बच्चो का जीवन और माता पिता का उनके जीवन में योगदान
कभी -कभी हम हम अपने भागते हुए जीवन को देख के खुद ही थक जाते है ..............तो सोचिये ये बच्चे कितने थक जाते होंगे | स्कूल का प्रेसर , होमवर्क ,
कम्पटीशन , और उसपे हमारा उनके उम्र के बच्चो के साथ कम्पायर करना ||
ये सच है की हर माता पिता अपना बचपन अपने बच्चो में जीते है ...................अपना पूरा जीवन उनके लिए नेवछावर कर देते है ...............उनकी खुसी में अपनी खुसी देखते है ..................लेकिन क्या ये आजकल की बच्चो की और हमारे नई जेनरेशन को डिप्रेशन में जाते हुए देख ..........ये सारी बाते बेमाने नहीं लगती है ||
लगता नहीं है ....की ....हम कही चूक रहे है .........कोइ भूल हो रही है हमसे .........हम या तो बहोत पीछे जी रहे है अपना जीवन,, या फिर बहोत आगे जी रहे है ..............और हमारे बच्चे कही बिच में छूट गए है | हमने ये दिखाने के लिए की हम बच्चो की फ़िक्र करते है ..........या उनके लिए सब कर रहे है .............हमने खुद ही अपने बच्चो और अपने मध्य एक दीवार बना रखा है |
आज करोड़ो की भीड़ में हमारा बच्चा अकेला सा ..........कभी डरा सा ,, कभी तनहा सा
.............किसी को ढूंढ़ता हुआ नजर आता है | और हम अपने कार्यो में इतने व्यस्त रहते है की हमारा ध्यान ही नहीं जाता .............हमारा ध्यान नहीं जाता की हमारे बच्चे की मानशिक स्थिति कहा जा रही है ...........अचानक टॉप करता बच्चा फ़ैल क्यों होने लगा ..........जहां किशोरावस्था में लोगो को भीड़ पार्टी पसंद होती है वहाँ मेरा अकेला बच्चा भीड़ से भाग क्यों रहा है | हमारा ध्यान कभी नहीं जाता की हम पूछे अपने बच्चे से की .........बेटा तुम्हे क्या पसंद है |
हम कहते है की हम अपना बचपन अपने बच्चो में जीते ...................झूट है ये .............हमने जो शरारते की वही अगर हमारा बच्चा करे तो हम उसे डाट देते है ..........उसे समझते नहीं या समझने का प्रयाश नहीं करते है ...........जबकि ,, आज आपका बच्चा जो १२ वर्ष की उम्र में कर रहा है शायद आपने भी अपनी उम्र में वही किया हो .............हम नहीं कह पाते अपने बच्चो से की हम भी कभी बच्चे थे |और शायद ये एक कारन है की हम अपने बच्चो से दूर होते जा रहे है ||
हम हमेसा ये एहसास दिलाने में लगे रहते है की .................हमने पालन पोषण कर के अपने ही बच्चो पे बहोत बड़ा कोइ एहसान किया है ...........जबकि ऐसा हैं नहीं ...............हमारे जीवन में बच्चो का आना एक वरदान है ......हमें उसे ईश्वर का आशीर्वाद समझना चहिये ............ना की उसे एक बोझ की तरह पालना चाहिए ...................आपके बच्चे आपकी खुसिया है .............उसे अपने गुलाम की तरह व्यवहार ना करे ||
हम अपने बच्चो को सही गलत सीखने में इतने व्यस्त रहते है की ................सही क्या है,, ये सीखा ही नहीं पाते .............हम उनसे उनके बोलने का अधिकार छीन लेते है ...............हम अपने आप को उनपे थोपते है ...........हम एक अच्छे माता पिता बनने की चाहत में एक ....क्रूर अभिभावक की भूमिका में आ जाते है |
