मेरा रणचंडी बनना
अभी कुछ दिनों तक
कुछ लोगो के लिए
बड़ा ...............
भयावह रहेगा

मैं अब .........
कुचले हुए
पुष्प से
बीज में परिवर्तित हुई

अब , वृक्ष बन
आसमान को
ललकार रही

आसमान काँप रहा है
और
मैं ,, अश्वमेध  यज्ञ को त्यार हूँ ||

प्रिया मिश्रा :))  




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