मेरी कलम की स्याही से
गहरी .....................
तेरी आँखे काली है

कैसे इनपे ..........
कुछ लिखने की
हिमाक़त करूँ मैं ||

प्रिया मिश्रा :)) 

 

 कुछ रह गए है
बचे हुए से ..
पत्थर ........

जिन्हे सिर्फ
बेवजह चोट देना आता है ||

प्रिया मिश्रा :))

 


 

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