अवसाद क्या है
अवसाद या डिप्रेशन एक मनोविज्ञानिक रोग है | इसमें इंसान खुद को बेकार और लाचार महसूस करता है |
इसके कई कारण हो सकते है
१) घर के माहौल का बचपन से खराब होना | माँ - पिता की लापरवाही ||
२) लगातार किसी चीज में हार का सामना करना ||
३) प्रताड़ना , अकारण छींटाकशी
४) अचानक किसी चीज का लॉस
५) अचानक किसी व्यक्ति का बुरा व्यवहार ||
६) और भी कई अनुवांशिक कारण हो सकते है ||
बचा कैसे जाये
हमें प्रश्नो के साथ ही उत्तर पे खोजना शुरू कर देना चाहिए |
१) अपने आस - पास के लोगो का ध्यान रखे | जैसे की अपने दोस्त , माँ - पापा , आपके बच्चे , आपके भाई - बहन और आपके कोइ और करीबी ||
२) कोइ हार जाता है या लगातार हारता है किसी चीज को लेके तो उसे हर समय प्रताड़ित ना करे ||
३) अगर किसी व्यक्ति में कुछ अजीब सा बदलाव दिखे , जैसे की
कोइ बोलता व्यक्ति अचानक से चुप रहना सुरु कर दे
या कोइ रोते रहे हर वक़्त
या अधिक गुसा का आना
तो ऐसे व्यक्ति के प्रति अपनी संवेदना बढ़ा दे ||
ऐसा व्यक्ति अवसाद अर्थात डिप्रेशन का शिकार हो सकता है ||
कभी - कभी रोज हसने वाला व्यक्ति भी अचानक से लॉस के कारन अपना आप खो सकता है |
तो ऐसे व्यक्तियों पे ध्यान दे ||
एक और ध्यान देने वाली बात है | हम जब भी ऐसे व्यक्तियों से मिलते है | हम अचानक से बोल देते है|
अपना इलाज करवा तुम्हे दिमागी प्रॉब्लम है कृपया ऐसा ना करे | क्युकी हर दिमाग हर चीज को वैसे ही नहीं सोचता जैसा आप सोचते है |
सही उपचार तो यह है की
१) बचपन से बच्चो पर ध्यान दे | कुछ भी ऐसा ना करे जिस से की उनका बचपना मर जाये |
२) अगर कोइ व्यक्ति आपकी सोच से अलग कुछ करना चाहता है तो उसे एक मौका जरूर दे |
३) किसी के साथ बेवजह हार्ड ना हो |
४) लोगो का सम्मान करे और अपने बच्चो में ये सब आदते डाले ||
५) लोगो से बात करे | और उन्हें सिर्फ सुनाये नहीं उनकी सुनी | कभी - कभी हमें कोइ सुन ले तो हमारी वीमारी चली जाती है |
६) कोइ ऐसी बात ना कह दे किसी को गुस्से में आकर की वो किसी के मौत का कारन बन जाये |
७) ऐसे व्यक्तियों के साथ नरमी से पेश आये ||
अभी के वक़्त में किसी को अकेला ना छोड़े | आज कल वक़्त ही ऐसा हैं सबको किसी न किसी की जरुरत है ||
७) योग और मैडिटेशन जरूर अभ्यास करे |
८) अपनी समस्याओ को लिखना सीखे |
१०) हरेक प्रश्न का हल हमारे पास है ढूंढ़ने की जरुरत है ||
मैं सबसे जायदा इस बात पे हमेशा ध्यान देती हूँ या सबका ध्यान दिलाना चाहती हूँ की कृपया कर अपने घर का माहौल जितना हो सके अपने बच्चो के सामने अच्छा रखे |
हर बात का जवाब लड़ाई नहीं | अपने घमंड को परे रख के भी सोचा जा सकता है | आपका घमंड किसी के जान से बढ़कर नहीं है ||
तो कृपया कर अपने बच्चो पे ध्यान रखे और उन्हें इतना सक्षम बनाये की वो लाइफ में डिसिशन लेना सीखे || उसपे खुद को थोपे नहीं | बल्कि उनके साथ कदम से कदम मिला कर चले |
किसी की जिंदगी आपके अभिमान से जायदा और बहोत ज्यादा बड़ी है ||
सबके साथ मिल के रहे खुस रहे | आपने आप को अपने करीबी लोगो के साथ बाटना सीखे |
और कोइ आपसे खुद को बातें करना चाहे तो उसे टाले नहीं | हो सकता है आप उसके लास्ट होप हो |
सो , मदद करे | मदद ले | बिश्वाश करे | अन्धविश्वाश में ना फसे | सबका और अपना ध्यान रखे ||
बढ़ता अवसाद एक वीमारी नहीं | आपके अपने किसी करीबी का दोस्त ना बन उसको आपसे छीन भी सकता है || तो आप इतना करीब हो जाये अपने दोस्तों की एक घेरा बने एक सुरक्षा कवच दोस्ती का ||
साथ दे |
साथ ले |
साथ निभाना सीखे और सिखाएं ||
जय हिन्द ||
प्रिया मिश्रा :)
