ठहरी हुई नदी जब उफान पर चलती है तब बांध काम नहीं आते || प्रिया मिश्रा :) ***************************** ************************************* मुझमे शब्द नहीं बसते मैं सब्दो में बस्ती हूँ इसलिए मैं कविता लिखती हूँ || प्रिया मिश्रा :) ********************************* ********************************** कवी सम्मलेन में लोग कवियोँ को सुनने आते है समझने नहीं || प्रिया मिश्रा :)********************* ************************************ माँ मेरी कहती है जिंदगी ने जितने इम्तहान लिए है , उतनी डिग्रीया दी होती , तो आज मैं बैरिस्टर होती || और मैं कहती हूँ माँ से , मम्मी , अच्छा हुआ जो आपको डिग्रियाँ नहीं मिली वरना हम इतनी अच्छी माँ कहा से लाते || माँ बड़ी है बैरिस्टर से , और मेरी इस बात से माँ हँस देती है सकुचा के || और माँ की इस हसीं को देख के मुझे खुसी मिलती है 'IAS' वाली || प्रिया मिश्रा :) ************************************ ************************************************* प्रतीक्षा करना मेरा मैं उन सारे घावों को चीरते हुए आऊँगी जो स...
Posts
Showing posts from May, 2020
- Get link
- X
- Other Apps
प्रेम प्यास सब छलावा है बून्द - बून्द में बिष है अंग में लगे भुजंग प्रिया मिश्रा :) ************************** ****************************************** दरारें बहुत गहरी है भरते - भरते भरेंगी लेकिन निशान फिर भी रह जायेगा || प्रिया मिश्रा :) *************************************** ************************************ मुस्कुराते रहिये लोग गम लेके कही भी मिल जायेंगे || प्रिया मिश्रा :) ************************************** ***************************************** चाकरी करने आती है मगर प्रेम की प्रिया मिश्रा :) गुजरता हुआ सा आग वक़्त के साथ सबकुछ जला गया एक ज़बान बाकि है रह - रह के वो भी खा ही जायेगा || प्रिया मिश्रा ************************* ************************ वो जो आपको कहते रहते है मैं हूँ , मैं हूँ वो गुजरते वक़्त के साथ ये भी कह देते है मैं व्यस्त हूँ मुझे परेशान ना करो अपना देख लो है ना अद्भुत ये संसार मिथ्या और सत्य साथ - साथ प्रिया मिश्रा :) वो कौन सा प्रेम था जो आँधियो में दिशा बदल लिया करता था |...
- Get link
- X
- Other Apps
गुजरे हुए खुशनूमा पलों को समेट के रखना वैसा ही है जैसे सूखे फूलों में खुसबू समेट के रखना दोनों ही मुश्किल है लेकिन कलाकारी है रंगो को जिन्दा रखना अँधेरे में , जहाँ प्रकाश छूता भी न हो उस कैनवास को जो बंद है सात परतो में दिल के || प्रिया मिश्रा :) ********************** ******************************************* अधूरी बात पे किताब कैसे लिख दे कुछ खोलो मन को टटोलो खुद को कही निकल जाये कोइ जज्बात जो जिन्दा हो अभी की, अर्थियो के हरे बाँस की टहनियों में में भी जीवन बसता है जब तक वो जले ना तुम तो सिर्फ टूटे हो अभी तो तुम्हारी हर साँस में जीवन बसता है तो टटोलो खुद को खोलो खुद को कही कुछ निकल आये जज्बात जो जिन्दा हो अभी || प्रिया मिश्रा :) ********************************* ********************************************** एक स्त्री से प्रेम और एक एक स्त्री का अपमान एक स्त्री प्रेमिका एक स्त्री का ध्यान एक स्त्री का हरण और एक स्त्री का मान सब एक साथ कैसे प्रिया मिश्रा :) *************************************** *****************************...
