गुजरे हुए खुशनूमा पलों
को समेट के रखना वैसा ही है
जैसे सूखे फूलों में खुसबू समेट के रखना
दोनों ही मुश्किल है
लेकिन कलाकारी है
रंगो को जिन्दा रखना
अँधेरे में ,
जहाँ प्रकाश छूता भी न हो उस कैनवास को
जो बंद है सात परतो में दिल के ||
प्रिया मिश्रा :)

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अधूरी बात पे किताब कैसे लिख दे
कुछ खोलो मन को
टटोलो खुद को कही निकल जाये कोइ जज्बात
जो जिन्दा हो अभी
की,
अर्थियो के हरे बाँस की टहनियों में में भी जीवन बसता  है
जब तक वो जले ना
तुम तो सिर्फ टूटे हो
अभी  तो तुम्हारी हर साँस में जीवन बसता है
तो टटोलो खुद को
खोलो खुद को
कही कुछ निकल आये जज्बात
जो जिन्दा हो अभी ||

प्रिया मिश्रा :)
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 एक स्त्री से प्रेम और एक एक स्त्री का अपमान
एक स्त्री प्रेमिका
एक स्त्री का ध्यान
एक स्त्री का हरण
और एक स्त्री का मान
सब एक साथ कैसे

प्रिया मिश्रा :)
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