"रुको नहीं "

अथक प्रयाश जरुरी है
तुम पहिया हो ये एक धुरी है
वक़्त , वक़्त के साथ गुजर जायेगा
ये सुबह भी  शाम बन ढल जायेगा
तुम रुकना मत
तुम थकना मत
तुम योद्धा हो
तुम वीर हो
तुम भारतवर्ष के कर्मवीर हो
तुम ज्ञान हो 
तुम कल हो
 तुम आज हो
तुम विद्यार्थी हो
तुम प्रकाश हो ||

गौरव गाथा भारत की
कलमों से ही लिखी गयी
कागज हमेसा साक्षी रहा
इतिहास बना और छपता गया
वो लिखने वाला कोइ और नहीं
तुम जैसा ही  कोइ ज्ञानी थी
वो कलम कहाँ  अभिमानी था
वो रंग था
वो रूप था
वो कल था
तुम आज हो
तुम विद्यार्थी हो
तुम प्रकाश हो ||

ज्ञान दीपक जलता रहा
अँधेरा हमेसा छटता रहा हैं
अंधेरो को चिरोगे
तुम वो बलसाली हो
तुम वीर हो
तुम धीर हो
तुम भारतवर्ष के प्रकाश के रंग
तुम इंद्रधनुष के सातो  रंग
तुम गर्मी  में तपती धरती को
तृप्त करते नीर हो
तुम कल थे
तुम आज हो
तुम विद्यार्थी हो
तुम प्रकाश हो ||

चलो - चलो अब रुको नहीं
चलो अब कही बिश्राम ना करो
पैरो के छाले आने - जाने है
लेकिन पद चिन्ह तो बनाने है
ये पद के लहू
जब मिटटी से मिल जायेंगे
कोइ कमल -फूल खिलाएंगे 
कमल - कमल ही बाग़ - बाग़ में
शिक्षा होगा
राह - राह में
हम वो एक एक शहर बसायेंगे
तो उठो चलो
थको मत
तुम कीचड़ नहीं
तुम कमल हो
तुम बिद्यार्थी हो
तुम प्रकाश हो ||

ये हार का तमगा साथ रहेगा
ताने भी कानो में पड़ते रहेंगे
लेकिन योद्धा कहा हारा है
वो मन से हमेसा शिवाजी रहा
पृथ्वीराज चौहान  का प्यारा है
है रानी लक्ष्मीबाई का तलवार वो
जीत ही उसका नारा है
तो योद्धाओ  कौन तुम्हे
हरा पायेगा
जो आएगा वो मारा जायेगा
ये कलम तुम्हारी तलवार है
तुम्हारी जीत ही तुम्हारा साक्षात्कार है
तो उठो चलो
थको मत
तुम बिद्यार्थी हो
तुम प्रकाश हो ||

प्रिया मिश्रा :)

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