संवाद
ये तेरी ओढ़नी में लगा घुंगरू मुझे बहोत पसंद है .....................दूर से तेरे आने की खबर देता है
कहो तो तुम्हारी कलाई में बांध दूँ ...............................मैं सिर्फ तुम्हारी हूँ ...............सारी उम्र तुम्हे
एहसास करता रहेगा ..............ये मेरे ओढ़नी का घुंगरू ||
नहीं ,, रहने दो ...................... तुम्हारी ओढ़नी में सजने दो ....................
जब ,, तुझे अपनी दुल्हन बनाऊंगा ..........तब नई ओढ़नी लाऊंगा ............लाल रंग की .........जिसमे सुनहरे ............घुंघरू जड़े होंगे .............................उसे बांध देना मेरी कलाई में |
सच ,, आओगे ना
कही ,, और जा ही नहीं सकता मैं ..............ये तेरे घुंगरू बहोत शोर करेंगे तेरे बिना तनहाई में ||
प्रिया मिश्रा :))संवाद
ये तेरी ओढ़नी में लगा घुंगरू मुझे बहोत पसंद है .....................दूर से तेरे आने की खबर देता है
कहो तो तुम्हारी कलाई में बांध दूँ ...............................मैं सिर्फ तुम्हारी हूँ ...............सारी उम्र तुम्हे
एहसास करता रहेगा ..............ये मेरे ओढ़नी का घुंगरू ||
नहीं ,, रहने दो ...................... तुम्हारी ओढ़नी में सजने दो ....................
जब ,, तुझे अपनी दुल्हन बनाऊंगा ..........तब नई ओढ़नी लाऊंगा ............लाल रंग की .........जिसमे सुनहरे ............घुंघरू जड़े होंगे .............................उसे बांध देना मेरी कलाई में |
सच ,, आओगे ना
कही ,, और जा ही नहीं सकता मैं ..............ये तेरे घुंगरू बहोत शोर करेंगे तेरे बिना तनहाई में ||
प्रिया मिश्रा :))
"जीवन की आपा - धापी " जीवन की आपा - धापी में कही तू तेरा मकान ना भूल जाये वो शहर वो आसमान ना भूल जाये दो सिक्के जमीं पे गिर गए तो गम ना कर हाथो से वो , तेरा करीबी रिस्ता ना छूट जाये || बड़े मुश्किल से मिलते हैं दिल से हाल पूछने वाले तुझसे चाहने तुझे सराहने वाले कही इस आप - धापी में कोइ वो चेहरा ना ग़ुम हो जाये || जीवन की आप - धापी में कही तू तेरा मकान ना भूल जाये वो शहर वो आसमान ना भूल जाये || कोइ गुजर रहा होगा तेरे इन्तजार के पलों से वो तेरा यार ना रूठ जाये जीवन की आपा - धापी में वो तेरा प्यार का गुलिस्तां ना छूट जाये || थाम लेना उस हमदम के हाथो को तेरा हमकदम तेरा हमसफ़र ना छूट जाये जीवन की आपा - धापी में तेरी जमीं तेरा आसमान ना छूट जाये || तू नहीं कोइ खुदा कही तुझे ये गुमा ना हो जाये संभाल लेना खुद को इस चकाचौंध से की कोइ तेरा अपना अँधेरे में ना ग़ुम हो जाये || जीवन की आपा - धापी में कही तू तेरा मकान ना भूल जाये वो शहर वो आसमान ना भूल जाये || प्रिया मिश्रा :)
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