इश्क सफर हैं काटो का

जज्बातो में उलझ के रह जाओगे
न जीतोगे न हारोगे
खो दोगे  खुद को
इश्क कहाँ हैं
बंजारों का
इश्क सफर है काँटों का ||

बड़े इम्तहान लिए जायँगे
कुछ तुझे बदनाम किये जायँगे
ये कहाँ शरीफो में फला
ये राह हैं
तनहा रातो का
इश्क सफर है काटो का ||

नींद से वास्ता जो खोना होगा
खुद का खुद ही रोना होगा
ना समझ पाया हैं
कोइ जज्बात इश्क के बीमारों का
इश्क सफर है काटो का ||

प्रिया मिश्रा :)

Comments

Popular posts from this blog