लिखा कुछ
किया कुछ
सुना कुछ
और ,,
पढ़ा कुछ
ये कविता नहीं
ये लेखक भी नहीं

ये दोमुहे  समाज के
दोमुहे  रूप है
ये कविता नहीं है

प्रिया मिश्रा :)) 

 

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