" मदर्स डे "
ये मदर्स डे पे अच्छी - अच्छी कविताये कितनी अच्छी लगती है ना | माँ के साथ की एक फोटो ली और सोशल - मिडिया पे साँझा कर दिया |
वहाँ निचे चार लाने डाल दी
मेरी माँ सबसे अच्छी माँ है |
मेरी माँ की आँखों में मैं मुस्कुराता हूँ जब मुस्कुराती है माँ मैं जन्नत पा जाता हूँ | और भी अच्छी लाईने है |
लेकिन क्या आपने देखा है सच में अपनी माँ को दिल से मुस्कुराते हुए | कभी देखा है उनकी उम्र को गुजर जाते हुए | कभी देखा है उनके मन की पीड़ा | कभी सुनी है उनकी अनकही कहानी | कभी झाँका है उनके मन में | कभी उनकी करवटो को गिना है | कभी एक पल सुकून से जाके बैठ के पूछा है माँ रहने दे ये सब बताओ आप कैसे है | शायद नहीं | हम अपनी दुनिया में  इतने व्यस्त है की हमें ये तक नहीं पता की लास्ट टाइम हमने अपनों से बात कब की थी | और अगर कर भी ली तो अपनी लेके बैठ गए | माँ ये चल रहा है, वो चल रहा है | | और माँ सुन के कहती है कोइ नहीं बेटा सब ठीक हो जायेगा और जब ठीक हो जाता है तो बेटा या बेटी खुद फिर से बिजी हो जाते है ||
फिर आता है मदर्स डे और माँ के साथ की ली गयी एक तस्बीर उठाते है और साँझा कर देते है |
माँ की तस्बीर से नहीं नहीं माँ के गले मिलिए | उन्हें प्यार दीजिये | अपने आस - पास ऐसे बहोत माँ - पापा है जिनकी बच्चे उनके साथ नहीं है उनसे मिलिए | उन्हें प्यार दीजिये आदर दीजिये | उन्हें जीने का नया मकसद दीजिये | प्यार देने से आपको भी प्यार मिलेगा | दुसरो को जीना सीखने से खुद को जिंदगी मिल जाती है , फिर ये तो माँ - पापा है इनसे तो सब कुछ मिलता है |
हमने कभी छोटे से बीज को अंकुरित होते हुए सायद ही देखा हो |
एक किसान एक बीज़ लगता है उसमे पानी डालता है | उसके किनारे - किनारे लकड़ियों की क्यारिया बनाता है |
और वो बीज़ मुस्कुराता हुआ बाहर आता है | वो जो मिटटी जिसमे वो बीज़ अंकुरित हुआ वो माँ है वो जन्म से पहले से हमें सींचती है | जो लकड़ियों की क्यारियाँ है वो हमारे पिता है जो हमें बहार से सुरक्षा  देते है| वो किसान दादा - दादी या नाना - नानी | ये पूर्ण जीवन इन लोगो पर पूरी तरह निर्भर करता है |
तो मदर्स दे के साथ - साथ मदर्स का डे बनाये ||

धन्यवाद ||
जय हिन्द
प्रिया मिश्रा :)

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