अब  मैं सोचता हूँ  तेरी आँखों को अपना घर बना लूँ
कहाँ अब मैं कोइ सफर तय कर पाता हूँ
चलता हूँ कही और , राह भूल तेरी आँखों में खो  जाता हूँ ||

प्रिया मिश्रा :)
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हम इतनी नादानियों के बाद भी
फल - फूल रहे है
हमारे कर्मो का लेखा - जोखा नरमी से लिया जा रहा है
बस यही दिखता है  की , माँ का हिर्दय कितना बड़ा है

प्रिया मिश्रा
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ये ख्यालो में खोने का सिलसिला पुराना हो गया है
चलो कुछ नए दोस्त बनाते है
चलो फिर से मुस्कुराते है
कौन जाने हमारी मुस्कराहट किसी की जान हो जाये
किसी  अजनबी की मुस्कराहट हमारी वजह से खिल जाये
चलो  किसी की मुस्कराहट बन जाये
ये रोना - धोना बहोत हुआ
चलो कुछ नए दोस्त बनाये ||

प्रिया मिश्रा :)
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 बहोत सारी बातें तुमसे करनी है
चलो आज आँखों से कुछ बाते हो जाये
शब्दों का सिलसिला कभी और होगा

प्रिया मिश्रा :)
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मैं खुली आँखों से सपने देखती हूँ
कुछ जायदा नहीं
एक रोटी और एक चादर देखती हूँ
मैं तारो की बारात नहीं देखती
मैं तारो में भी भूखे  बच्चे देखती हूँ
प्रिया मिश्रा :)
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 बड़ा पाप है उसके मन में जिसके मन में कोइ पाप नहीं
ऐसा लोग कहते है ,
क्युकी वो खुद को
उसके मन के आईने में देखा  करते है ||

प्रिया मिश्रा :)
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इस बुरे वक़्त में जहाँ सबकुछ बंद पड़ा है
दिल को खोले लीजिये
अभी वक़्त है पाप कम करने का
मन में गंगाजल लीजिये
कुछ औरो पे छिड़किये कुछ खुद  पे
और कर दीजिये पवित्र खुद को और औरो को भी
की , अभी जरुरी है प्यार निभाना
सड़को पे अब भी भूक मर रही है , भूख से
और प्यास को एक बून्द पानी दीजिये
दिल को खोल लीजिये
अभी वक़्त है पाप कम करने का मन में गंगाजल लीजिये ||

प्रिया मिश्रा :)
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 ये हकीकत है की मैं आदमी हूँ
लेकिन ना में जिन्दा हूँ
ना मैं मरा हुआ हूँ
मैं बस अँधा हूँ
मैं बस गूँगा हूँ
ये हकीकत है की मैं आदमी हूँ
लेकिन ना मैं  जिन्दा हूँ
ना मैं मरा हुआ हूँ
प्रिया मिश्रा :)

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