- Get link
- X
- Other Apps
सुनो कहा सुना सब माफ़ करो चलो अब से एक नया जीवन बसाते है || जहाँ खुद को थोपेंगे नहीं प्रेम करेंगे एक दूसरे से क़द्र करेंगे एक दूसरे की भावनावो का जहाँ मेरा - तुम्हारा कुछ ना होगा सब कुछ हमारा होगा हमारा अपना मेरा और तुम्हारा सुखी रोटी भी और वो तकिया का आधा कोना भी जब मैं अँधेरे में रहूँगा तुम प्रकाश दिखा देना मैं तुम्हे फिशलने नहीं दूंगा चाहे जीवन में कितनी भी फिशलन हो मैं संभाल लूंगा तुम प्रीत निभा लेना थोड़ी मैं प्रेम निभा लूंगा सब कुछ बाटेंगे साझा करेंगे दुःख भी सुख भी || *********** *********** ये कितना अच्छा होता अगर यात्रा की कोइ बात ना करता कोइ कहानी चलती और मंजिल आ जाती एक भरोसा होता एक बिश्वाश चलता ये यात्रा के नाम पर तो पैरो में थकान सी आ जाती है उनके , जिनके थकान अभी उतरे नहीं और मंजिल कोसो दूर है इतनी दूर की , आँख से नहीं दिखती और बेधति रहती है मन को एक आश बनके एक प्यास बनके **************** ******************* एक दिन का मदर्स डे और हजारो की संख्या में विर्धाश्रम डरावना है मगर सच है *********** *********** ये नए...
- Get link
- X
- Other Apps
हर घर में तो नहीं लेकिन हर रोज कही किसी घर में झगड़ा तो होता ही है || कारण १) ईर्ष्या २) लोभ ३) समानता का हक़ ४) मानशिक संक्रीणता ५) अकारण बल प्रयोग या फिर कह ले खुद को काबिल साबित करने की भूख ६) मानशिक परेशानी के कारन जन्मता अवसाद और भी कई कारन हो सकते है || लेकिन अगर रोक - थाम पे धयान दिया जाये और संभल के कार्य किया जाये तो इसे रोका जा सकता है || इसे रोकने का सबसे बढ़िया तरीका है क्रोध पे नियंत्रण और क्रोध पे नियंत्रण का सबसे बढ़िया तरीका है ध्यान और ध्यान का सबसे बढ़िया तरीका है प्रभु के प्रति समर्पण || बच्चो में इसका बहोत ही गहरा प्रभाव पड़ता है || या तो बच्चे बहोत सहम जाते है | या वो भी मानशिक रोगी हो जाते है | अर्थात ये भी एक बिषाणु की तरह मानव प्रतिरोधक क्षमता को खाते जा रहा है || इसका एक ही बेहतर विकल्प है || आपसी प्रेम एक दूसरे की बातो को सुने एक दूसरे को समय दे || सबकी भावनावो की क़द्र करे || मानव जीवन को अधिक महत्वा दे || खुद से प्रेम करे और दुसरो से भी || शांति का अनुभव करे || अगर आपको गुसा आये तो शांत रहना सीख...
- Get link
- X
- Other Apps
हमने इश्क के जितने रंग देखे है उतने तो मौसम भी नहीं बदलते प्रिया मिश्रा :) कल हजारो देखे थे आज एक भी नहीं ये वक़्त की चाल हैं वक़्त बदल के वक़्त पे हस्ता है प्रिया मिश्रा :) ये घड़घड़ की आवाज है जाने कौन सी चक्की चलती है जाने कौन सा वक़्त पिस्ता है जाने कौन सा वक़्त चलता है कभी ऊपर है कभी निचे है जाने कौन सा वक़्त रोता है जाने कौन सा वक़्त हस्ता है ये घड़घड़ की आवाज है जाने कौन सी चक्की चलती है जाने कौन सा वक़्त पिस्ता है प्रिया मिश्रा :) एक भूखा पेट एक दिन खुद को ही खा जाता है || प्रिया मिश्रा :) ये टूटे हुए चप्पलो की जिसने तस्वीरें ली है वो तस्वीरें जीवंत हैं और आत्मा मरी हुई है || प्रिया मिश्रा :) आपका आने वाला हर दिन वो गीली मिट्टी है जिसे आप कोइ भी आकार दे सकते है तो संभल की सोचिये और अच्छा सोचिये भला सोचिये || प्रिया मिश्रा :) वो गले मिल के रोने वाला कोइ अपना ही होगा गैरो के लिए कभी कोइ इतना नहीं फूटता वो सूखा पत्ता भी बड़ी पीड़ा देता है जिसे टूटने की उम्मीद नहीं होती || प्रिया मिश्रा :) ये आशा ही प्रयाश की जननी होती है और प्रयाश ...
