संवाद 



सुनो ,,
ये नदियों में कंकड़ मारना ............फिर बनती चूड़ियों को देखना ............कितना शुकुन देता है,, है  ना

नहीं मुझे नहीं लगता ......................
किसी को चोट पहुँचा के ............उसके ह्रदय की धुन को एक घेरे में बाँध देना ...............क्या शुकुन देगा .................नदी कुछ कहती नहीं है .....................इसलिए हम उससे खेलते रहते है ..............कहो तुम्हे कोइ बाँध दे .............तुम खुस रहोगी ...................?
बाँध तो दिया है ..................बस घेरा ना बना पाया ..............

अच्छा ,, कौन है वो

वही जो नदियों की गहराई नापता  रहता है ..................किसी के ह्रदय से अनजान होकर ||

हहहहहहह ................. अच्छा मजाक था :)) 



प्रिया मिश्रा :))  

 

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