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 आँखों में दीपक जलाने होंगे तब कहीं दिखेगा .......... किसी के होठों पे सबेरा ....... . आशिता तिवारी :))
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 लोकडाउन के दौरान बच्चो का बिकास कैसे संभव है   इस कोरोना काल में ..हमारे बच्चे स्कूल नहीं जा रहे | इन छुटियों के दिनों को कैसे उपयोगी  बनाये अपने बच्चों के लिए ............ आईये जानते है मेरे नए ब्लॉग में ........... सबसे पहले तो ..............आप सभी का बहोत -बहोत धनयवाद ......मेरे ब्लॉग को इतना पसंद करने के लिए .............यदि आप लोगो को मेरे ये ब्लॉग पसंद आये तो कमेंट जरूर करे || धनयवाद ||    बच्चो की शिक्षा  को 3 व्यापक श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है: शैक्षणिक, मनोरंजक और सामाजिक।   संतुलित विकास तब होता है जब वहाँ होता है शारीरिक, मानसिक और शैक्षिक के बीच संगतता    हम सभी इन तीनो में सामंजस्य अपने घर में भी बैठा सकते है .........................कुछ समय सारणी बना के .................या ऐसा करे हम की ...........खेल -खेल में बच्चो को पढ़ाना सुरु करे .........ये सायद हमारे लिए और हमारे बच्चो के लिए भी काफी अच्छा अनुभव रहेगा .         हम इसे एक क्रायक्रम की तरह कर सकते है ..........अपने आस -पास के बच्चो को इकठ्...
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  बच्चो का जीवन और माता पिता का उनके जीवन में  योगदान     कभी -कभी हम हम अपने भागते हुए जीवन को देख के खुद ही थक जाते है ..............तो सोचिये ये बच्चे कितने थक जाते होंगे | स्कूल का प्रेसर , होमवर्क , कम्पटीशन , और उसपे हमारा उनके उम्र के बच्चो के साथ कम्पायर करना ||  ये सच है की हर माता पिता अपना बचपन अपने बच्चो में जीते है ...................अपना पूरा जीवन उनके लिए नेवछावर कर देते है ...............उनकी खुसी में अपनी खुसी देखते है ..................लेकिन क्या ये आजकल की बच्चो की और हमारे नई जेनरेशन को डिप्रेशन में जाते हुए देख ..........ये सारी बाते बेमाने नहीं लगती है || लगता नहीं है ....की ....हम कही चूक रहे है .........कोइ भूल हो रही है हमसे .........हम या तो बहोत पीछे जी रहे है अपना जीवन,, या फिर बहोत आगे जी रहे है ..............और हमारे बच्चे कही बिच में छूट गए है | हमने ये दिखाने के लिए की हम बच्चो की फ़िक्र करते है ..........या उनके लिए सब कर रहे है .............हमने खुद ही अपने बच्चो और अपने मध्य एक दीवार बना रखा है | आज करोड़ो की भीड़ में हमारा ब...
  सफलता और असफलता     सफलता और असफलता एक समय है ...........गुजर जाता है |  आप अगर अपने जीवन में बार -बार असफल हो रहे है ............लेकिन प्रयाश जारी है तो यकीं मानिये आप वास्तव में विजेता है ............जिसमे कोइ कमी नहीं है बस वक़्त के हाथो मजबूर है || ये लाइन मैं अपने लिए लिखती थी ...........और दीवाल पे लगा देती थी ...........लेकिन मैं एक और लाइन लिखती थी,, की .......... कहाँ कमी रह गयी ? | कभी -कभी हम जरा सी चूक से .........पीछे रह जाते है और वही गलतियां बार -बार अनजाने में दुहराते है हमें खबर नहीं होती लेकिन सब कुछ पहल जैसा ही होता है और फिर हार का सामना हमें करना पड़ता है ||  मैं १० बार मेडिकल के एग्जाम में फ़ैल हुई हूँ ..........आपको भी आश्चर्य होगा .........किसी में इतनी हरने की हिम्मत कैसे हो जाती है ?   ..........मुझमे भी नहीं थी | लेकिन फिर भी किया ...........कोइ पागलपन नहीं था की डॉक्टर बनाना है ...........लेकिन घर वालो की ईक्षा थी | सो प्रयाश जारी रखा ........फिर बाद में एहसास हुआ गलत कर रही हूँ ..............अपने घर वालो के साथ भी और अपने ...