- Get link
- X
- Other Apps
सुनो मिलो हमसे तुम वही पूरानी सखा बनकर की नया चेहरा भाता नहीं है || कल जो मिले थे हम कागज की नाँव में वो सपनो की गाँव में , जैसे कल तुम मुझे भले लगे थे वैसे मिलो ये नया चेहरा मुझे भाता नहीं है || प्रिया मिश्रा :) ये बिखरता हुआ सा मैं भीड़ में कही खो ना जाऊँ सुलझता हुआ सा ठीक हूँ अकेले में, मैं || प्रिया मिश्रा :) ये बड़ा अनोखा चित्रण किया है बिधाता ने प्रकीर्ति और स्त्री का एक रोती है तो बारिश होती एक रोती हैं तो आँख में कचड़ा गया होता है और आँचल घर के कामो से भींगा रहता है || अद्भुत है ना चित्रण || इस से भी गहरा चित्रण है पुरुष का ये रोते नहीं हिर्दय में शून्यता लिए बैठे रहते है ये कहते नहीं इनकी आँखे कहती है आज बरसने को जी चाहता है माँ का आँचल ढूंढ के ला दो || प्रिया मिश्रा :) मैं सिर्फ मैं हूँ यही मेरी बिशेषता है || मैं अलग हूँ सबसे ये नहीं कह सकती लेकिन कुछ अलग करना चाहती हूँ ये बिशेषता मुझे औरो से अलग करती है || ये बिशेष गुण क्या होता हैं मैं नहीं जानती लेकिन मानती हूँ मैं लिख सकती हूँ कुछ बिशेष कुछ नया जो बनाये मुझे ...
- Get link
- X
- Other Apps
"क्या बात है " क्या बात है आज सिटी बज रही है दिल में उमंग है पाँव जमीं पर नहीं है क्या बात है ? कुछ बात नहीं बस जिंदगी जीने का सलीका सिख रहा हूँ बेवजह कैसे मुस्कुराऊँ वो तरीका सिख रहा हूँ सब तो वजह ढूंढ़ते है मै तो वजह नहीं ढूंढ़ता और बेवजह भी नहीं रहता मैं रात की चांदनी में कल का सूरज देखता हूँ और कोइ बात नहीं है बस जिंदगी जीने के तरीके ढूंढ़ता हूँ || ये कमाल की बात है कल हँसा वो याद नहीं कई साल पहले रोये थे वो आज तक रो रहे है जो मिला था वो याद नहीं जिस से बिछड़े थे वो टिश आज भी उठती है कल क्या खाया याद नहीं कब क्या नहीं खाया वो टिश खाये बैठे है मैं इन सब समस्याओ को हवाओ में उड़ा के उस उड़ते धुएँ में मुक्ति ढूंढ़ता हूँ और कोइ बात नहीं बस पाँव रखने भर की जमी ढूंढ़ता हूँ || क्या बात है तुम तो आश्चर्य की सिमा से परे कोइ धरती ढूंढ़ते हो तुम गैरों की महफ़िल में करीबी ढूंढ़ते हो कैसे कर लेतो हो ये सब की पत्थर के शहर में शीसा ढूंढ़ते हो तुम आदमी हो की पायजामा की फटी हुई जेब में तुम सिक्के ढूंढ़ते हो || हां भाई बस ऐसा हूँ ही हूँ मैं मैं जंग...
