मैंने कुछ इस तरह इश्क छुपा के रखा हैं ......



वो तेरी साथ की डायरी के पन्ने
अब रंगीन हो गए ............
कुछ सुनहरा रंग हुआ हैं उनका .........
और तेरे तारीफ़ के शब्द और भी
गाढ़े रंग के दीखते हैं ...........
और मैं ..
अपनी क्या सुनाऊँ .......
बस इतना समझ लो
अपने हाथो की मेहँदी को बालो में लगा के रखा हैं |
मैंने कुछ तरह तेरा इश्क छुपा के रखा हैं ||

Comments

Popular posts from this blog