  निराशा एक दीमक है    इस निराशा से बाहर कैसे निकले | क्या सबको जरुरत है किसी कंसल्टैंट की ? आईये जानते है मेरे नए ब्लॉग में |   सबसे पहले तो बहोत बहोत सुक्रिया आप सभी का मेरे ब्लॉग को इतना पसंद करने के लिए |  ऐसे तो बहोत कुछ लिखा जा सकता है | और आपने बहोत कुछ पढ़ा भी होगा इसके लिए | १) सकरात्मक रहे २) खुस रहने का प्रयाश करे ३) योग करे ४)अपने आप को बिजी रखे ५) भरपूर नींद ले ऐसी और भी बातें है | सब सही भी है | मानने योग्य है और हमें  माननी भी चहिये || लेकिन समस्या ये है की जब हम निराश होते है | हम सोच नहीं पाते कुछ भी ........हमें कुछ भी अच्छा नहीं लगता | दिमाग में हजार ख्याल आते है ............कुछ अच्छे और बहोत सारे बुरे ख्याल .........जिन्होंने हमारी रातो को नींद उड़ा रखी होती है | ऐसे में कैसे कोइ अच्छी नींद ले ........कैसे कोइ बिजी रहे .........ऐसा क्या करे की वो ..........अपने इस निराश पल को भी ऊर्जा से भर दे |  है ना कठिन सा प्रश्न || मैं यहां पे कोइ ज्ञान नहीं दूंगी | बस वो कहना चाहूंगी जो मैंने किया .......मेरे लिए भी बड़ा मुश्किल सफर रहा ये | लेक...
 मैं किसी कविता को पूर्ण करूँ इससे पहले ,, मैं एक कहानी बन जाती हूँ || प्रिया मिश्रा :)) जिससे तिरस्कार  मिला हो उससे ,, पुरष्कार की उम्मीद क्या लगाना || प्रिया मिश्रा :))   24
 वक़्त मुझे आजमाता है मैं वक़्त को आजमाती हूँ दोनों वक़्त के साथ जीतते और हारते रहते है || प्रिया मिश्रा :)) अक्सर आसूं पीती आखें ठहाको में बदल जाती है || प्रिया मिश्रा :)) जब किसी की बुनियाद पे सवाल उठता है लोग उसे ,, बेबुनियाद ठहरा देते है || प्रिया मिश्रा :))    
  किसी भी व्यक्ति को इतना पढ़ा -लिखा होना चाहिए की वो ..............बुरे वक़्त में अपने दोस्तों की खामोशियों को पढ़ सके | अगर आप अज़नबियों की खामोशियो को भी पढ़ सकते है ,, तो आपके जितना ज्ञानी कोइ नहीं ||     प्रिया मिश्रा :))    लिखा कुछ किया कुछ सुना कुछ और ,, पढ़ा कुछ ये कविता नहीं ये लेखक भी नहीं ये दोमुहे  समाज के दोमुहे  रूप है ये कविता नहीं है प्रिया मिश्रा :))
 खोकर हमें नुकसान तुम्हारा भी होगा मैं कोई पतझड़ नहीं जो लौट आउंगी गुजरा हुआ वक़्त हूँ बसंत नहीं बन सकती || प्रिया मिश्रा :)) हमारे यहाँ प्रेम को सिर्फ लिखने का रीवाज़ है अगर आप लिखने से ज़्यादा प्रेम को निभाने में बिश्वाश रखते है ,, तो सामाजिक बहिस्कार के लिए त्यार रहे क्योकि,, हमारे समाज के कुछ सभ्य लोगो की सभ्यता पे आंच आती है   जो सिर्फ प्रेम पे लिखना जानते है निभाना नहीं || प्रिया मिश्रा   24
 कभी -कभी अपार स्नेह का लेप भी पुराने घाव को नहीं भर पाता   || प्रिया मिश्रा :)) शरीर का चोट वक़्त के साथ भर जाता है मानशिक चोट वक़्त के साथ और चोट देता है प्रिया मिश्रा :))   24
