सुनो शिव
सुनो शिव अब तांडव करो
तुम्हारी भक्त तुम्हे पुकारती है
खोल लो अपनी जटाओं को
की अब भक्त पे चिंता भारी है
अब बहोत पुकारा उसने तुमको
की अब तुम्हारी बारी है ||
कब तक वो चुप रहेगी
कब तक वो सहती रहेगी
कभी तो तुम्हे पिघलना होगा
कभी तो भक्त की पुकार पे
भगवान् को भी उतरना होगा ||
डम -डम -डम डमरू बाज रहे
तांडव अब तो होना होगा
सुनो शिव,
पुकार रही भक्त तुम्हारी
अब तो तुम्हे उतरना होगा
कोइ वरदान तो देना होगा
कब तक वो अंधेरो में रहे
कब तक वो प्यासी रहे
अब चाँद को भेजो
रौशनी लाये
जटाओं को खोलो गंगा लावो
अब तो तुम्हे पिघलना होगा
सुनो शिव
पुकार रही भक्त तुम्हारी
अब तो तुम्हे उतरना होगा ||
तुम कैलाश आवोगे
या मैं पत्थर की बन जाऊँ
तुम प्रीत की रीत निभाओगे
या मैं वैरागी बन जाऊँ
मैं शिवा नहीं हूँ
न मैं शिव हूँ
मैं भक्त हूँ
मैं कैसे तपस्या में साध्वी बन जाऊँ
क्या तुम्हे स्वीकार होगा
मेरा अपमान
क्या तुम्हे नहीं छू जायेगा
मेरे प्रेम का तिरस्कार
तो उठो शिव
अब त्रिशूल का प्रहार करो
अब ना मुझे निराश करो
अब भेजो अपने गड़ो को
उनको मेरा सत - सत नमस्कार रहा
मैं बड़ी पीड़ा में हूँ
मेरा ना कोइ अब अधिकार रहा
मैं बंदी हूँ
मैं बांदी हूँ
मैं दाशी सा जीवन जीने की नहीं आदि हूँ
फिर क्यों मुझपे ये वार हुआ
क्यों मेरा तिरस्कार हुआ
क्यों ना तुम्हारे मन में भी चीत्कार हुआ
कैसे सुन पाए तुम एक भक्त की पीड़ा
क्या वो भी एक बिष था
हे नीलकंठ
अब परीक्षा और ना बढ़ाओ
सुनो शिव
अब आ जाओ
तो उठो शिव
अब त्रिशूल का प्रहार करो
अब ना मुझे निराश करो ||
मैं रो - रो के तुझे पुकार रही
मेरा रोम - रोम पीड़ा में डूबा
मैं तुम्हे प्रणाम कर रही
मैं कैलाश ना आ पाऊँगी
लेकिन जो तुम ना आये
मैं पत्थर की हो जाउंगी
तब कैसे तुम कह पावोगे
तुम भोले हो
तुम शिव हो
क्या भक्त को
नहीं बचाओगे
मेरा प्रेम है रूठा
मेरा कर्म पानी - पानी होता जा रहा
तिरष्कार की अंधियारे में
मेरा अस्तित्वा है मिटा जा रहा
अब देर ना करो
आ जाओ
अब त्रिशूल का प्रहार करो
अब तुम्हे मुझे सुनना ही होगा
या तो मिटा दो मेरे अंधकारो को
या तो मुझे पत्थर बना कैलाश पे सजा देना
एक भक्त की पुकार पे
इतनी दया तो दिखा देना
सुनो शिव
अब आ जाओ
अब सुन लो मेरी पुकार
मैं रोम - रोम से हारी हूँ
कर दो मेरा उद्धार ||
भक्ति की पुकार सुनो
तो आ जाओ
हे शिव आ जाओ
अब बहोत पुकारा उसने तुमको
की अब तुम्हारी बारी है ||
प्रिया मिश्रा :)
सुनो शिव अब तांडव करो