अवसाद या डिप्रेशन एक मनोविज्ञानिक रोग है | इसमें इंसान खुद को बेकार और लाचार महसूस करता है |
इसके कई कारण हो सकते है
१) घर के माहौल का बचपन से खराब होना | माँ - पिता की लापरवाही ||
२) लगातार किसी चीज में हार का सामना करना ||
३) प्रताड़ना , अकारण छींटाकशी
४) अचानक किसी चीज का लॉस
५) अचानक किसी व्यक्ति का बुरा व्यवहार ||
६) और भी कई अनुवांशिक कारण हो सकते है ||
बचा कैसे जाये
हमें प्रश्नो के साथ ही उत्तर पे खोजना शुरू कर देना चाहिए |
१) अपने आस - पास के लोगो का ध्यान रखे | जैसे की अपने दोस्त , माँ - पापा , आपके बच्चे , आपके भाई - बहन और आपके कोइ और करीबी ||
२) कोइ हार जाता है या लगातार हारता है किसी चीज को लेके तो उसे हर समय प्रताड़ित ना करे ||
३) अगर किसी व्यक्ति में कुछ अजीब सा बदलाव दिखे , जैसे की
कोइ बोलता व्यक्ति अचानक से चुप रहना सुरु कर दे
या कोइ रोते रहे हर वक़्त
या अधिक गुसा का आना
तो ऐसे व्यक्ति के प्रति अपनी संवेदना बढ़ा दे ||
ऐसा व्यक्ति अवसाद अर्थात डिप्रेशन का शिकार हो सकता है ||
कभी - कभी रोज हसने वाला व्यक्ति भी अचानक से लॉस के कारन अपना आप खो सकता है |
तो ऐसे व्यक्तियों पे ध्यान दे ||
एक और ध्यान देने वाली बात है | हम जब भी ऐसे व्यक्तियों से मिलते है | हम अचानक से बोल देते है|
अपना इलाज करवा तुम्हे दिमागी प्रॉब्लम है कृपया ऐसा ना करे | क्युकी हर दिमाग हर चीज को वैसे ही नहीं सोचता जैसा आप सोचते है |
सही उपचार तो यह है की
१) बचपन से बच्चो पर ध्यान दे | कुछ भी ऐसा ना करे जिस से की उनका बचपना मर जाये |
२) अगर कोइ व्यक्ति आपकी सोच से अलग कुछ करना चाहता है तो उसे एक मौका जरूर दे |
३) किसी के साथ बेवजह हार्ड ना हो |
४) लोगो का सम्मान करे और अपने बच्चो में ये सब आदते डाले ||
५) लोगो से बात करे | और उन्हें सिर्फ सुनाये नहीं उनकी सुनी | कभी - कभी हमें कोइ सुन ले तो हमारी वीमारी चली जाती है |
६) कोइ ऐसी बात ना कह दे किसी को गुस्से में आकर की वो किसी के मौत का कारन बन जाये |
७) ऐसे व्यक्तियों के साथ नरमी से पेश आये ||
अभी के वक़्त में किसी को अकेला ना छोड़े | आज कल वक़्त ही ऐसा हैं सबको किसी न किसी की जरुरत है ||
७) योग और मैडिटेशन जरूर अभ्यास करे |
८) अपनी समस्याओ को लिखना सीखे |
१०) हरेक प्रश्न का हल हमारे पास है ढूंढ़ने की जरुरत है ||
मैं सबसे जायदा इस बात पे हमेशा ध्यान देती हूँ या सबका ध्यान दिलाना चाहती हूँ की कृपया कर अपने घर का माहौल जितना हो सके अपने बच्चो के सामने अच्छा रखे |
हर बात का जवाब लड़ाई नहीं | अपने घमंड को परे रख के भी सोचा जा सकता है | आपका घमंड किसी के जान से बढ़कर नहीं है ||
तो कृपया कर अपने बच्चो पे ध्यान रखे और उन्हें इतना सक्षम बनाये की वो लाइफ में डिसिशन लेना सीखे || उसपे खुद को थोपे नहीं | बल्कि उनके साथ कदम से कदम मिला कर चले |
किसी की जिंदगी आपके अभिमान से जायदा और बहोत ज्यादा बड़ी है ||
सबके साथ मिल के रहे खुस रहे | आपने आप को अपने करीबी लोगो के साथ बाटना सीखे |
और कोइ आपसे खुद को बातें करना चाहे तो उसे टाले नहीं | हो सकता है आप उसके लास्ट होप हो |
सो , मदद करे | मदद ले | बिश्वाश करे | अन्धविश्वाश में ना फसे | सबका और अपना ध्यान रखे ||
बढ़ता अवसाद एक वीमारी नहीं | आपके अपने किसी करीबी का दोस्त ना बन उसको आपसे छीन भी सकता है || तो आप इतना करीब हो जाये अपने दोस्तों की एक घेरा बने एक सुरक्षा कवच दोस्ती का ||
साथ दे |
साथ ले |
साथ निभाना सीखे और सिखाएं ||
जय हिन्द ||
प्रिया मिश्रा :)
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