किसी भी व्यक्ति को इतना पढ़ा -लिखा होना चाहिए की वो ..............बुरे वक़्त में अपने दोस्तों की खामोशियों को पढ़ सके | अगर आप अज़नबियों की खामोशियो को भी पढ़ सकते है ,, तो आपके जितना ज्ञानी कोइ नहीं || 

 

 प्रिया मिश्रा :))

 

 लिखा कुछ
किया कुछ
सुना कुछ
और ,,
पढ़ा कुछ
ये कविता नहीं
ये लेखक भी नहीं

ये दोमुहे  समाज के
दोमुहे  रूप है
ये कविता नहीं है

प्रिया मिश्रा :))

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