खोकर हमें नुकसान
तुम्हारा भी होगा

मैं कोई पतझड़ नहीं
जो लौट आउंगी

गुजरा हुआ वक़्त हूँ
बसंत नहीं बन सकती ||

प्रिया मिश्रा :))


हमारे यहाँ प्रेम को सिर्फ लिखने का रीवाज़ है
अगर आप लिखने से ज़्यादा
प्रेम को निभाने में बिश्वाश रखते है ,, तो
सामाजिक बहिस्कार के लिए त्यार रहे
क्योकि,,
हमारे समाज के कुछ सभ्य लोगो की
सभ्यता पे आंच आती है  
जो सिर्फ प्रेम पे लिखना जानते है
निभाना नहीं ||

प्रिया मिश्रा

 

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