"विरह "

कुछ खली बर्तन
धूल में लिपटी कमरों की खालीपन
सन्नटा
अंधकार
रौशनी का अधूरापन
बिरह एक खालीपन ||

ख़ाली आँखों में इन्तजार
मुस्कराहट का फीकापन
चेहरे का पीलापन
शाम की उदाशी
रात का बंजारापन
बिरह एक खालीपन ||

रोज दरवाजे तक
नजरो का सफर
किसी के सन्देश का इन्तजार
किसी के लिए
मौत तक का सफर
जिंदगी से बेगानापन
बिरह एक खालीपन ||

बरसातों में जमी धूल
फ़क सा पड़ा मकान
गिरते पत्ते सा जीवन
और सावन से बैर
आँखों का सादापन
श्रृंगार से नाराजगी
अरमानो का मरता जीवन
बिरह एक खालीपन ||

प्रिया मिश्रा :)

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