सुनो कहा सुना सब माफ़ करो
चलो अब से एक नया जीवन बसाते है ||
जहाँ खुद को थोपेंगे नहीं
प्रेम करेंगे
एक दूसरे से
क़द्र करेंगे
एक दूसरे की भावनावो का
जहाँ मेरा - तुम्हारा कुछ ना होगा
सब कुछ हमारा होगा
हमारा अपना
मेरा और तुम्हारा
सुखी रोटी भी
और वो तकिया का आधा कोना भी
जब मैं अँधेरे में रहूँगा तुम प्रकाश दिखा देना
मैं तुम्हे फिशलने नहीं दूंगा
चाहे जीवन में कितनी भी फिशलन हो
मैं संभाल लूंगा
तुम प्रीत निभा लेना थोड़ी
मैं प्रेम निभा लूंगा
सब कुछ बाटेंगे
साझा करेंगे
दुःख भी
सुख भी ||
***********
***********
ये कितना अच्छा होता अगर यात्रा की कोइ बात ना करता
कोइ कहानी चलती और मंजिल आ जाती
एक भरोसा होता
एक बिश्वाश चलता
ये यात्रा के नाम पर तो पैरो में थकान सी आ जाती है
उनके ,
जिनके थकान अभी उतरे नहीं
और मंजिल कोसो दूर है
इतनी दूर की ,
आँख से नहीं दिखती
और बेधति रहती है मन को
एक आश बनके
एक प्यास बनके
****************
*******************
एक दिन का मदर्स डे
और हजारो की संख्या में विर्धाश्रम
डरावना है
मगर सच है
***********
***********
ये नए बूट पहनने से
पुराने छाले दीखते नहीं है पैरो के
लेकिन दर्द अब भी है
वो पुराना वाला ||
******************
*****************
ये प्रेम की परिभासा पूछने वाले
उसे शब्द हीन कर देते है
वरना जिन्हे पता है
प्रेम की परिभासा
वो ना पूछते है ना लिखते है
सिर्फ़ महसूस करते है
और निभाते है
*********************
*********************
हम दोनों के रास्ते टकरा के
राह बदल लेते है
लेकिन बाते फिर भी होती है
बिन बोले
जितना मैं बोलूँ
वो सुन लेता है
जितना वो बोले मैं सुन लेती हूँ
लेकिन रास्ते अलग है
और मंजिल एक है
******************
**********************
माना की मेरी गेहूँ की बालिया
कच्ची है
लेकिन , मेरी अपनी है
जिस दिन फलेगी
बहुत फलेंगी
******************
*****************
जब बैसाखिया टूटी थी मेरी
मैं तो समझी अब एक कदम चलना भी ना हो पायेगा
कैसे नापुंगी अपने पैरो से अपनी मंजिल को
लेकिन काँपते पैरो ने ,
मुँह के बल गिरा के
खड़ा रहना सीखा दिया
चलना सीखा दिया
एक बुरे वक़्त ने
आत्मनिर्भर बना दिया||
प्रिया मिश्रा :)
********************
**********************
खामोश ही रहने दो हमको
बातों से मामले सुलझते नहीं
उलझ जाते है
प्रिया मिश्रा :)
*******************
************************************
मैंने मुस्कुराना सिख लिया
जीवन ने फिर से मेरे अंदर जन्म ले लिया
परोसती थी जब भी गम मैं
उन टूटे से दिनों में
वो बिष बून्द - बून्द
मेरे जीवन को मारता जाता था
ये अमृत मुस्कराहट की
चाहेँ दो ,
चाहेँ लो
जीवन जन्म लेगा फिर से
एक नए शिशु की तरह
तुममे, फिर से ||
प्रिया मिश्रा :)
**************************
*******************************
मैं तुम्हारे हर बात पे हुँकार नहीं भरूंगी सिर झुका के
बात पते की हो तो बोलो
ज्ञान की हो तो बोलो
सर्वस्य कल्याण की हो तो बोलो
चलूंगी तुम्हारे साथ
कदम से कदम मिलाकर
लेकिन फिर कोइ दूसरी बात अगर गलत हुई
तो प्रतिकार भी करुँगी
साहस है मेरे
कदमो की ताल मापने का तो चलो
मैं त्यार हूँ ||
प्रिया मिश्रा :)
****************************
*******************************
गुजर गया वो कुछ नहीं
आने वाले कल में
नवजीवन है
प्रिया मिश्रा
**************************
*******************************
ठहरी हुई मिट्टी से
बना दो कोइ खिलौना
की वो एक मुस्कराहट बन जाये
मासूम सी ,
या बना दो कोइ मूरत
की आस्था बन जाये किसी भक्त की ,
लगा दो कोइ बीज
की नवजीवन बन जाये किसी वृक्ष की
या रहने दो
मृत ही इसको
ये तुम्हारे हाथ में है ||
प्रिया मिश्रा ||
चलो अब से एक नया जीवन बसाते है ||
जहाँ खुद को थोपेंगे नहीं
प्रेम करेंगे
