कितना अच्छा लगता है ना ,, सुनना ..........हैप्पी विमेंस डे ......हैप्पी मदर डे .........हैप्पी फादर डे ........हैप्पी दौटर डे ..............एक दिन चुनना किसी जाती बिरादरी की प्रशंसा के लिए या फिर किसी रिश्ते को अपना कहने के लिए .......क्या सही है ||

हमने अपने आप को इतना सिमित कर लिया है की ..............हमारे पास अब प्यार जताने को कुछ रहा नहीं ...........रूल -रेगुलेशन और बहोत सारी ऐसी चीजे जो ...........नहीं होनी चाहिए ,, और जो की है ||

मैंने कभी अपने पिता को नहीं देखा ...............मेरी माँ से ये कहते हुए .............तुम न होती तो मैं न होता |
कभी ये कहते हुए ..............की तुम इस गृह की लक्ष्मी हो ........या फिर तुम आज बहोत सुंदर लग रही हो ||
मैंने कभी अपनी दादी को भी मेरी माँ की तारीफ करते हुए नहीं देखा ............................. || भाईयों में कुछ सूधार है ..............लेकिन अब वक़्त बदल गया है ................अब ये कहना मुश्किल है की ............
भाईयों में सूधार उनकी मर्जी है या मज़बूरी  ||

वक़्त जरूर बदल गया है ...............सोच भी बदल गयी है ............लेकिन सोच बदल के ..............सबल से दुर्बल पे अत्याचार वाली आ गयी है | महिला पुरुष का कोइ अब खेल ही नहीं रहा ||

वरना इतने वृद्धाश्रम, अनाथालय , और कई ऐसे ट्रस्ट आज  नहीं होते ||  

मैं हर दिवस  का आंनद मनाना चाहती हूँ ...............लेकिन नहीं मनाना चाहती परितंत्र सोच का उत्सव ...................

तो सोच को बदलिए .................एक दूसरे को समझिये .............और एक दूसरे को प्यार दीजिये ||
ये महिलावाद और पुरुषवाद में कुछ नहीं रखा है ||
जिस दिन हम इस पृथ्वी को त्यागेंगे ..........उस दिन कुछ नहीं जाएगा ................क्युकी आत्मा की कोइ लिंग नहीं होती ||


प्रिया मिश्रा :))   





Comments

Popular posts from this blog