"अगर बेवफाओ की अलग दुनिया होती "

बड़ा गंभीर सा शीर्षक हैं ,
 सोचो क्या होता अगर बेवफाओ की अलग दुनिया होती |
 आधी आबादी तो वही रहा करती |
पृथ्बी बट जाती दो भागो में
और वहाँ भी एक बॉर्डर होता
बेवफा इधर नहीं
वफादार उधर नहीं
फिर जंग छिड़ता
जो वफादार थे वो लालच में बेवफा हो जाते
जो बेवफा थे उनमे वफ़ा आ जाती
संख्या इधर की
उधर की उन्नीस
बिस चलते रहती ||

आधार कार्ड होता
वफ़ा की दुनिया का अलग
बेवफाओ की दुनिया का अलग
नंबर में कभी जीरो आगे आता
कभी +११ ,
सब कुछ अलग होता
लेकिन प्यार फिर भी रहता
बॉर्डर के इस पार भी
बॉर्डर के उस पार भी
तभी तो समझ आती
वफ़ा क्या होती हैं
बेवफाई क्या होती हैं ||

प्रिया मिश्रा :)  

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