एक दूसरे से
क़द्र करेंगे
एक दूसरे की भावनावो का
जहाँ मेरा - तुम्हारा कुछ ना होगा
सब कुछ हमारा होगा
हमारा अपना
मेरा और तुम्हारा
सुखी रोटी भी
और वो तकिया का आधा कोना भी
जब मैं अँधेरे में रहूँगा तुम प्रकाश दिखा देना
मैं तुम्हे फिशलने नहीं दूंगा
चाहे जीवन में कितनी भी फिशलन हो
मैं संभाल लूंगा
तुम प्रीत निभा लेना थोड़ी
मैं प्रेम निभा लूंगा
सब कुछ बाटेंगे
साझा करेंगे
दुःख भी
सुख भी ||
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ये कितना अच्छा होता अगर यात्रा की कोइ बात ना करता
कोइ कहानी चलती और मंजिल आ जाती
एक भरोसा होता
एक बिश्वाश चलता
ये यात्रा के नाम पर तो पैरो में थकान सी आ जाती है
उनके ,
जिनके थकान अभी उतरे नहीं
और मंजिल कोसो दूर है
इतनी दूर की ,
आँख से नहीं दिखती
और बेधति रहती है मन को
एक आश बनके
एक प्यास बनके
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एक दिन का मदर्स डे
और हजारो की संख्या में विर्धाश्रम
डरावना है
मगर सच है
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ये नए बूट पहनने से
पुराने छाले दीखते नहीं है पैरो के
लेकिन दर्द अब भी है
वो पुराना वाला ||
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ये प्रेम की परिभासा पूछने वाले
उसे शब्द हीन कर देते है
वरना जिन्हे पता है
प्रेम की परिभासा
वो ना पूछते है ना लिखते है
सिर्फ़ महसूस करते है
और निभाते है
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हम दोनों के रास्ते टकरा के
राह बदल लेते है
लेकिन बाते फिर भी होती है
बिन बोले
जितना मैं बोलूँ
वो सुन लेता है
जितना वो बोले मैं सुन लेती हूँ
लेकिन रास्ते अलग है
और मंजिल एक है
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माना की मेरी गेहूँ की बालिया
कच्ची है
लेकिन , मेरी अपनी है
जिस दिन फलेगी
बहुत फलेंगी
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जब बैसाखिया टूटी थी मेरी
मैं तो समझी अब एक कदम चलना भी ना हो पायेगा
कैसे नापुंगी अपने पैरो से अपनी मंजिल को
लेकिन काँपते पैरो ने ,
मुँह के बल गिरा के
खड़ा रहना सीखा दिया
चलना सीखा दिया
एक बुरे वक़्त ने
आत्मनिर्भर बना दिया||
प्रिया मिश्रा :)
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खामोश ही रहने दो हमको
बातों से मामले सुलझते नहीं
उलझ जाते है
प्रिया मिश्रा :)
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मैंने मुस्कुराना सिख लिया
जीवन ने फिर से मेरे अंदर जन्म ले लिया
परोसती थी जब भी गम मैं
उन टूटे से दिनों में
वो बिष बून्द - बून्द
मेरे जीवन को मारता जाता था
ये अमृत मुस्कराहट की
चाहेँ दो ,
चाहेँ लो
जीवन जन्म लेगा फिर से
एक नए शिशु की तरह
तुममे, फिर से ||
प्रिया मिश्रा :)
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मैं तुम्हारे हर बात पे हुँकार नहीं भरूंगी सिर झुका के
बात पते की हो तो बोलो
ज्ञान की हो तो बोलो
सर्वस्य कल्याण की हो तो बोलो
चलूंगी तुम्हारे साथ
कदम से कदम मिलाकर
लेकिन फिर कोइ दूसरी बात अगर गलत हुई
तो प्रतिकार भी करुँगी
साहस है मेरे
कदमो की ताल मापने का तो चलो
मैं त्यार हूँ ||
प्रिया मिश्रा :)
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गुजर गया वो कुछ नहीं
आने वाले कल में
नवजीवन है
प्रिया मिश्रा
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ठहरी हुई मिट्टी से
बना दो कोइ खिलौना
की वो एक मुस्कराहट बन जाये
मासूम सी ,
या बना दो कोइ मूरत
की आस्था बन जाये किसी भक्त की ,
लगा दो कोइ बीज
की नवजीवन बन जाये किसी वृक्ष की
या रहने दो
मृत ही इसको
ये तुम्हारे हाथ में है ||
प्रिया मिश्रा ||
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