इतने सलीक़े से
लिखती है
वो पत्र प्रेम का

शब्दों के
स्थान पे
वो एक पीला
गुलाब लेती है
और उसमे
एक काला टिका लगा देती है
 
बस मैं
जनता हूँ
बसंत के पीले
फूल पे
एक काला टिका
पतझड़ का लगाती है ||

प्रिया मिश्रा :))  

 

24

Comments

Popular posts from this blog