- Get link
- X
- Other Apps
बिष के भरे घड़े में कोइ मार दे कंकड़ अमृत के ऐसे कोइ आ जाये बिना किसी संदेशे के जीवन कितना रंग बिखेर दे सातों रंगो का सपना हो बिष के भरे घड़े में कोइ मार दे कंकड़ अमृत के ऐसा कोइ अपना हो || चांदनी सी चमकती जाये सूरज सा सुनहरा दिन अपना हो बिष के भरे घरे में कोइ मार दे कंकड़ अमृत के ऐसा कोइ अपना हो || प्रीत की रीत नई नही कोइ बस अपनी राह में थोड़े रोड़े है चाहूँ एक बयार मीठी सी जो चुन ले राह के रोड़े को फूल बन के प्रीत बिखरे कदमो तले मेरे चाँदनी - ही चॉँदनी बिखरी हो बिष के भरे में कोइ मार दे कंकड़ अमृत के ऐसा कोइ अपना हो || एक इंद्रधनुष सा जीवन हो एक तारो की बारात हो चाँद बैठा हो दूल्हा बन के और आसमान का सामियाना हो धानी चुनर मैं ओढू प्रीत ही मेरा गहना हो बिष के भरे में कोइ मार दे कंकड़ अमृत के ऐसा कोइ अपना हो || प्रिया मिश्रा :)
- Get link
- X
- Other Apps
"गृहस्थ जीवन " है गृहस्थ जीवन क्या समझने को मेरे ललना आवो कभी घर के अंदर देखो कैसे होता है मकान का घरबनाना यहाँ कोइ बड़ी बेवस्था नहीं नाही कोइ गड़ना है छोटी सी कुटिया उसमे गृहस्वामिनी बनाये रोटी गृहस्वामी झले उसे पंखा और पास पड़े पलने में खेले वो छोटा सा ललना || साग - भाजी का काम पति बाँट ले पत्नी मुस्कुराये तो हँसे चारो अँगना वो ललना देखो खेल रहा, हैं , जो मईया के कँगना || छोटी रीत से बनी प्रीत की पक्की डोर सुखी रोटी स्वामी यूँ खाएँ जैसे घी से है वो सराबोर || आज गृहणी थकी - थकी सी है झले ना जाये उस से पंखा स्वामी बोले ला पगली मैं झल दूँ तेरा पंखा || दो - दो रुपये का हिसाब है कहीं जायदा ना कुछ हो जाये पर ललना के एक मुस्कान पे लाखो ही लूट जाये ये है गृहस्थ जीवन छोटा सा देखो तो समझ ना आये पर छोटे से कुटिया प्रेम का ब्रह्माण्ड समाये || जहां स्वामिनी के कदम लड़खड़ाए वहाँ स्वामी के बाँहें थामे हैं जहाँ स्वामी के कदम लड़खड़ाए वहाँ स्वामिनी हैं आँचल ताने दोनों मिल के बाटते जीवन आधा - आधा आधी - आधी रोटी खा...
- Get link
- X
- Other Apps
"उस पार रहा" मैं प्रतीक्षा में हूँ उस नीर के जो जलते कदमो को शीतल कर जायेगा जो सूखा - सूखा सा पेड़ है वो , हरा - भरा हो जायेगा मैं प्रतीक्षा में हूँ उस दीपक के जो मुझे रौशनी में लाएगा जो छोड़ गया है नाता मुझसे उस परछाई को ले आएगा || मैं प्रतीक्षा में हूँ कृष्णा के जो सुदामा मुझे बनाएंगे मैं रोऊँगा आसूँ मिलन के और वो पीते जायेंगे है कौन कहाँ से आया ये चारो तरफ चीत्कार होगा तभी आएंगे दौरे कृष्णा और हमारा साक्षत्कार होगा सोचो जरा घडी वो किसकी पल्लू कितनी भींगेगी कौन कितना रोयेगा है अनुमान कोइ लगा सकता उस प्रतीक्षा में कितना प्यार होगा || लो सफल हुई प्रतीक्षा मेरी आये कृष्णा गले लगाने को आसूँ मेरे सुख गए है होंठ मेरे सिले से पड़े है रोये कौन और हँसे कौन अब तो मोहन में जी रम गया है रौशनी मांगी थी छाया देखने को ये तो अलौकिक प्रकाश से साक्षात्कार हुआ है इसमें तो मैं ही गुम हूँ छाया कहाँ ठहर पायेगी जो कृष्णा से मिला गले आत्मा शीतल हो जाएगी अब सोचता हूँ कितना मीठा है दोस्ती का वो घड़ा जिसमे बैठे प्रेम गागर - गागर छलका जाये हैं मित्र में इतनी...
