वक़्त मुझे आजमाता है
मैं वक़्त को आजमाती हूँ

दोनों वक़्त के साथ
जीतते और हारते रहते है ||

प्रिया मिश्रा :))

अक्सर आसूं पीती आखें
ठहाको में बदल जाती है ||

प्रिया मिश्रा :))

जब किसी की बुनियाद पे सवाल उठता है
लोग उसे ,, बेबुनियाद ठहरा देते है ||

प्रिया मिश्रा :))

 

 

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