हमारे बच्चे हमारे मित्र होने चाहिए ना की जिम्मेदारी 

 

हमे अपने बच्चो की परवरिश नहीं करनी चाहिए ...........बल्कि उनकी उम्र के साथ ताल -मेल बैठानी चाहिए || ये परवरिश का बहाना कर हम अपने बच्चो को दूर करते जा रहे है ..........खुद से भी और समाज से भी ......हमारे बच्चे अकेले होते जा रहे है ....... हमे अपने बच्चो को ........उम्र के हर पहलु के बारे में बताना चहिये ..........
अभी जरुरत है
अपने बच्चो को बताने की ....क्या सही है क्या गलत है ....... और कृपया इसे अपनी जिम्मेदारों का नाम ना दे ........... क्योकि जब हम अपने बच्चो को जिम्मेदारियों की तरह देखते है ..... तो वो बस एक हमारी जमा -पूंजी वाली सोच हो जाती है ........... और धीरे -धीरे हम खुद को और अपने बच्चो को अपाहिज बना रहे है ||
हमे अपने बच्चो को बताना होगा ...
उम्र बढ़ने के होने वाले बदलाव के बारे में
लड़की और लड़के के बिच होने वाले अट्रैक्शन के बारे
किसी भी व्यक्ति के स्पर्श के बारे में
अपनी सुरक्षा को लेके जागरूकता के बारे में
हमे अपने बच्चो को ........
आधुनकता का सही मतलब समझाना होगा
समझाना होगा उन्हें की .........
इस पुरे समाज में भी दो तरह का समाज है
एक भेड़ियाँ समाज
एक मनुष्य समाज

हमे भेड़ियाँ समाज के बारे में अपने बच्चो से खुल के बात करने की जरुरत है ||
हमारे बच्चो को ........हमारे तजुर्बे की जरुरत कम  और हमारे साथ की जरुरत ज्यादा है .....
और हमे इस बात को समझने की जरुरत है ||

वरना हर दिन एक नया भेड़ियाँ हमारे बच्चों को ले जायेगा ............... उनको मार देगा
और हम
हम सिर्फ .........

आल मैन आर डॉग एंड  आल वीमेन का विच लिखते रह जायेंगे

प्रिया मिश्रा :)) 

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