- Get link
- X
- Other Apps
"रुको नहीं " अथक प्रयाश जरुरी है तुम पहिया हो ये एक धुरी है वक़्त , वक़्त के साथ गुजर जायेगा ये सुबह भी शाम बन ढल जायेगा तुम रुकना मत तुम थकना मत तुम योद्धा हो तुम वीर हो तुम भारतवर्ष के कर्मवीर हो तुम ज्ञान हो तुम कल हो तुम आज हो तुम विद्यार्थी हो तुम प्रकाश हो || गौरव गाथा भारत की कलमों से ही लिखी गयी कागज हमेसा साक्षी रहा इतिहास बना और छपता गया वो लिखने वाला कोइ और नहीं तुम जैसा ही कोइ ज्ञानी थी वो कलम कहाँ अभिमानी था वो रंग था वो रूप था वो कल था तुम आज हो तुम विद्यार्थी हो तुम प्रकाश हो || ज्ञान दीपक जलता रहा अँधेरा हमेसा छटता रहा हैं अंधेरो को चिरोगे तुम वो बलसाली हो तुम वीर हो तुम धीर हो तुम भारतवर्ष के प्रकाश के रंग तुम इंद्रधनुष के सातो रंग तुम गर्मी में तपती धरती को तृप्त करते नीर हो तुम कल थे तुम आज हो तुम विद्यार्थी हो तुम प्रकाश हो || चलो - चलो अब रुको नहीं चलो अब कही बिश्राम ना करो पैरो के छाले आने - जाने है लेकिन पद चिन्ह तो बनाने है ये पद के लहू जब मिटटी से मिल जायेंगे कोइ कमल -फू...
- Get link
- X
- Other Apps
हमारी भावना और मन की प्रगति की यात्रा || कहा जाता है जैसे भावना हो साईं उसी रूप में दीखते है || अर्थात मन में जहर हो तो जहर दीखता है और अमृत हो तो अमृत दीखता है || हाथ में अगर आग रखोगे दुसरो को जलाने को तो वो आग सबसे पहले आपके हाथो को जलायेगी || मन की भावना भी कुछ ऐसी ही होती है || अगर आपकी मन की भावना सुद्ध नहीं है || तो यकीं मानिये प्रगति आपके लिए नहीं है || एक पल के लिए जरूर लग जाये की हां मैं प्रगति पे हूँ मेरे साथ सब कुछ अच्छा हो रहा है || मैं किसी का बुरा भी सोचूँ तब भी मेरे साथ अच्छा ही होता है || तो ये आपका भ्रम है , क्युकी दिया बुझने से पहले बहोत तेज लौ के साथ जलता है| और फिर बुझ जाता है हमेसा के लिए || ये भ्रम की भावना प्रगति में बाधक होती है || तो भावना को हमेसा सुद्ध रखिये और अपने लक्ष्य में रखिये || थक गए हैं तो दो कदम पीछे लेले || लेकिन दुसरो की बुराई ना करे | खुद की कमिया देखे या कहे की खुद को और बेहतर कैसे बनाये ये देखे | अपनी भावना में प्रेम लाये | अच्छे बिचार लाये | प्रगतिशील विचार लाये तो जीवन सुखमय होगा || एक किसान था वो रोज खेतो मे...
- Get link
- X
- Other Apps
अतीत में झांके या भविस्य में अतीत में झांके या भविस्य में ये एक बहुत बड़ा प्रश्न है | क्युकी अतीत पीछा नहीं छोड़ता और भविस्य आस नहीं छोड़ता || अतीत में झाके तो क्या मिलेगा पहला : अगर आपका जीवन अच्छा गुजरा है तो सुखद पल मिलेंगे दूसरा : अगर आपका जीवन अच्छा नहीं गुजरा तो दुखद पल मिलेंगे सुखद पल मिले तो क्या होगा | आपकी मुस्कराहट बनी रहेगी | लेकिन अगर दुखद पल हुए तो क्या होगा आपकी कड़वाहट बनी रहेगी | सिख लेने के लिए पुराने पल में जा सकते है | लेकिन क्या ये जरुरी है की कल का गुजरा फिर से आएगा अगर नहीं || तो जहाँ सबकुछ बदल रहा है वहाँ ये पुराने किस्से काम आएंगे | सायद नहीं | तो अगर झाकना है अतीत में तो अपने अच्छे पल में झाकिये | वहां जाकर कुछ सुधार मत कीजिये | बस मुस्कुराते हुए वापस आ जाईये || और भविष्य के गर्भ में समाई शक्तियो को समेटिये || सब आपका ही है , सब हमारा ही है || भविस्य में झाकना नई ऊर्जा देगा | नई सोच देगा नए अच्छे लोग देगा कुछ सच्चे दोस्त मिलेंगे || नया हौसला मिलेगा नए रस्ते मिलेंगे तो कोइ पुरानी गलियों में क्यू जाये | निम् के पुराने पेड़ के पास जाके आम के फ...
