रिश्तो में आ रहे बदलाव को कैसे रोके  

 

 रिश्तों में हो रहे बदलाव को रोकने से पहले ये जानना जरुरी है की .......... ये रिश्तों में आ रहे बदलाव क्यों आ रहे है ?
क्या कारन है .... जो हमसे हमारे रिश्तें दूर होते जा रहे है ||

ऐसे बहोत से सवाल होंगे जो आपके भी मन में आते होंगे ||

कभी सोचा है हमारे अहम् रिश्ते कौन से है ?  हमें उनके साथ कैसे रहना चाहिए   ? हमें उनके साथ ऐसे ही क्यों रहना चाहिए ?


शायद हाँ और शायद ना ........... हमने कभी नहीं सोचा |

मुझे लगता है ..........हमारे अहम् रिश्तें मुख्यतः चार या पांच ही होते है .............. हम उन पांच लोगो को खुस करने के लिए पांच सौ करोड़ रिश्तों को खुस करने का प्रयाश करते है | और हम अपने अपनों से दूर हो जाते है | हम खुद से दूर हो जाते है ||
समझने की आवश्कता है ................... आखिर क्या करे की हमारे अपने हमारे करीब रहे  ?


जब हम पैदा हुए... बड़े हुए.... और हमें जो जैसे कहता गया हम करते गए | हमने कभी नहीं सोचा ऐसा क्यों ?
वो क्यों ?
हम बस आँख बंद बैल की तरह मुड़ते गए .............. बाद में बड़े हुए तो रिश्तो के रिश्ते फिर उनके रिश्ते ..............फिर उनके रिश्तो के रिश्ते .................ऐसे असंख्य रिश्ते हमारे  आँखों के सामने नाचने लगे | किसी की कुछ बातें .............किसी की कुछ बातें |

हमने अपने बड़ो से सिर्फ हुकम चलाना सीखा ............कभी भी समझना ....समझाना और सुनना नहीं सीखा ............और यही हम अपने बच्चो में भी डालते जा रहे है .............. ये सारे मसलें बहोत बड़ा कारन है हमारे रिस्तो के बिच आ रहे खटास के  ................||

हमें सोचना होगा समझना होगा ............अपने बच्चो को ...........उनके नजदीक रह के उनको सुनना होगा ............. हमें अपने -अपनों को प्यार देना होगा |

हमारी सबसे गन्दी आदत रही .........अपने बच्चो को ऊँगली पकड़ के चलाने की ..............जिस से हमारे बच्चे अपाहिज होते जा रहे ...........हम अपनी सोच उनपे थोप रहे है | अपनी सभ्यता का झूठा दिखावा कर के .............. हम अपने ही अपनों की जिंदगी के साथ खेल रहे है ||

पहले इतना नहीं था ................ परिवार में बिछोह ...........लेकिन अब है .............और कारन है हम सब ||

तो हमें अपने आप में सुधार की आवश्कता है |
हमें आवश्कता है ............... अपने अपनों को सुनने को |
उन्हें दिल से और गले से लगाने की |

हमेसा अपनी मर्जी न थोपे | चाहे वो आपके माँ - पापा हो या आपके बच्चे या आपके अपने दोस्त | उनकी सुने उनका साथ दें | दुसरो को समझाने  से पहले ................ उनकी मनोस्थिति को समझे ................... अधिक से अधिक समय उनेक साथ बिताएं .................. अब इसका मतलब ये नहीं की .......... उनके गले के पास बैठे  रहे ............. इसका मतलब सिर्फ इतना है की जरुरत पे साथ दे ||

कभी -कभी सलाह की नहीं साथ देने वाले की जरूररत होती है || हमें इस बात को समझना होगा .......... बहोत गहराई से ||

ये फोन कॉल पे वाली मित्रता ............... और रिश्ते ना निभाएं ..................... रिश्तो को इतना गाढ़ा बनाये की ................. वो आपके साथ सारी उम्र बने रहे बिना ............किसी कारन के || कारन लेके तो पशु भी साथ रहते है ............... हम इंसान है ........... तो हमें इंसान ही बने रहना चाहिए ||

शुक्रिया
सुबह दिन रहे आप सब का ||

प्रिया मिश्रा :)) 

 

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