हमारा बच्चा हमारे ही सामने घुटता रहता है ............और हमें लगता है हम उसे अनुसासन सीखा रहे है ................हमें एहसास भी नहीं होता और हमारा बच्चा हमारे ही क्रूरता के कारन अवसाद जैसे भयानक बीमारी का शिकार हो जाता है ||
एक माता -पिता होने के नाते हमारा जिम्मेदारी और बढ़ जाती है |
इसे निभाना और आसान हो जायेगा जब हम .......कुछ बातो का ध्यान रखेंगे |
हमारे पास अधिक समय नहीं होता अपने बच्चो में एक अच्छा संस्कार डालने के लिए ..उनके बढ़ते दिमाग में कुछ अच्छी आदते डालने के लिए ............जिससे उन्हें पूरी उम्र आपकी पैरो पे खड़ा न होना पड़े |
इसके लिए सबसे पहले स्वम को महान बनना छोड़े और अपने बच्चो को ईश्वर का आशीर्वाद समझ के उनका पालन -पोषण करे ||
हमारे पास बस उनके जन्म से लेकर किशोरावस्था तक का समय होता है ............जहां हम उन्हें कुछ अच्छी आदते सीखा सकते है ..........अपना मित्र बना सकते है ..........और अपने आप को भी उनमे ढाल सकते है ||
अपने बच्चो को सोचना सिखाये ........अच्छी सोच डेवलप करे ||
उनके साथ खेले ............और देखे आपका बच्चा शारीरिक और मानशिक रूप से कितना मजबूत है |
उसे शारीरिक और मानशिक रूप से मजबूत बनाने का प्रयाश करे ..............
अपने बच्चो के पास कोइ ऐसी बात न करे .........जो उसके उम्र के साथ ताल -मेल ना खाती हो ............उम्र के साथ अपने बच्चो के साथ ओपन होना बहोत जरुरी है ||
अपने बच्चो को ...........बड़ो को आदर देना सिखाये ..............और ये भी बताएं की ये क्यों जरुरी है ...............अपने बच्चो को ये सिखाये की ..........जो उन्हें ना पसंद हो ऐसी चीजे वो दुसरो के साथ भी ना करे |
अपने बच्चो को अलग -अलग तरह के गेम और फिजिकल एक्टिविटीज़ में डाले और देखे आपके बच्चे कहा बेहतर है |
अपने बच्चो में वेद ज्ञान जरूर लाये ...........ताकि कोइ उन्हें भ्रमित न करे धर्म के नाम पर |
अपने बच्चे की मनोदशा को समझे |
उन्हें ये बिश्वाश दिलाये की .............अगर लाइफ में कुछ सही करते हुए गलती हो जाती है तो आप उनके साथ है
अपने बच्चो के साथ हर प्रमुख टॉपिक पे बात करे .............और उनकी राय जानने का प्रयाश करे |
उन्हें खुद सही -गलत चुनने का मौका दे |
अपन बच्चो को जागरूक बनाये .............उन्हें धीरे -धीरे .......मनी सेव करना , उसकी महत्वता सिखाये |
उन्हें परिवार और देश के प्रति जागरूक बनाये ..................उन्हें परिवार का महत्वा समझाए |
और इन सब चीजों के लिए ................हमारे पास बस बच्चे जन्म के साथ से लेकर ..........१२ वर्ष का तक का समय होता है .............उसके बाद आप अपने बच्चे में कोइ आदत नहीं डाल सकते ........क्योकि १२ वर्ष के बाद आपका बच्चा बाहरी संस्कारो के साये में बहोत जल्दी आ जाता है |
हम इन सब चीजों से अपने बच्चो को रोक नहीं सकते क्योकि ..........हमारे बच्चे स्कूल जाते है , कॉलेज जाते है ..............प्रोजेक्ट पार्टी और जाने क्या क्या ......तो हमें उन्हें जड़ से मजबूत करना होगा .............और तभी से उनके साथ फ्रेंड की तरह रहना होगा ||
फिर आपके बच्चे आपके अपने .....होंगे ................ईश्वर के आशीर्वाद की तरह ||
थैंक यू
गॉड ब्लेस्स यू ||
प्रिया मिश्रा :))
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