- Get link
- X
- Other Apps
जमीनी ज्ञान हो तो फिर से जमीं से जुड़ा जा सकता है बीज के रूप में ही सही फिर से पेड़ बन खड़ा हुआ जा सकता है आँधिया तो आएँगी जड़ो के मुक़दर को मजबूत किया जा सकता है बीज के रूप में ही सही फिर से पेड़ बन खड़ा हुआ जा सकता है || उमड़ते हुए सैलाब को भी मोड़ा जा सकता है अगर हौसले बुलंद हो तो पर्वत को भी तोडा जा सकता है बीज के रूप में ही सही फिर से पेड़ बन खड़ा हुआ जा सकता है || शून्य से जीवन ले कर आगे बढ़ा जा सकता है धारा कीमती है आँसुओ की खुसी के लिए इन्हे बचा के रखे किस्मत को किसी पल भी मोड़ा जा सकता है || जहाँ खोने का गम न हो वहाँ पाने की लालसा जायदा होती है इस लालसा को जिद की माला में पिरोया जा सकता है बीज के रूप में ही सही फिर से पेड़ बन खड़ा हुआ जा सकता है || अगर लेखक बनो खुद के कहानी के तो अभिनेता तुम ही होंगे नेता तुम ही होंगे एक अभिनेता बन खुद से खेला जा सकता है एक नेता बन खुद को संभाला जा सकता है बीज के रूप में ही सही फिर से पेड़ बन खड़ा हुआ जा सकता है || प्रिया मिश्रा :)
- Get link
- X
- Other Apps
आसमान में बादल और इंद्रधनुष दोनों होते है लेकिन पहले नजर इंद्रधनुष पे जाती है क्युकी वो रोज नहीं दीखता लेकिन बादल बरसता है तभी इंद्रधनुष दीखता है ये सच है बादल रोज बरसता है लेकिन हर बून्द से इंद्रधनुष नहीं बनता जिस से बनता है वो बिखर जाता है और सुरु होती है एक नई कहानी इंद्रधनुष की कहानी || प्रिया मिश्रा :)
- Get link
- X
- Other Apps
| वर्तमान समय | वर्तमान समय ऐसा है जैसे कोइ कल्पना ना की हो की बादल छायेंगे मगर दौर आँधियो का चलने लगा है || ज़रा सी बूंदा - बाँदी है | अभी मेघ बरसा भी नहीं और दौर मंदियो का चलने लगा है || सोचा ना था कल का पाला पंछी खुद को मुँह चिढ़ाएगा और एक वक़्त मेरे पैरों में भी बेड़िया लाएगा || ये घरो में बैठ के जरा अच्छा नहीं लगता बच्चो को कल क्या खिलाऊंगा ये चिंता सताते रहती है || बीवी से जो अब तक सिर्फ सन्देश हुआ करते है अब उनके हाथो का शंदेश खाते है ये वक़्त भी कभी - कभी कितने मीठे हो जाते है || बेटी के पायलो की छुन - छुन से संगीत सा बजता है बेटे को जिम्मेदारियों में लेना भी अच्छा लगता है || देखता हूँ कितना संस्कार भरा है इन नई पीढ़ियों में माँ - बाप का हाथ पूरा - पूरा लगता है || ये पुराने बरगद की छाँव में नए कोपल भी सयाने हो गए है || मेरे बच्चे अपने दादा- दादी के आँगन में कितने फल - फूल गए है || अच्छा नहीं है ये पिंजरे का जीवन मगर अपनों के साथ कुछ पल भी अच्छा लगता है || प्रिया मिश्रा :)
- Get link
- X
- Other Apps
" मदर्स डे " ये मदर्स डे पे अच्छी - अच्छी कविताये कितनी अच्छी लगती है ना | माँ के साथ की एक फोटो ली और सोशल - मिडिया पे साँझा कर दिया | वहाँ निचे चार लाने डाल दी मेरी माँ सबसे अच्छी माँ है | मेरी माँ की आँखों में मैं मुस्कुराता हूँ जब मुस्कुराती है माँ मैं जन्नत पा जाता हूँ | और भी अच्छी लाईने है | लेकिन क्या आपने देखा है सच में अपनी माँ को दिल से मुस्कुराते हुए | कभी देखा है उनकी उम्र को गुजर जाते हुए | कभी देखा है उनके मन की पीड़ा | कभी सुनी है उनकी अनकही कहानी | कभी झाँका है उनके मन में | कभी उनकी करवटो को गिना है | कभी एक पल सुकून से जाके बैठ के पूछा है माँ रहने दे ये सब बताओ आप कैसे है | शायद नहीं | हम अपनी दुनिया में इतने व्यस्त है की हमें ये तक नहीं पता की लास्ट टाइम हमने अपनों से बात कब की थी | और अगर कर भी ली तो अपनी लेके बैठ गए | माँ ये चल रहा है, वो चल रहा है | | और माँ सुन के कहती है कोइ नहीं बेटा सब ठीक हो जायेगा और जब ठीक हो जाता है तो बेटा या बेटी खुद फिर से बिजी हो जाते है || फिर आता है मदर्स डे और माँ के साथ की ली गयी एक तस्बीर उठाते है और साँझा कर देत...
