"पिछली सर्दी "
पिछली सर्दी
में एक मोड़ से गुजरे थे हम दोनों
रास्ते अलग हो गए
शरीर रास्तो में मुड़ गया
आत्मा हमदोनो की वही रह गयी
जहाँ कुहरा घाना था
छिप के बैठे
बातें की
एक दूसरे से मिलने का वादा किया
और गुम गए वही वादियों में
शरीर अब भी कही और है
आत्मा आज भी इस कुहासे वाली
सड़क पे मिला करती हैं
बेखौफ,
बिना डरे
इस सुनसान डगर में
इस प्यार के नगर में ||
प्रिया मिश्रा :)
पिछली सर्दी
में एक मोड़ से गुजरे थे हम दोनों
रास्ते अलग हो गए
शरीर रास्तो में मुड़ गया
आत्मा हमदोनो की वही रह गयी
जहाँ कुहरा घाना था
छिप के बैठे
बातें की
एक दूसरे से मिलने का वादा किया
और गुम गए वही वादियों में
शरीर अब भी कही और है
आत्मा आज भी इस कुहासे वाली
सड़क पे मिला करती हैं
बेखौफ,
बिना डरे
इस सुनसान डगर में
इस प्यार के नगर में ||
प्रिया मिश्रा :)
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