 बहुत विचार विमर्श के बाद मैंने ये निर्णय लिया की खामोश रहो ........... जब तक तुम्हारी खामोशियाँ शोर ना करने लगें।। प्रिया मिश्रा :)) जिस दिन सब अपने -अपने तरीके से सत्य और सही होने का प्रमाड दे रहे होंगे मैं तब भी मौन ही चुनुंगी क्योकि मौन सत्य का पर्यायवाची हो चूका है || प्रिया मिश्रा :)) 24
 चमकते से शहर में अँधेरा बहोत है कही कुछ दीखता नहीं ............ जाने कौन सी बस्ती के कौन से घर के कौन से कमरे में क्या चल रहा है इस शोर भरे शहर में सन्नाटा बहोत है || प्रिया मिश्रा :))
फ़टी चप्पल पे लिखने वाले बहोत है कोइ नई दिला दे तो कुछ नया हो || प्रिया मिश्रा :)) उम्र निकल गयी देखते हुए अँधेरी गलियों में,, आये हुए मोड़ो  को जहां से मुड़ना था वहाँ न मुड़ कर कही और मुड़ गए अब आखरी पड़ाव पे सोचते है ,, क्यों ? प्रिया मिश्रा :))    24
 भूखे घर में घर की नीव भी भूखी है ........ नीव एक -एक इट खाते जा रही है मकान की ... मकान ढहता जा रहा है   || प्रिया मिश्रा :))
 मिले जो किसी रोज़ फ़ुर्सत .. तो टटोलना अपनी आत्मा को और पूछना उससे ... की मिले थे उसे कितने ही मौके ज़िन्दगी जीने के ... लेकिन तुमने ठुकरा दिया था उन मौकों को ये सोचकर की ... ये दुनिया क्या कहेगी ..!! प्रिया मिश्रा :))
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  खोकर हमें नुकसान तुम्हारा भी होगा मैं कोई पतझड़ नहीं जो लौट आउंगी गुजरा हुआ वक़्त हूँ बसंत नहीं बन सकती || प्रिया मिश्रा :))      
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रेलगाड़ी वाला प्यार  ये रेलगाड़ी का सफ़र भी न बहुते बोरिंग होता है ..........हाँ सही कह रहे आप शर्मा जी .............लेकिन हमेसा नहीं होता है ....|| हमारा पर्सनल एक्सपीरियंस है .............बात उस रात की है .........जब गांव में कुत्ते और शियार  दोनों भौकते थे .............शियार भौकता नहीं है ...........मिश्रा जी ..............हुआ ...........हुआआआ करता है || अरे उहे शर्मा जी .......................अब कहाँ दीखता है,,  सब  ||   अरे छोड़िये आप  ,, कहानी बताईये ................कहानी ? अरे जो फेंक रहे थे  ................ट्रैन वाली लव स्टोरी | का बात कर रहे हैं आप शर्मा जी ...............फेंक न रहे है .............सच कह रहे है | अरे वो दिन हम पटना जा रहे थे ................इंटरसिटी से ...........वो भी आई ...........गुलाबी सूट में थी एकदम सेंट -वेंट लगा के ..........बगल में बैठी तो लगा की ...........हम गुलाब के बागान में बैठ गए है || उसका दुपट्टा हमारे छोटी ऊँगली से टच कर रहा था ...............झुरझुरी और गुदगुदी दोनों साथ में हो रही थी ................ फिर .........
