उसके किताबों में आज भी
सूखे पुष्पों से खुसबू आती है

ये ,, शब्दों का
पुष्पों में सिमट
जाना भी ....

कितना ,,
अद्द्भुत और
मासूम प्रेम रहा होगा ||

प्रिया मिश्रा :))  

 

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