तुम्हारी भक्त तुम्हे पुकारती है
खोल लो अपनी जटाओं को
की अब भक्त पे चिंता भारी है
अब बहोत पुकारा उसने तुमको
की अब तुम्हारी बारी है ||
कब तक वो चुप रहेगी
कब तक वो सहती रहेगी
कभी तो तुम्हे पिघलना होगा
कभी तो भक्त की पुकार पे
भगवान् को भी उतरना होगा ||
डम -डम -डम डमरू बाज रहे
तांडव अब तो होना होगा
सुनो शिव,
पुकार रही भक्त तुम्हारी
अब तो तुम्हे उतरना होगा
कोइ वरदान तो देना होगा
कब तक वो अंधेरो में रहे
कब तक वो प्यासी रहे
अब चाँद को भेजो
रौशनी लाये
जटाओं को खोलो गंगा लावो
अब तो तुम्हे पिघलना होगा
सुनो शिव
पुकार रही भक्त तुम्हारी
अब तो तुम्हे उतरना होगा ||
तुम कैलाश आवोगे
या मैं पत्थर की बन जाऊँ
तुम प्रीत की रीत निभाओगे
या मैं वैरागी बन जाऊँ
मैं शिवा नहीं हूँ
न मैं शिव हूँ
मैं भक्त हूँ
मैं कैसे तपस्या में साध्वी बन जाऊँ
क्या तुम्हे स्वीकार होगा
मेरा अपमान
क्या तुम्हे नहीं छू जायेगा
मेरे प्रेम का तिरस्कार
तो उठो शिव
अब त्रिशूल का प्रहार करो
अब ना मुझे निराश करो
अब भेजो अपने गड़ो को
उनको मेरा सत - सत नमस्कार रहा
मैं बड़ी पीड़ा में हूँ
मेरा ना कोइ अब अधिकार रहा
मैं बंदी हूँ
मैं बांदी हूँ
मैं दाशी सा जीवन जीने की नहीं आदि हूँ
फिर क्यों मुझपे ये वार हुआ
क्यों मेरा तिरस्कार हुआ
क्यों ना तुम्हारे मन में भी चीत्कार हुआ
कैसे सुन पाए तुम एक भक्त की पीड़ा
क्या वो भी एक बिष था
हे नीलकंठ
अब परीक्षा और ना बढ़ाओ
सुनो शिव
अब आ जाओ
तो उठो शिव
अब त्रिशूल का प्रहार करो
अब ना मुझे निराश करो ||
मैं रो - रो के तुझे पुकार रही
मेरा रोम - रोम पीड़ा में डूबा
मैं तुम्हे प्रणाम कर रही
मैं कैलाश ना आ पाऊँगी
लेकिन जो तुम ना आये
मैं पत्थर की हो जाउंगी
तब कैसे तुम कह पावोगे
तुम भोले हो
तुम शिव हो
क्या भक्त को
नहीं बचाओगे
मेरा प्रेम है रूठा
मेरा कर्म पानी - पानी होता जा रहा
तिरष्कार की अंधियारे में
मेरा अस्तित्वा है मिटा जा रहा
अब देर ना करो
आ जाओ
अब त्रिशूल का प्रहार करो
अब तुम्हे मुझे सुनना ही होगा
या तो मिटा दो मेरे अंधकारो को
या तो मुझे पत्थर बना कैलाश पे सजा देना
एक भक्त की पुकार पे
इतनी दया तो दिखा देना
सुनो शिव
अब आ जाओ
अब सुन लो मेरी पुकार
मैं रोम - रोम से हारी हूँ
कर दो मेरा उद्धार ||
भक्ति की पुकार सुनो
तो आ जाओ
हे शिव आ जाओ
अब बहोत पुकारा उसने तुमको
की अब तुम्हारी बारी है ||
प्रिया मिश्रा :)
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