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लिखा कुछ किया कुछ सुना कुछ और ,, पढ़ा कुछ ये कविता नहीं ये लेखक भी नहीं ये दोमुहे  समाज के दोमुहे  रूप है ये कविता नहीं है प्रिया मिश्रा :))    24       
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वक़्त मुझे आजमाता है मैं वक़्त को आजमाती हूँ दोनों वक़्त के साथ जीतते और हारते रहते है || प्रिया मिश्रा :))   24       
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  चुटकी ब्याह का घर है ,, संभाल के सामान रखा करो बुआ जी आँखे दिखाती  हुई चुटकी की माँ से बोली | चुटकी की माँ "ग्रेजुएट " है हिंदी से ,, पहले इनके लेख छपते थे  ........समाचार पत्रों में | अब कुछ नहीं करती | चुटकी के पिताजी भी हिंदी से "ग्रदुएट" है |  लिखते है और मुशायरा करते है | मुशायरे में ही चुटकी के नाना ने पसंद किया था इनको .........सोचा था दोनों लिखते है ,, एक दूसरे को सराहेंगे और आगे बढ़ेंगे | अफ़सोस ऐसा हुआ नहीं || चुटकी की माँ सिर्फ गृहणी बन के रह गयी .............लिखना क्या बोलती भी नहीं है || चुटकी की बड़ी बहन की शादी है | दूल्हे वालों के लिए सारा सामान लाया गया है ...........पलंग उसमे लगाने को चार लकड़ी के डंडे ......बर्तन , फर्नीचर के सामान सबकुछ || लड़का ज़्यदा पढ़ा लिखा है | सब खुस है ................बस चुटकी उन चार डंडो को देख रही थी ..............आखिर कर माँ से पूछ ही बैठी ..................क्या ये देना जरुरी है ...........इससे जीजा "जीजी" को मारेंगे  जैसे तुम्हे पापा मारते है घर सन्नाटो से भर गया ..............चुटकी के पापा पाँव पटकते हुए बाहर चल...
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मेरा रणचंडी बनना अभी कुछ दिनों तक कुछ लोगो के लिए बड़ा ............... भयावह रहेगा मैं अब ......... कुचले हुए पुष्प से बीज में परिवर्तित हुई अब , वृक्ष बन आसमान को ललकार रही आसमान काँप रहा है और मैं ,, अश्वमेध  यज्ञ को त्यार हूँ || प्रिया मिश्रा :))  
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कितना अच्छा लगता है ना ,, सुनना ..........हैप्पी विमेंस डे ......हैप्पी मदर डे .........हैप्पी फादर डे ........हैप्पी दौटर डे ..............एक दिन चुनना किसी जाती बिरादरी की प्रशंसा के लिए या फिर किसी रिश्ते को अपना कहने के लिए .......क्या सही है || हमने अपने आप को इतना सिमित कर लिया है की ..............हमारे पास अब प्यार जताने को कुछ रहा नहीं ...........रूल -रेगुलेशन और बहोत सारी ऐसी चीजे जो ...........नहीं होनी चाहिए ,, और जो की है || मैंने कभी अपने पिता को नहीं देखा ...............मेरी माँ से ये कहते हुए .............तुम न होती तो मैं न होता | कभी ये कहते हुए ..............की तुम इस गृह की लक्ष्मी हो ........या फिर तुम आज बहोत सुंदर लग रही हो || मैंने कभी अपनी दादी को भी मेरी माँ की तारीफ करते हुए नहीं देखा ............................. || भाईयों में कुछ सूधार है ..............लेकिन अब वक़्त बदल गया है ................अब ये कहना मुश्किल है की ............ भाईयों में सूधार उनकी मर्जी है या मज़बूरी  || वक़्त जरूर बदल गया है ...............सोच भी बदल गयी है ............लेकिन सोच बदल क...
