चाहता था
लेकिन मिल ना पाया
कोइ बेड़ियाँ नहीं थी पावँ में
बस , मैं उलझा हुआ था खुद के झूठे स्वाभिमान में
और एक राह ढूंढ़ता रहा
जो ग़ुम गयी है अँधेरे में
और सितारों की रौशनी अब मुमकिन नहीं ||

प्रिया मिश्रा :)
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 मैं बातों - बातों में तुम्हारी बातें कर बैठती हूँ
जाने ये बातें क्यों आ जाती है
हर बात में अक्सर ||

प्रिया मिश्रा :)
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मेरा चेहरा हस्ता रहा
मैं रोती रही
कुछ यूँ  रखा है हमने फ़ासला
खुद से खुद का ||

प्रिया मिश्रा :)

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भरोसा हो जाता है
जब कोइ प्यार से कहता है
तुम्हारा हूँ ,
भरोसा हो जाता है
जब कोइ कहता है
तुम अकेले नहीं हो

लेकिन वही भरोसा टूट जाता है
जब कोइ कहता है ,
प्यार नहीं था तुमसे ,
तुम , बस अच्छे हो
बात कर लिया
ये लगाव ना रखो हमसे
हमने कोइ वादा इतना गहरा भी नहीं किया
टूट गए हो तो
फिर से खड़े हो जाओ
इकरार का वादा हम नहीं करते
हमें रोज- रोज प्यार होता
हम एक जगह नहीं ठहरते


हम खड़े सोचते रह जाते है
ये कौन छल गया है
जिसने दिल नहीं तोडा
जाते - जाते
रूह मरोड़ गया है
भरोसा कैसे कर ले
उसका चेहरा भरोसा करने नहीं देता
हर चेहरे में दीखता है वो
गम , अब भरने नहीं देता

यकीन ना था ये हो जायेगा
टूटेगा गए दिल
और भरोसा मर जायेगा
दुबारा इकरार कैसे कर ले
अब दुबारा प्यार कैसे कर ले ||

प्रिया मिश्रा :)
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मैं शाम तक तुम्हे ताकता रहा
तुमने दस्तक ना दी
रात काली हो गयी
अब कोहरा घाना है
मेरे पास आना मना है
रख लेना तुम तस्बीर सजा कर
की इरादा तो तुम्हारा भी ना था
मना लो मुझे ,
मेरे करीब आकर ||

प्रिया मिश्रा :)
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पिता एक ऐसा आधार है
जिसके बारे में पूरा जीवन लिखे कम है
चार लाईने लिख के,
उसकी क्या ब्याख्या करेंगे
जो हमारा पूरा संसार है ||
प्रिया मिश्रा :)
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एक बच्चा पेड़ो के पत्तों के गिरने से बड़ा उदास था | हमने उसे संतावना दी | दुःख ना करो हरे पत्ते फिर आ जायेंगे |
उसने बदले में सवाल कर दिया |
जो चले गए वो भी ,फिर आ जायँगे क्या ??
मैं भी स्तब्ध थी , क्या जवाब देती , मासूम आँखों पानी कम गहराई ज्यादा होती है ||
जो चला गया वो तो सच में नहीं आएगा | नए कितने भी आ जाये | पेड़ खाली ही रह जायेगा ||

प्रिया मिश्रा :)
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कहा तो था मैं तुम्हारी हूँ
तब तुम , घटाओं में छिपे चाँद को ढूंढ़ते रहते थे ||

मैं पुकारती थी तुमको
और तुम किसी और धुन में रमे रहते थे ||

अब कह ही दूँ की मैं तुम्हारी हूँ
क्या फर्क पड़ता है,
बीते मौसम की कहानियाँ उसी रूप वापस नहीं लौटती
पात्र बदल जाते है ||
प्रिया मिश्रा :)
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