| वर्तमान समय |
वर्तमान समय ऐसा है जैसे कोइ कल्पना ना की हो
की बादल छायेंगे मगर दौर आँधियो का चलने लगा है ||
ज़रा सी बूंदा - बाँदी है | अभी मेघ बरसा भी नहीं
और दौर मंदियो का चलने लगा है ||
सोचा ना था कल का पाला पंछी खुद को मुँह चिढ़ाएगा
और एक वक़्त मेरे पैरों में भी बेड़िया लाएगा ||
ये घरो में बैठ के जरा अच्छा नहीं लगता
बच्चो को कल क्या खिलाऊंगा ये चिंता सताते रहती है ||
बीवी से जो अब तक सिर्फ सन्देश हुआ करते है
अब उनके हाथो का शंदेश खाते है
ये वक़्त भी कभी - कभी कितने मीठे हो जाते है ||
बेटी के पायलो की छुन - छुन से संगीत सा बजता है
बेटे को जिम्मेदारियों में लेना भी अच्छा लगता है ||
देखता हूँ कितना संस्कार भरा है इन नई पीढ़ियों में
माँ - बाप का हाथ पूरा - पूरा लगता है ||
ये पुराने बरगद की छाँव में नए कोपल भी
सयाने हो गए है ||
मेरे बच्चे अपने दादा- दादी के आँगन में कितने
फल - फूल गए है ||
अच्छा नहीं है ये पिंजरे का जीवन
मगर अपनों के साथ कुछ पल भी अच्छा लगता है ||
प्रिया मिश्रा :)
वर्तमान समय ऐसा है जैसे कोइ कल्पना ना की हो
की बादल छायेंगे मगर दौर आँधियो का चलने लगा है ||
ज़रा सी बूंदा - बाँदी है | अभी मेघ बरसा भी नहीं
और दौर मंदियो का चलने लगा है ||
सोचा ना था कल का पाला पंछी खुद को मुँह चिढ़ाएगा
और एक वक़्त मेरे पैरों में भी बेड़िया लाएगा ||
ये घरो में बैठ के जरा अच्छा नहीं लगता
बच्चो को कल क्या खिलाऊंगा ये चिंता सताते रहती है ||
बीवी से जो अब तक सिर्फ सन्देश हुआ करते है
अब उनके हाथो का शंदेश खाते है
ये वक़्त भी कभी - कभी कितने मीठे हो जाते है ||
बेटी के पायलो की छुन - छुन से संगीत सा बजता है
बेटे को जिम्मेदारियों में लेना भी अच्छा लगता है ||
देखता हूँ कितना संस्कार भरा है इन नई पीढ़ियों में
माँ - बाप का हाथ पूरा - पूरा लगता है ||
ये पुराने बरगद की छाँव में नए कोपल भी
सयाने हो गए है ||
मेरे बच्चे अपने दादा- दादी के आँगन में कितने
फल - फूल गए है ||
अच्छा नहीं है ये पिंजरे का जीवन
मगर अपनों के साथ कुछ पल भी अच्छा लगता है ||
प्रिया मिश्रा :)
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