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जब मैंने तुम्हे पहली बार देखा था ...........तब तुम्हारी डीपी से लगाव हुआ था ...........बहोत सुंदर थी कपल वाली ............ फिर तुम्हारी कवितायेँ पढ़ी .............और पढ़ाई भी अपने सारे दोस्तों को | तुम्हारी तारीफ़ कोइ करता तो लगता जैसे मेरी ही तारीफ़ हो रही हो....................एक लगाव सा था तुमसे ,, तब सच मानो प्यार -वार हमने कभी नहीं सोचा था || सोचती भी कैसे ............तुम्हारा तो फॉलो बैक ही मिलना मुश्किल था ............वैसे मैंने तुम्हे फॉलो बैक के लिए फॉलो किया भी नहीं था ............ मैं तो भूल गयी थी की ,, मैंने तुम्हे फॉलो किया है || सिर्फ तुम्हारी लिखी कवितायेँ पढ़ती रहती ................... अच्छा लगता था तुम्हे पढ़ना | तुम्हारे बारे में बारीकी से हर उस बात को जानना .............जिसे लोग सिर्फ महज शब्द समझ के वाह कर दिया करते होंगे | तुमपे काफी रिसर्च किया है ...........मैंने || काफी अच्छे लगे थे तुम मुझे ..............थोड़े अलग भी ............... और तुम्हारी कवितायेँ और भी अच्छी .....................|| जब हमने पहली बार बात की थी ......................तब तुम्हारी आवाज ............औ...
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 सुनो ,, जिंदगी कई नगमे गाएगी तुम शायद चुन भी ना पाओ लेकिन तुम धुन वही बनाना जो तुम्हे पसंद हो ||   प्रिया मिश्रा :))    24     
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 हम आपके नाम कभी कोइ खत नहीं लिखना चाहेंगे हम आपके पास बैठ आँखों में आँखे डाल के बात करेंगे आपको सतायेंगे जब आप शरारते करोगे ......... तो शर्मायेंगे हम आपके नाम कोइ खत  नहीं  लिखना चाहेंगे ||   प्रिया मिश्रा :))  24    
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उसने जब मुझे प्रोपोज़ किया था तब उसने मेरा हाथ अपने हाथ में लिया था और ............ मनोज वाजपेयी की तरह ..... बोल गया देखो ,, प्रिया अंग्रेजी में आई लव यु नहीं कहेंगे .. प्रेम करते है तुमसे ...... हसना होगा तुम्हारे साथ हसेंगे रोना होगा रोयेंगे लेकिन ... हर बात में "लोल" नहीं कहेंगे और ....... हमारे मन में एकदम से आ गया बकलोल कहिका || प्रिया मिश्रा :))  24  
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पता ही नहीं चला जाने,, कब तुम मेरी बातों के साथ -साथ मेरी प्राथना में शामिल हो गए || प्रिया मिश्रा :))   24     24    आपसी बिवाद में लाखों लाशें गिरी थी मुद्दा सिर्फ ,, वस्तुओं का था कन्धा देते वक़्त कह रहे थे राम नाम सत्य है  || प्रिया मिश्रा :))   24
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मेरी कलम की स्याही से गहरी ..................... तेरी आँखे काली है कैसे इनपे .......... कुछ लिखने की हिमाक़त करूँ मैं || प्रिया मिश्रा :))     कुछ रह गए है बचे हुए से .. पत्थर ........ जिन्हे सिर्फ बेवजह चोट देना आता है || प्रिया मिश्रा :))    
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 लिखने में जितना सरल है उतना सरल नहीं है किसी से प्रेम करना और ......भूल जाना || प्रिया मिश्रा :))   मेरी कलम की स्याही से गहरी ..................... तेरी आँखे काली है कैसे इनपे .......... कुछ लिखने की हिमाक़त करूँ मैं || प्रिया मिश्रा :))      
