"देश का हिन्दू सोया है "

हिमालय तक गुंजी आवाज
फिर भी न कोइ रोया हैं
बच्चा - बच्चा जान रहा
देश  का हिन्दू सोया है ||

कही बिक रही ईमान
कही बिक रहा भगवान्
कोइ कीमत लगाए  शब्दों की
कोइ चादर तान के सोया है
बच्चा - बच्चा जान रहा
देश का हिन्दू सोया हैं ||

आज लगी जंग तलवारो में
अब कहा हैं खून
भुजाओ में
कट जाने कहाँ कोइ मस्तक अब त्यार हैं
कफ़न अब बिकता हैं बाजारों में
सर पे बांधने वाले चले गए
तब का भारत अब कहाँ
खोया हैं
बच्चा - बच्चा जान रहा
देश का हिन्दू सोया हैं ||

माता अब बट गयी हैं
आँचल अब मैला हैं
 लोग अब
आना - कानी  करते
ना मेरा हैं ना तेरा हैं
हमारा हैं
ये देश समझ लो
हुई हैं कोइ नाइंसाफी
जब भी कोइ रोया हैं
बच्चा - बच्चा  जान रहा
देश का नागरिक  सोया है ||

प्रिया मिश्रा :)

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