हर घर में तो नहीं लेकिन हर रोज कही किसी घर में झगड़ा तो होता ही है ||
कारण
१) ईर्ष्या
२) लोभ
३) समानता का हक़
४) मानशिक संक्रीणता
५) अकारण बल प्रयोग या फिर कह ले खुद को काबिल साबित करने की भूख
६) मानशिक परेशानी के कारन जन्मता अवसाद
और भी कई कारन हो सकते है ||

लेकिन अगर रोक - थाम पे धयान दिया जाये और संभल के कार्य किया जाये तो इसे रोका जा सकता है ||
इसे रोकने का सबसे बढ़िया तरीका है क्रोध पे नियंत्रण  और क्रोध पे नियंत्रण का सबसे बढ़िया तरीका है ध्यान और ध्यान का सबसे बढ़िया तरीका है प्रभु के प्रति समर्पण ||

बच्चो में इसका  बहोत ही गहरा  प्रभाव पड़ता है || या तो बच्चे बहोत सहम  जाते है | या वो भी मानशिक रोगी हो जाते है | अर्थात ये भी एक बिषाणु  की तरह मानव प्रतिरोधक क्षमता को खाते  जा रहा है ||

इसका एक ही बेहतर विकल्प है ||
आपसी प्रेम
एक दूसरे की बातो को सुने
 एक दूसरे को समय दे ||
सबकी भावनावो की क़द्र करे ||
मानव  जीवन को अधिक महत्वा दे ||
खुद से प्रेम करे और दुसरो से भी ||
शांति का अनुभव करे ||
अगर आपको गुसा आये तो शांत रहना सीखे || किसी एकांत स्थान पे जाके  बैठे ||
याद रखे आपका एक गलत बेवहार कई आने वाली पीढ़ियों के लिए घातक साबित हो सकता है ||
जीवन को बिकाश देने के लिए ही अपना कदम बढ़ाये || खुद को विकसित  करे और दुसरो को भी |
जागरूकता से भी घर के झगड़ों   रोका जा सकता है |
अगर कोइ व्यक्ति आपके आस - पास परेशां है तो उसके पास बैठे उसके उदाशी  का कारन पूछे |
घर बनाने के लिए काम करे | काम करने के लिए घर को मकान ना बना दे |
ईंट - पत्थरो के मकान में जाले लगते है
और हस्ते - खेलते घर में जीवन बसता  है

जय हिन्द
प्रिया मिश्रा :)

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