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 लाखो की संख्या में टूटे दिल ,, मिलेंगे जो बस ..... आँखे खोले देते है ये जातने को की .....मैं  जीवित हूँ हालांकि ............वो मर चुके होते है || प्रिया मिश्रा :))   24   
यूँ तो हर बात पे हाँ,, कह देते है.. हम लेकिन ,, तुम्हे भी समझना चाहिए हर बात में हाँ  ,, नहीं होती || प्रिया मिश्रा :)) 
किसी भी रिश्ते को जताने से पहले निभाने की सोचिये ||   प्रिया मिश्रा :))     24
संवाद ये तेरी ओढ़नी में लगा घुंगरू मुझे बहोत पसंद है .....................दूर से तेरे आने की खबर देता है कहो तो तुम्हारी कलाई में बांध दूँ ...............................मैं सिर्फ तुम्हारी हूँ ...............सारी उम्र तुम्हे एहसास करता रहेगा ..............ये मेरे ओढ़नी का घुंगरू || नहीं ,, रहने दो ...................... तुम्हारी ओढ़नी में सजने दो .................... जब ,, तुझे अपनी दुल्हन बनाऊंगा ..........तब नई ओढ़नी लाऊंगा ............लाल रंग की .........जिसमे सुनहरे ............घुंघरू जड़े होंगे .............................उसे बांध देना मेरी कलाई में | सच ,, आओगे ना कही ,, और जा ही नहीं सकता मैं ..............ये तेरे घुंगरू बहोत शोर करेंगे तेरे बिना तनहाई में || प्रिया मिश्रा :))संवाद ये तेरी ओढ़नी में लगा घुंगरू मुझे बहोत पसंद है .....................दूर से तेरे आने की खबर देता है कहो तो तुम्हारी कलाई में बांध दूँ ...............................मैं सिर्फ तुम्हारी हूँ ...............सारी उम्र तुम्हे एहसास करता रहेगा ..............ये मेरे ओढ़नी का घुंगरू || नहीं ,, रहने दो ..................
  ताउम्र जिसे हम ढूंढ़ते रहे वो मेरी किस्मत में पहले से तय था किस्मत को बस सही वक़्त चाहिए था || प्रिया मिश्रा :))    24
किस्मत से कोइ परिंदा उड़ता है मैंने देखा है पंखो को पिंजरे में शिसकते हुए || प्रिया मिश्रा :))     24
सुनो ,, ठहर जाओ तुम ही कोइ आएगा भी तो किसी और का स्थान रिक्त कर के आएगा ............. क्यों किसी रंग पे किसी का रंग चढ़ाना सुनो ,, तुम ही अपनी धानी ओढ़नी से अपनी दुल्हन बना लो || प्रिया मिश्रा :))     24
पेड़ की डाली से टूटी हुई पूरानी पत्ती नया घर ढूंढती है पेड़ की डाली पे नई पत्ती का आगमन हो गया है || प्रिया मिश्रा :))     24    सुनो जब प्रेम करने लगो किसी से हर पल ईश्वर से उसे मांगना उसपे कोइ विरह वाली कविता लिखने वाली कल्पना से भी दूर रहना || प्रिया मिश्रा :))
 वो आटे में गुंदकर प्रेम बनाती है रोटियाँ और डब्बे को लिफ़ाफ़ा बना के रोटियों को प्रेम -पत्र के रूप में मेरे पास भेज देती है प्रिया मिश्रा :))    24
आसमान बादलों के कागज पर बूंदो की स्याही से इंद्रधनुष के लिफ़ाफ़े में धरती को ख़त भेजता है और ,, धरती .... प्रेम के धानी रंग में रंग जाती है || प्रिया मिश्रा :))    24  
जमीन पर पहला बीज जिसने भी लगाया होगा उसने ..... प्रेम से उस पौधे को सींचा होगा वो पौधा जब बड़ा हुआ तब ................ उसने फूलो के रूप में अपने माली के नाम ,, अनगिनत .......... पत्र लिखे और आभार प्रकट किया || प्रिया मिश्रा :))     24