- Get link
- X
- Other Apps
हाँ , बिलकुल | ये गुण है मुझमे लेकिन माता रानी की कसम कभी घमंड नहीं किया | अरे ये तो मेरी पहली लाइन पढ़ के ही हसने लगे | देखिये मित्र और सहेली आपकी मुस्कान की चमकार में झोल है | कल रात को पालक खाया था | दाँतों में लगा हुआ है | ये ज़िग - ज़ैग वाला ब्रश नहीं करते क्या | कोइ ना | हम करते है लेकिन टूथ ब्रश की कसम कभी घमंड नहीं किया | मेरे टूथ पेस्ट में तो हल्दी और नमक भी है ,सच्ची तभी तो मेरे दाँत सोने जैसे पिले दीखते है | दाँतो की कसम सबने कहा आपके दाँत तो बड़े पिले है | हमने बत्तीसी अपनी दिखा दी लेकिन कभी घमंड नहीं किया | अब क्या करे हमारा दिल ही कुछ ऐसा है | सबकुछ सुन के घोल के पी जाता है | और पिए भी क्यों ना ये कोइ दारू थोड़े है जो बंद हो जाएगी , लोगो के ताने हैं , काने भी मार के जायेंगे | लेकिन तुम भी कभी घमंड मत करना | हम क्या अपनी थाली में ताने खाते है नहीं ना तो दिल में क्यों रखे उसके मुँह पे ना मार के आये जिसने हमें दिया है | ये मेरा ख्याल है लेकिन आप हिंसा ना करे | अपनी मुँह में पानी भर के उसको पूरा झाग बनाये फिर उसके मुँह पे डाल आये , लेकिन ध्यान रहे उसके ह...
- Get link
- X
- Other Apps
"मेरा सबसे अच्छा दोस्त " मेरा सबसे अच्छा दोस्त मेरा दर्पण है | जिसमे मैं खुद को बेझिझक देख सकती हूँ | मेरा सबसे अच्छा दोस्त मेरी मंजिल है | जहाँ पहुँचने से पहले मेरे पाँव के छाले मुझे नहीं दीखते | मेरा सबसे अच्छा दोस्त मेरा बिश्वाश है | मेरा सबसे अच्छा दोस्त मेरे जीवन की सबसे अच्छी कविता है | जिसके एक- एक शब्दों से प्रेरणा लेती हूँ मैं और आगे बढ़ती जाती हूँ | मेरा सबसे अच्छा दोस्त मेरा सलाहकार है | मेरी मुस्कराहट है | थोड़े शब्दों में मेरा सबसे अच्छा दोस्त मेरी आत्मा है || प्रिया मिश्रा :)
- Get link
- X
- Other Apps
"कॉरोना " कॉरोना को न्यूज़ में ही रहने दो इसे जीवन में ना लाओ || ये डरने की चीज नहीं हमने तो तुफानो से खेला है ये तो बेकार का झमेला है दिलो में प्यार लावो और थोड़ा सा दूरियाँ बढ़ाओ लॉकडाउन के नियम अपनाओ हाथो को धोओ साफ़ से ज़रा सी समझदारी अपनाओ ये नियम तोड़ के बेवकूफों के सहंसा ना कहलावो || सुनो मेरे भईया सुनो मेरी दीदी सुनो मेरे चाचा सुनो मेरी चाची रह लो कुछ दिन घरो में कुछ दिन तो साँस लो जरा मॉल कम घूमो पूजा - पाठ में मन लगावो प्रभु नाम है सबसे सच्चा समझे सयाने बच्चा कॉरोना - कॉरोना मत चिल्लाओ राम - राम जपो क्युकी , ज्ञानियों ने कहा है जो सोचा वो होवत है हर आदमी की सोच हर आदमी का भाग्य बनाती है छोटी सोच और पैर में मोच कभी सफलता नहीं दिलाती है सोचो नहीं की कोरोना भारी है सोचो की हम है जिसके भक्त नाम उनका हनुमान जो करते सबकी छुट्टी राक्छ्सी हो या कोइ सैतान ये कोरोना तो फिर भी बे सकल का है हमने तो सूपनखा के भी नाक काटे है तो हम जीते वो हारेगा ये कोरोना जल्द ही भागेगा || प्रिया मिश्रा :)
