बिष के भरे घड़े में कोइ
मार दे कंकड़ अमृत के
ऐसे कोइ आ जाये
बिना किसी संदेशे के
जीवन कितना रंग बिखेर दे
सातों  रंगो का सपना हो
बिष के भरे घड़े में कोइ
मार दे कंकड़ अमृत के
ऐसा कोइ अपना हो ||

चांदनी सी चमकती जाये
सूरज सा सुनहरा दिन अपना हो
बिष के भरे घरे में कोइ
मार दे कंकड़ अमृत के
ऐसा कोइ अपना हो ||

प्रीत की रीत नई नही कोइ
बस अपनी राह में थोड़े रोड़े है
चाहूँ एक बयार मीठी सी
जो चुन ले राह के रोड़े को
फूल बन के प्रीत बिखरे
कदमो तले मेरे चाँदनी - ही चॉँदनी बिखरी हो
बिष के भरे में कोइ
मार दे कंकड़ अमृत के
ऐसा कोइ अपना हो ||

एक इंद्रधनुष सा जीवन हो
एक तारो की बारात हो
चाँद बैठा  हो दूल्हा बन के
और आसमान का सामियाना हो
धानी चुनर मैं ओढू
प्रीत ही मेरा गहना हो
बिष के भरे में कोइ
मार दे कंकड़ अमृत के
ऐसा कोइ अपना हो ||

प्रिया मिश्रा :)

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