चुटकी
ब्याह का घर है ,, संभाल के सामान रखा करो बुआ जी आँखे दिखाती हुई चुटकी की माँ से बोली |
चुटकी की माँ "ग्रेजुएट " है हिंदी से ,, पहले इनके लेख छपते थे ........समाचार पत्रों में | अब कुछ नहीं करती | चुटकी के पिताजी भी हिंदी से "ग्रदुएट" है | लिखते है और मुशायरा करते है | मुशायरे में ही चुटकी के नाना ने पसंद किया था इनको .........सोचा था दोनों लिखते है ,, एक दूसरे को सराहेंगे और आगे बढ़ेंगे | अफ़सोस ऐसा हुआ नहीं ||
चुटकी की माँ सिर्फ गृहणी बन के रह गयी .............लिखना क्या बोलती भी नहीं है ||
चुटकी की बड़ी बहन की शादी है |
दूल्हे वालों के लिए सारा सामान लाया गया है ...........पलंग उसमे लगाने को चार लकड़ी के डंडे ......बर्तन , फर्नीचर के सामान सबकुछ || लड़का ज़्यदा पढ़ा लिखा है |
सब खुस है ................बस चुटकी उन चार डंडो को देख रही थी ..............आखिर कर माँ से पूछ ही बैठी ..................क्या ये देना जरुरी है ...........इससे जीजा "जीजी" को मारेंगे जैसे तुम्हे पापा मारते है
घर सन्नाटो से भर गया ..............चुटकी के पापा पाँव पटकते हुए बाहर चले गए ||
प्रिया मिश्रा :))
"जीवन की आपा - धापी " जीवन की आपा - धापी में कही तू तेरा मकान ना भूल जाये वो शहर वो आसमान ना भूल जाये दो सिक्के जमीं पे गिर गए तो गम ना कर हाथो से वो , तेरा करीबी रिस्ता ना छूट जाये || बड़े मुश्किल से मिलते हैं दिल से हाल पूछने वाले तुझसे चाहने तुझे सराहने वाले कही इस आप - धापी में कोइ वो चेहरा ना ग़ुम हो जाये || जीवन की आप - धापी में कही तू तेरा मकान ना भूल जाये वो शहर वो आसमान ना भूल जाये || कोइ गुजर रहा होगा तेरे इन्तजार के पलों से वो तेरा यार ना रूठ जाये जीवन की आपा - धापी में वो तेरा प्यार का गुलिस्तां ना छूट जाये || थाम लेना उस हमदम के हाथो को तेरा हमकदम तेरा हमसफ़र ना छूट जाये जीवन की आपा - धापी में तेरी जमीं तेरा आसमान ना छूट जाये || तू नहीं कोइ खुदा कही तुझे ये गुमा ना हो जाये संभाल लेना खुद को इस चकाचौंध से की कोइ तेरा अपना अँधेरे में ना ग़ुम हो जाये || जीवन की आपा - धापी में कही तू तेरा मकान ना भूल जाये वो शहर वो आसमान ना भूल जाये || प्रिया मिश्रा :)

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