लोहा लेना सीखा था मैंने
लोहा पिघलता गया
ढलता गया
एक आकार में बदलता गया
वो आकार मेरा ही रूप था
जो पहले से साकार था
लोहा लेना सीखा तथा मैंने
लोहा पिघलता गया
ढलता गया ||

प्रिया मिश्रा :)

Comments

Popular posts from this blog