- Get link
- X
- Other Apps
सोचती थी मैं सोचती थी मैं भी कुछ ऐसा मिले कोइ पानी जैसा कहूं उस से सबकुछ अपना घुल जाये उसमे चीनी जैसा || रोज - रोज मैं मंदिर जाती कहती भगवन दे दे एक साथी भगवान् ने सुन ली मेरी मिली सच्ची सहपाठी वो पानी सी सीतल मैं चीनी सी मीठी बातें हमारी घुल जाती ना वो कुछ कहती न मैं कुछ कहती मैं दिया और वो बाती || बिस्वाश की डोर है दोस्ती ना तोड़ो चटकाए जो टूटे ना गाँठ बने आदमी ही मर जाये || दिल टूटे तो आस टूटे आस टूटते तो बिश्वाश बिश्वाश टूटे तो कुछ ना बचे सब दरिया में जाये || दरिया - दरिया बहता वो समंदर में मिल जाये बून्द - बून्द मीठा सा जल खारा होता जाये || बिश्वाश की नीव मत तोड़िये चाहे तोड़िये टाँग हड्डिया फिर भी जुट जाएँगी बिस्वाश है फूल सामान || जो टूटे तो सुख ही जाये फिर ना खिले चाहे जितना भी रखो उसका ध्यान || प्रिया मिश्रा :)
- Get link
- X
- Other Apps
प्रिया शब्द कविता में कहानी कहानी में मैं मुझमे भाव भाव में प्रेम प्रेम में समर्पण समर्पण में बिस्वाश बिश्वाश में प्रेरणा प्रेरणा में प्रकाश प्रकाश में ज्ञान ज्ञान में चेतना चेतना में अनुभव अनुभव में सिख सिख में कुछ नया कुछ नए में कुछ पुराना कुछ पुराने में खिचड़ी खिचड़ी में दाल दाल से सांभर सांभर से साउथ साऊथ से रजनीकांत रजनीकांत से हीरो हीरो से हीरोइन हीरोइन से फिल्म फिल्म में एक कहानी कहानी में एक कविता कविता में भाव भाव में शब्द शब्द में प्रिया प्रिया मिश्रा :)
- Get link
- X
- Other Apps
मैं लेखक हूँ मैं प्रकाश हूँ जो राह दिखाए जन - जन को मैं कण - कण में फैला वो बिश्वाश हूँ || मैं लेखक हूँ मैं प्रकाश हूँ || मेरे एक शब्द में हजार किरणे है मेरे एक किरणों में लाखो दिए सा प्रकाश जो राह दिखाए मेरी लेखनी टीके जिसपे मेरा बिश्वाश वो बिश्वाश बन जाये कविता , कविता बन जाये एक एहसास मैं एक एहसास हूँ मैं लेखक हूँ मैं प्रकाश हूँ || बड़े नाजुक से है शब्द मेरे उठाये पर्वत सा हिर्दय का तूफ़ान हर तूफ़ान में एक क्रांति है हर क्रांति में एक कहानी मैं कहानी बन इतिहास बनाऊ मैं क्रांति बन परिवर्तन लाऊँ मैं कहानी हूँ मैं इतिहास हूँ मैं क्रांति हूँ मैं परिवर्तन हूँ मैं लेखक हूँ मैं प्रकाश हूँ || मेरे पन्नों पर ही शहर बस्ता मेरे पन्नों पर ही मोटर चलती मेरे पन्नों में ही गाँव बस्ता मेरे पन्नों पर ही वो अल्हड़ सी गाँव की मस्ती मेरे पन्नों पर बस्ता पूरा समाज मैं शहर हूँ मैं गाँव हूँ मैं पूरा समाज मैं समाज की काया हूँ मैं लेखक हूँ मैं प्रकाश हूँ || मैं उगाता घास कलम से मैं जंगल को कागज पे लाता मेरे कलम से ढलता सूर...