हमने इश्क के जितने रंग देखे है
उतने तो मौसम  भी नहीं बदलते
प्रिया मिश्रा :)

कल हजारो देखे थे
आज एक भी नहीं
ये वक़्त की चाल हैं
वक़्त बदल के वक़्त पे हस्ता है
प्रिया मिश्रा :)

ये घड़घड़ की आवाज है
जाने कौन सी चक्की चलती है
जाने कौन सा वक़्त पिस्ता है
जाने कौन सा वक़्त चलता है
कभी ऊपर है
कभी निचे है
जाने कौन सा वक़्त रोता है
जाने कौन सा वक़्त हस्ता है
ये घड़घड़ की आवाज है
जाने कौन सी चक्की चलती है
जाने कौन सा वक़्त पिस्ता है
प्रिया मिश्रा :)

एक भूखा पेट
एक दिन खुद को ही खा जाता है ||

प्रिया मिश्रा :)

ये टूटे हुए चप्पलो की
जिसने तस्वीरें ली है
वो तस्वीरें जीवंत हैं
और आत्मा मरी हुई है ||

प्रिया मिश्रा :)

आपका आने वाला हर दिन
वो गीली मिट्टी  है
जिसे आप
कोइ भी आकार दे सकते है
तो संभल की सोचिये
और अच्छा सोचिये
भला सोचिये ||
प्रिया मिश्रा :)

वो गले मिल के रोने वाला कोइ अपना ही होगा
गैरो के लिए कभी कोइ इतना नहीं फूटता
वो सूखा पत्ता भी बड़ी पीड़ा देता है
जिसे टूटने की उम्मीद नहीं होती ||

प्रिया मिश्रा :)

ये आशा ही प्रयाश की जननी होती है
और प्रयाश सफलता की कुंजी
कही अधिक सफलता उन्नमाद का कारन हो जाये
और व्यक्ति दो कदम पीछे ना चला जाये
इसलिए सफलता के तालों  में हमने अक्सर
जंग लगे देखे है ,
और फिर उनसे ही नवजीवन फूटते देखा है ||

प्रिया मिश्रा :)

ये इंद्रधनुष सा तेरा मेरे जीवन में यूँ बिन बताये आ जाना
तेरे मन की बारिश का संकेत देता है ||
प्रिया मिश्रा :)

यूँ ही प्राण दान लेलो तुम
ऐसे कपट कि झोली में प्रेम की भिक्षा ना माँगो
अपमान होगा दान का
अपमान होगा प्रेम का
एक स्वार्थ के लिए सर्वस्य ना बिगाड़ो तुम
यूँ ही प्राण दान लेलो तुम ||

प्रिया मिश्रा :)

ये खबरों का सिलसिला चलता रहा
इश्क इधर की हवाओं में भी था
उधर के हवाओ में भी ||

प्रिया मिश्रा :)

किसी सयाने ने कहा है
अधिक सयाने बनोगे  घनचक्कर बन जाओगे ||

प्रिया मिश्रा :)

चाहे लिख दो कोइ कविता
चाहे लिख दो ग्रन्थ
प्रीत नहीं तेरे शब्दों में तो
पन्ना - पन्ना भुजंग

प्रिया मिश्रा :)

नदी की तेज धारा
और सफल व्यक्ति के कदम
आँधियो में भी पीछे नहीं मुड़ते

प्रिया मिश्रा :)

प्रेम सत्य है
पवित्र है
लेकिन परीक्षा मांगता है
अटल प्रेम की परीक्षा ||

प्रिया मिश्रा :)

हमने तो घूँघट में ही जिंदगी गुजार दी
ना दुनिया देखी
ना दुनिया की लाचारी
बस देखे है तो अपने कदमो के
महावर के छाप ,
मेरे हर घर में
मेरे हर घर के कोनो में
और उनके हिर्दय में
जिन्होंने दुनिया देखि तो सही
पर आँखे मेरी ली
उधार की
प्रेम की
हिर्दय  की ||

प्रिया मिश्रा

अलविदा नहीं कहा हमने
फिर मिलेंगे का वादा लेके
मंजिल एक कर ली
और रास्ते साझा कर लिए

प्रिया मिश्रा :)

प्रेम समर्पण के भाव को लेके चलता रहा
प्रेमिका प्रेरणा पाती  रही
और प्रेमी प्रेरणा देता रहा
फिर एक मोड़ आया जहाँ पाया हुआ सारा चूका के
आगे बढ़ना था ,
दोनों ने अपना - अपना भाग चुकाया
फिर आगे बढ़ चले
कुछ पाने को
कुछ खोने

प्रिया मिश्रा :)

मैं गुजरा हुआ इतिहास लिखने का इक्षुक  नहीं हूँ
मैं नीव की ईंट को पुर्जन्म देने में बिश्वाश रखती  हूँ
इतिहास तो बहोत है
परन्तु पुनर्जन्म
यदा - कदा  ही होते है

प्रिया मिश्रा :)

भूखा व्यक्ति आपको देख के मुस्कुरा भी दे
तो उसके पैरो में स्वर्ग समझो
क्युकी , पेट की ऐठन
और कुछ मुड़ने नहीं देती
वो सिर्फ मुक्ति चाहती है
जो कई दिनों से उसे
कई वर्षो के श्राप में उसे मिली है

प्रिया मिश्रा :)

गरीबी का रुदन धीमा होता है
अमीरी के कानो तक उसकी सिसकियाँ नहीं जाती ||

प्रिया मिश्रा :)

पैरों  में फटी बेवाय
और किस्मत की हाय
ये नरमी से भरते है
धीरे - धीरे
वक़्त के साथ ||

प्रिया मिश्रा :)

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