आज घूँघट की दिवार मत लाना
आज हमारे बिच कोइ शृंगार मत लाना
आज शादगी जीना चाहता हूँ
आज मैं प्रीत रस पीना चाहता हूँ
आज रहने दो सब साजों शृंगार को
आज मैं बस तुझमे जीना चाहता हूँ
आज घूँघट की दीवार मत लाना
आज हमारे बीच कोइ श्रृंगार मत लाना ||
प्रिया मिश्रा :)
आज हमारे बिच कोइ शृंगार मत लाना
आज शादगी जीना चाहता हूँ
आज मैं प्रीत रस पीना चाहता हूँ
आज रहने दो सब साजों शृंगार को
आज मैं बस तुझमे जीना चाहता हूँ
आज घूँघट की दीवार मत लाना
आज हमारे बीच कोइ श्रृंगार मत लाना ||
प्रिया मिश्रा :)
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